रहस्यमय हालत में पति के लापता होने के बाद शिल्पा ने बोलेरो पर खोला चलता फिरता रेस्टोरेंट

बोलेरो पर रेस्टोरेंट खोलने वाली शिल्पा की मदद करेंगे आनंद महिंद्रा...

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 शिल्पा मंगलौर में एक मोबाइल फूड आउटलेट चलाती हैं। उन्होंने महिंद्रा के बोलेरो पिकअप ट्रक को ही आउटलेट का रूप दे दिया है। मंगलौर शहर में गांधीनगर इलाके के आस-पास 'हल्ली मेन रोटी' के नाम से आउटलेट खोलने वाली शिल्पा की जिंदगी काफी मुश्किलों भरी रही है। 

महिंद्रा ग्रुप के सीईओ आनंद महिंद्रा ने कहा कि कोई शिल्पा तक उनका संदेश पहुंचा दे कि वे उसके बिजनेस में व्यक्तिगत तौर पर मदद करना चाहते हैं।

शिल्पा के काम में उनका पूरा परिवार उनकी मदद करता है। शिल्पा का भाई पहले सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करता था, लेकिन अब वह पूरी तरह से शिल्पा के साथ काम करता है। उनके माता-पिता सब्जी और बाकी सामान खरीदकर लाते हैं।

सोशल मीडिया का कितना सकारात्मक इस्तेमाल हो सकता है, इसकी मिसाल पेश की है महिंद्रा ग्रुप के सीईओ आनंद महिंद्रा ने। दरअसल दो दिन पहले किसी पत्रकार ने मंगलौर की एक महिला शिल्पा की सफलता की कहानी ट्वीट की थी। रहस्यमय हालत में पति के लापता हो जाने के बाद शिल्पा ने खुद का खाने का बिजनेस शुरू किया था। इसके लिए उन्होंने एक नया महिंद्रा बोलेरो पिकअप भी खरीदा जिस पर वे अपना चलता फिरता रेस्टोरेंट चलाती हैं। बिजनेस के लिए बोलेरो पिकअप का इस्तेमाल होने की बात जब आनंद महिंद्रा को पता चली तो उन्होंने शिल्पा की मदद का प्रस्ताव दे दिया।

आनंद महिंद्रा ने ट्वीट करते हुए कहा, 'इस हफ्ते के खत्म होने के साथ ही आंत्रप्रेन्योरशिप की एक अच्छी स्टोरी मिली है। महिंद्रा में हम इसे राइज स्टोरी कहते हैं। मुझे बेहद खुशी है कि शिल्पा की सफलता में बोलेरो का भी छोटा सा योगदान है। क्या कोई उन तक पहुंचकर यह बात बता सकता है कि मैं उन्हें एक बोलेरो पिकअप ट्रक देकर उनको दूसरा आउटलेट शुरू करने में मदद करना चाहता हूं।' उन्होंने कहा कि कोई उस महिला तक उनका संदेश पहुंचा दे कि वे उसके बिजनेस में व्यक्तिगत तौर पर मदद करना चाहते हैं। लेकिन यह तो कहानी रही आनंद महिंद्रा के ट्वीट की। असली कहानी शिल्पा के संघर्षों की है।

दरअसल शिल्पा मंगलौर में एक मोबाइल फूड आउटलेट चलाती हैं। उन्होंने महिंद्रा के बोलेरो पिकअप ट्रक को ही आउटलेट का रूप दे दिया है। मंगलौर शहर में गांधीनगर इलाके के आस-पास 'हल्ली मेन रोटी' के नाम से आउटलेट खोलने वाली शिल्पा की जिंदगी काफी मुश्किलों भरी रही है। सिर्फ दसवीं तक की पढ़ाई कर स्कूल छोड़ देने वाली शिल्पा किसी शौक में उद्यमी नहीं बनी हैं। बल्कि उन्हें हालात ने रेस्टोरेंट खोलने पर मजबूर किया। एक वक्त ऐसा भी आ गया था जब शिल्पा को अपने घर का खर्च चलाना भी मुश्किल पड़ रहा था। शिल्पा ने बताया, ' मैं कभी बिजनेस नहीं शुरू करना चाहती थी, लेकिन परिस्थितियों ने आज मुझे यहां पहुंचा दिया।'

हासन की रहने वाली शिल्पा एक किसान परिवार में जन्मीं और वहीं पली बढ़ीं। गांव में रहने की वजह से उनकी पढ़ाई नहीं पूरी हो पाई। दसवीं कक्षा के बाद उन्हें स्कूल छोड़ना पड़ा। जल्दी ही उनकी शादी हो गई और 2005 में वे अपने पति राजशेखर और तीन साल के बच्चे के साथ मंगलौर आकर रहने लगीं। यहां उनके पति ट्रांसपोर्ट का बिजनेस करने लगे। 2008 में राजशेखर किसी काम से बेंगलुरु गए और फिर वहां से कभी लौटकर ही नहीं आए। शिल्पा ने पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई औऱ काफी खोजबीन भी की लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। इसके बाद उनका परिवार टूट सा गया और वे अवसाद में चली गईं।

शिल्पा
शिल्पा

घर का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा था। शिल्पा बेटे की फीस नहीं भर पा रही थीं। इस हाल में उन्होंने किसी तरह खुद को संभाला और एक साइबर कैफे में नौकरी करने लगीं। उन्होंने कॉस्मेटिक की दुकान में मार्केटिंग और सेल्समैन का भी काम किया। उस वक्त उन्हें हर महीने के 6,000 रुपये मिलते थे। लेकिन इतने में परिवार का गुजारा होना मुश्किल था। एक बार ऐसे ही उनके घर वाले उनके बनाए खाने की काफी तारीफ करने लगे। तब शिल्पा का ध्यान खाने का बिजनेस शुरू करने की ओर गया। उन्होंने अपने छोटे भाई से बात की और अच्छा खाना उपलब्ध कराने का बिजनेस शुरू किया।

उन्होंने अपनी सेविंग के 1 लाख रुपये निकाले। ये पैसे उन्होंने अपने बच्चे की पढ़ाई के लिए रखे थे। उन्होंने बोलेरो का एक नया पिकअप लिया और उसी पर खाना बनाने लगीं। हालांकि इस पर उन्हें काफी कुछ सुनना पड़ा। इस काम के लिए उनकी आलोचना की गई। क्योंकि लोगों को लगता था कि इतने पैसे लगाकर ये बिजनेस शुरू करना सही नहीं है और इसमें रिस्क भी ज्यादा है। लेकिन शिल्पा ने किसी की परवाह नहीं की और अपनी मेहनत के दम पर अपने फैसले को सही साबित किया। धीरे-धीरे उनका बिजनेस बढ़ता गया और एक दिन ऐसा भी आया जब उनका रोज का टर्नओवर 7,000 रुपये तक पहुंच गया।

उनका पूरा परिवार उनकी मदद करता है। शिल्पा का भाई पहले सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करता था, लेकिन अब वह पूरी तरह से शिल्पा के साथ काम करता है। उनके माता-पिता सब्जी और बाकी सामान खरीदकर लाते हैं। बिजनेस भले ही अच्छा चल गया हो, लेकिन शिल्पा ने अपने पति को खोजने की उम्मीद नहीं छोड़ी है। शिल्पा कहती हैं, 'मुझे लगता है कि कभी तो मेरे पति लौटकर वापस आएंगे।' शिल्पा अब अपना दूसरा आउटलेट खोलने का विचार कर रही हैं, जिससे कि उन्हें और आमदनी हो सके।

ऐसे में आनंद महिंदा की ओर से ट्विटर पर मिला ऑफर उनकी योजना को पंख लगा सकता है। महिंद्रा के इस ऑफर पर तमाम लोगों ने उनकी सराहनी की। वहीं, कुछ लोगों ने उनसे शिल्पा को फाइनैंशल हेल्प देने का सुझाव दिया। इस आनंद महिंद्रा ने ट्वीट कर जवाब दिया, 'मैं नहीं चाहता कि उन्हें किसी तरह की चैरिटी की जरूरत है या वह ऐसा चाहती हैं। वह एक सफल आंत्रप्रेन्योर हैं। मैं उनके विस्तार में निवेश करने का ऑफर दे रहा हूं।'

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