...और 30 मिनट में तय हो गया भविष्य

कोलकाता के 3 युवाओं के स्टार्टअप की कहानी

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कोलकाता के रितेश सिंघानिया और समिक बिस्वास एनआईटी वारंगल के कॉलेज में मिले। वो एक स्टार्टअप लाने के इच्छुक थे जो छात्रों को उनके पसंदीदा कॉलेज चुनने में सलाह दे सके। ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद दोनों ने मल्टीनेशनल कंपनियों में नौकरी शुरू कर दी मगर स्टार्टअप का आइडिया नहीं छोड़ा। इसी दौरान एक बार कैनन पार्टनर के राहुल खन्ना के साथ गूगल हैंगआउट ने उनके स्टार्टअप के सपने को नया पंख और आकार देने का काम किया।

रितेश बताते हैं कि उन 30 मिनटों ने चीजों को देखने का उनका नजरिया ही बदल डाला, “हमने स्टार्टअप के बारे में एक व्यापक नजरिया और दिशा पाया।” उन्होंने तीसरे को-फाउंडर गौरव मित्तल के साथ हाथ मिलाया जो तकनीकी पहलुओं के देखते हैं। इस तरह शुरू हुआ Praclyका सफर।

Pracly उद्यमियों के लिए एक एडवाइजरी प्लेटफॉर्म है, जिनके जरिये वो बिजनेस से जुड़े किसी भी समस्या के लिए उस क्षेत्र के विशेषज्ञ से फोन कॉल या वन-टू-वन मुलाकात से समाधान पा सकते हैं। इससे दोनों पक्षों को फायदा है।

• युवा उद्यमियों को मार्गदर्शन की उम्मीद में लगे लोगों को विभिन्न क्षेत्रों के एक्सपर्ट्स से बातचीत का मौका मिलता है।

• एक्सपर्ट्स भी अपने समय को सही से मैनेज कर पाते हैं और उन्हें अपने अपॉइंटमेंट का शेड्यूल तय करने में आसानी होती है।

तीनों ने मिलकर Pracly को शुरू तो कर दिया मगर उन्हें और बेहतरीन मौकों की जरुरत थी। रितेश बताते हैं, “हम कोलकाता में थे जो एक टेक्नोलॉजी स्टार्टअप के लिए कोई बहुत अच्छी जगह नहीं है। हमने पुणे जाने का फैसला किया, जहां हमारी मुलाकात विजय आनंद से हुई और हम इनक्युबेशन प्रोग्राम के लिए सेलेक्ट हुए।” इनक्युबेटर से हमें काफी मदद मिली।

Pracly को नवंबर 2013 में लॉन्च किया गया और आज उसके बोर्ड में 25 एक्सपर्ट हैं। रितेश बताते हैं कि वो अपने बोर्ड में एक्सपर्ट की तादाद को और बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। शुरुआत में प्रोडक्ट फ्री है लेकिन आगे चलकर किसी एक्सपर्ट से बात या मुलाकात के लिए चार्ज देना होगा।

रितेश बताते हैं कि फर्स्ट जनरेशन के ऐसे बहुत सारे उद्यमी हैं जिन्हें किसी खास विषय में सहयोग की जरुरत है। उद्यमी ज्यादा कनेक्टेड और टेक सेवी हैं जिस वजह से इस क्षेत्र में इनिशियल प्रोडक्ट वैलिडेशन बेहतर ढंग से होता है। नतीजों का बारीकी से अध्ययन के बाद Pracly के मॉडल को और बेहतर और समय की मांग के अनुरूप बनाया जाएगा।

रितेश बताते हैं कि आइडिया वैलिडेशन, डिजिटल मार्केंटिंग, एसईओ, बेहतर विकास ऐसे विषय हैं जिन पर सबसे ज्यादा मदद खोजी जाती है। सबसे कॉमन सवाल ये होता है कि कैसे ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों को आकर्षित किया जाए और कोई विशेष आइडिया बिजनेस के लिहाज से कितना अच्छा या खराब है। हमारा प्लेटफॉर्म एक क्यूरेटर की भूमिका निभाता है। रितेश कहते हैं, “उद्यमी किसी प्लेटफॉर्म पर जाकर ऐसे लोगों से सलाह लेने में हिचकते हैं, जिन्हें वो पहले कभी देखे या सुने नहीं होते। पैसा देकर सलाह लेने में वो हिचकते हैं मगर वो लोग जो हमारे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर चुके हैं, उन्हें इससे काफी फायदा पहुंचा है।” अब उनकी योजना अन्य क्षेत्रों में भी ऐसी ही सेवा मुहैया कराने की है।