नोटबंदी के कारण गिरी जीडीपी दर

नोटबंदी के कारण जीडीपी दर 6 फीसदी से नीचे : रपट

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"इकनॉमिक वृद्धि को बनाए रखने के लिए सरकार को बाहरी को भीतरी आर्थिक झटकों से निपटने के लिए संस्थागत सुधार करना चाहिए। इसके लिए सप्लाई में तेजी, लाभ में वृद्धि, रोजगार में वृद्धि और इंक्लूसिव ग्रोथ पर सरकार को जोर देना होगा: आईएमएफ"

"वित्तीय स्थिरता और इकनॉमिक वृद्धि में तेजी के लिए कैश की कमी को खत्म करना होगा और नोटबंदी के दुष्प्रभाव को जल्दी से खत्म करना होगा: आईएमएफ"

अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष, आईएमएफ ने भारत सरकार के लिए एक चिंता की खबर दे दी है। आईएमएफ ने 2016-17 में भारत की वृद्धि दर यानी जीडीपी घटकर 6.6 फीसदी रहने का अनुमान दिया है। नोटबंदी के बाद से ही कई अंतर्राष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियां और ब्रोकिंग फर्में भारत की जीडीपी दर में गिरावट के भारी अनुमान दे रही हैं। आईएमएफ ने कहा है, कि भारत में नवंबर 2016 को की गई नोटबंदी के बाद कैश की कमी और लेनदेन में पैदा हुए संकट की वजह से खपत और बिजनेस में कमी आई है, जिसकी वजह से इकनॉमिक वृद्धि दर को बनाए रखना एक चुनौतीपूर्ण काम है।

देश के सार्वजनिक क्षेत्र के अग्रणी बैंक ने स्वीकार किया है, कि नोटबंदी के कारण चालू वित्त वर्ष (2016-17) की तीसरी तिमाही में जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) की विकास छह फीसदी से कम होने का अनुमान है, हालांकि अर्थव्यवस्था में नकदी की वापसी तेजी से हो रही है।भारतीय स्टेट बैंक की एक रपट में यह जानकारी दी गई है।

हालांकि आईएमएफ ने भारत पर अपनी सालाना रिपोर्ट में यह कहा है, कि जीएसटी की रूपरेखा और उसके क्रियान्वयन की गति में कुछ अनिश्चितताएं बनी हुई हैं। इसे अपनाये जाने से भारत की जीडीपी वृद्धि दर मध्यम अवधि में आठ फीसदी से अधिक पहुंचाने में मदद मिलेगी, क्योंकि यह एकल राष्ट्रीय बाजार सृजित करेगा और वस्तुओं और सेवाओं की देश में आवाजाही बेहतर होगी। साथ ही इसमें यह कहा गया है कि जीएसटी से मौजूदा इनडायरेक्ट टैक्स प्रणाली में उल्लेखनीय सुधार होगा और टैक्स रिफॉर्म जारी रहेगा, जिसमें कंपनी टैक्स की दर चरणबद्ध तरीके से 4 साल में 30 फीसदी से 25 फीसदी पर लाई जायेगी।