वर्चुअल वर्ल्ड में फ्लर्टिंग की नई आज़ादी, ‘TrulySocial’

बैंकिंग की नौकरी छोड़ ‘TrulySocial’ को शुरू कियायूके में है ‘TrulySocial’ का मुख्यालयदुनिया भर में ‘TrulySocial’ के ग्राहक

0

कभी आपने वर्चुअल रियलिटी के जरिये डेटिंग की कोशिश की है ? क्या आप सोचते हैं कि इसका इस्तेमाल वास्तविक जीवन में रोमांस के लिए हो सकता है ? आप भले ही विश्वास करें या ना करें लेकिन गेमिंग ऐप फ्लॉरिटल रियलिटी शुरू करने के पीछे यही आइडिया काम आया था। जिसे बनाया था TrulySocial ने। इस गेमिंग ऐप को करीब पांच साल पहले हकीकत में बदला सेबस्टियन कोमन ने। जब सोशल गेमिंग की शुरूआत भर हुई थी। तब सेबस्टियन ने देखा कि बाजार में जो भी गेम हैं उनमें नीरसता और दोहराव है।

वो जानते थे कि कुछ वक्त बाद लोग इन खेलों से बोर हो जाएंगे और तब उनको तलाश होगी नये तरह के खेलों की। इसके अलावा उन्होने देखा कि इस बाजार में कई गैर पारंपरिक खिलाड़ी हैं तो कुछ नये हैं। इतना ही नहीं कई महिलाएं भी इस क्षेत्र में उतर रही हैं लेकिन कोई उन पर ज्यादा ध्यान नहीं दे रहा है। तब सेबस्टियन अपने आइडिये को सलोनी सहगल के पास ले गए। उस वक्त सलोनी बार्कलेस बैंक में वाइस प्रेजिडेंट के पद पर थीं। सेबस्टियन ने उनसे पूछा कि उद्यमी बनना चाहेंगी और ‘TrulySocial’ को खड़ा करने में उनकी मदद करेंगी। तब सलोनी ने इस अनूठे प्रस्ताव और इस काम में संभावनाओं को देखते हुए तुरंत अपनी सहमति दे दी। जल्दी ही सेबस्टियन ने बुनियादी तौर पर एमवीपी को तैयार किया इसके लिए उन्होने अमेरिका के कुछ डेवलपरों की मदद ली। तो वही सलोनी ने इस काम के लिए कुछ भारतीय डेवलपरों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश की ताकि काम करने की लागत को थोड़ा कम किया जा सके। इसके लिए उन्होने भारत में सही लोगों की तलाश करनी शुरू कर दी और धीरे धीरे उनके साथ धुरंधर लोग जुड़ते चल गए। ‘TrulySocial’ का मुख्यालय यूके में है लेकिन इसके विकास का काम लंदन और भारत से संचालित होता है।

‘TrulySocial’ की टीम जो 2 लोगों से शुरू हुई थी वो अब 9 तक पहुंच चुकी है और उम्मीद है कि जल्दी ही इस संख्या में और इजाफा होगा। सलोनी के मुताबिक गेमिंग के क्षेत्र में पहले से ही काफी प्रतिस्पर्धा है और कई खिलाड़ी तो ऐसे हैं जो काफी मंझे हुए हैं। वो मानती है कि टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती बोरियत से बचाना है। उनका कहना है कि किसी भी नये गेम को बनाने के लिए सबसे ज्यादा साहस, संसाधन और समय की जरूरत होती है। लेकिन कई बार निवेशक ये बात समझने को तैयार नहीं होते और उनका आरोप रहता है कि उनकी टीम किसी काम को करने में ज्यादा वक्त ले रही है। वो बस ये चाहते हैं कि उनका काम सिर्फ 3 दिन में हो जाए। बहुत कम लोगों को पता होगा कि ‘The Sims’ के निर्माता विल राइट को ये गेम लाने में 6 साल लग गये थे। इसी तरह ‘Angry Birds’ के निर्माता को इस तरह का खेल लाने से पहले 51 दूसरे खेलों पर जोर आजमाइश करनी पड़ी थी।

सलोनी सहगल, सीईओ, ‘TrulySocial’
सलोनी सहगल, सीईओ, ‘TrulySocial’

हालांकि जिस तरीके से पिछले कुछ वक्त में मुफ्त में मोबाइल खेलों की बाढ़ आई है और एमवीपी का निर्माण होना शुरू हुआ है उससे चीजों में कुछ सुधार आया है। टीम अब उपयोगकर्ताओं की राय पर परीक्षण कर सकती है। सलोनी का कहना है कि उनकी टीम जानती है कि वो जो भी उत्पाद बनाएंगे वो दूसरों को अपील करेंगे और उपयोगकर्ताओं को पसंद आएंगे। फिलहाल टीम अगले स्तर पर निवेशक की तलाश में है।

‘TrulySocial’ की टीम का लक्ष्य ऐसे उत्पादों का निर्माण करना है जिसमें मनोरंजन हो, इनोवेटिव हो और उसमें काफी सारा गेमिंग का मजा हो। साथ ही साथ जो रोमांटिक भी हों। क्योंकि बाजार में इस तरह के ज्यादा गेम नहीं हैं जो इस क्षेत्र में फोकस करते हैं। फिलहाल बाजार में राक्षसों की हत्या से जुड़े खेल, वर्चुअल दुनिया में गुडिया के लिए घर बनाना और विभिन्न अवतार से जुड़े खेल मिल जाएंगे लेकिन रिश्तों को लेकर खेल देखने को नहीं मिलेंगे। सलोनी का कहना है कि बाजार में ढेर सारे डेटिंग ऐप मौजूद हैं। लेकिन कई लोग ये नहीं समझ पाते की विपरित लिंग के साथ कैसा बर्ताव किया जाए। हालांकि तकनीक ने ना सिर्फ दूरियों को कम किया है बल्कि लोगों को आपस में भी जोड़ने का काम किया है। ऐसे में फ्लॉरिटल रियलिटी की आज के दौर में और ज्यादा जरूरत हो गई है।

सलोनी का कहना है कि उनकी टीम अपने गेम में सामाजिक संबंध, लोगों के व्यवहार और उनके मनोविज्ञान के साथ साथ न्यूरोसाइंस पर खास ध्यान देती है। कंपनी के अनौपचारिक गेम में जब कोई प्रवेश करता है तो वो 3डी वर्ल्ड में अवतार लेता है जहां पर वो ना सिर्फ फ्लर्ट कर सकता है बल्कि विभिन्न दूसरे तरह के लोगों से मिलता है। कहानी में 90 हजार से ज्यादा लाइनें होती हैं। उत्पाद इस बात को सुनिश्चित करता है कि हर खिलाड़ी की अपनी कहानी हो और कोई बातचीत दो बार ना हो। इसमें काफी फ्लर्ट होता है और खिलाड़ी गेम में आगे बढ़ते जाता है और नंबर जोड़ते जाता है ताकि वो वर्चुअल डेट में पेरिस, स्पेन और दूसरे स्थानों की सैर कर सके।

‘TrulySocial’ की टीम का मानना है कि उनका लाइव बीटा काफी मजबूत है। उनके बनाए गेम को काफी लोग पसंद करते हैं और ये सिर्फ भारत में ही नहीं दुनिया के दूसरे देशों में भी काफी पंसद किया जाने वाला खेल है। इनके बनाए खेल को खेलने वालों में ज्यादातर संख्या महिलाओं की है जिनकी उम्र 18 से 30 साल के बीच की है। और हर खिलाड़ी औसतर 25 से 30 मिनट तक इनके बनाए खेल को खेलता है। अपने भविष्य की योजनाओं का खाका खिंचते हुए इनकी टीम की योजना मोबाइल के लिए मुख्यधारा से जुड़ी कम लागत वाली वर्चुअल रियलिटी डिवाइस बनाने की है। ये उन लोगों के लिए होगी जो मुफ्त में मोबाइल पर कैजुअल गेम खेलने के शौकिन हैं।

सेबस्टियन कोमन, संस्थापक, ‘TrulySocial’
सेबस्टियन कोमन, संस्थापक, ‘TrulySocial’

सलोनी का मानना है कि जिस तरीके से स्मॉर्टफोन और टेबलेट की डिमांड बढ़ी है उसी तरह से गेमिंग और और डेटिंग ऐप्स के बाजार में भी काफी संभावनाएं हैं। खासतौर से भारत में इसकी काफी संभावनाएं हैं। सलोनी का कहना है कि उनके खिलाड़ी आमतौर पर 8 से 12 डॉलर तक खेल में खर्च कर देते हैं जबकि कई ऐसे उपयोगकर्ता भी हैं जो 100 डॉलर तक खर्च करते हैं। जो वर्चुअल अर्थव्यवस्था कि लिए काफी अच्छा है। इन लोगों का मानना है कि अब भी कई चीजें ऐसी हैं जिनमें काफी संभावनाएं हैं और उन पर काफी काम किया जा सकता है।