डॉक्टर बना किसान, खेती से कमाते हैं लाखों

डॉक्टर बनने का सपना था बन गए किसान, अब केसर की खेती से कमाते हैं लाखों

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अब अमेरिकन केसर नाम की अत्याधुनिक और विकसित प्रजाति की फसल को गर्म इलाकों में भी रोपा जा सकता है। महाराष्ट्र के 27 वर्षीय संदेश पाटिल ने ऐसा कर दिखाया है। 

संदेश पाटिल (फोटो साभार- भास्कर)
संदेश पाटिल (फोटो साभार- भास्कर)
संदेश के मन में कुछ अलग करने का जुनून था। उन्होंने प्रयोग के तौर पर कुछ फसलों के बारे में पढ़ना शुरू किया। उन्होंने अपने यहां की खेतों की जमीन के बारे में भी रिसर्च किया। फिर उन्हें इंटरनेट से केसर की खेती करने के बारे में जानकारी मिली।

संदेश ने अमेरिका के कुछ खास इलाकों और इंडिया के कश्मीर घाटी में की जाने वाली केसर की खेती को जलगांव जैसे इलाकों में करने का कारनामा कर दिखाया है। संदेश ने अपने खेतों में ऑर्गैनिक खेती की।

केसर की खेती से जुड़ी हुई जब भी कोई बात होती है तो कश्मीर का नाम सबसे पहले आता है। क्योंकि इस खेती के लिए सबसे अनूकूल वातावरण कश्मीर जैसी जगहों पर ही मिलता है। लेकिन तकनीक ने कृषि करने के तरीकों को भी बदला है। अब अमेरिकन केसर नाम की अत्याधुनिक और विकसित प्रजाति की फसल को गर्म इलाकों में भी रोपा जा सकता है। महाराष्ट्र के 27 वर्षीय संदेश पाटिल ने ऐसा कर दिखाया है। संदेश मेडिकल के छात्र थे, लेकिन पढ़ाई रास न आने के कारण वे उसे छोड़कर खेती में लग गए अब वे इस खेती से लाखों रुपये कमा रहे हैं।

दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के मुताबिक संदेश पाटिल ने इंटरनेट से ली खेती की जानकारी ली। लोकल और ट्रेडिशनल फसल के पैटर्न में बदलाव किए। जलगांव जिले के मोरगांव खुर्द में रहने वाले 27 साल के संदेश पाटिल ने मेडिकल ब्रांच के बीएएमएस में एडमिशन लिया था, लेकिन इसमें उनका मन नहीं लगा। उन्होंने मेडिकल की पढ़ाई छोड़कर जिद के बलबूते अपने खेतों में केसर की खेती करने की ठानी और अब वे हर महीने लाखों का मुनाफा भी कमा रहे हैं। संदेश बताते हैं कि पहले उनके इलाके में केला और कपास की खेती होती थी। लेकिन इससे किसानों को कुछ अच्छा फायदा नहीं होता था।

संदेश के मन में कुछ अलग करने का जुनून था। उन्होंने प्रयोग के तौर पर कुछ फसलों के बारे में पढ़ना शुरू किया। उन्होंने अपने यहां की खेतों की जमीन के बारे में भी रिसर्च किया। फिर उन्हें इंटरनेट से केसर की खेती करने के बारे में जानकारी मिली। गौरतलब है कि पहले भी राजस्थान और देश के कई अन्य मैदानी इलाकों में केसर की खेती करके अच्छे पैसे कमाने की जानकारियां मिल चुकी हैं। हालांकि जब उन्होंने अपने घर में इसकी चर्चा की तो उनका मजाक उड़ाया गया और लोगों ने इसे करने से मना भी किया। संदेश बताते हैं कि उनके पिता और चाचा इसके खिलाफ थे।

लेकिन संदेश ने किसी की नहीं सुनी। आखिरकार उनकी जिद और लगन को देखते हुए घरवालों ने उनकी बात मान ली। इसके बाद उन्होंने राजस्थान के पाली शहर से 40 रुपए के हिसाब से 9.20 लाख रुपए के 3 हजार पौधे खरीदे और इन पौधों को उन्होंने अपनी आधा एकड़ जमीन में रोपा। संदेश ने अमेरिका के कुछ खास इलाकों और इंडिया के कश्मीर घाटी में की जाने वाली केसर की खेती को जलगांव जैसे इलाकों में करने का कारनामा कर दिखाया है। संदेश ने अपने खेतों में ऑर्गैनिक खेती की। उन्होंने एक साल पहले मई में 15 किलो केसर का उत्पादन किया।

उन्होंने इसे 40 हजार किलो के रेट से बेचा जिससे उन्हें 6.20 लाख रुपये की आय हुई। हालांकि उन्होंने जुताई, बुवाई, कटाई और मजदूरी जैसे कामों में भी काफी पैसे खर्च किए थे। इस फायदे में से उन्होंने लागत घटाई तो उन्हें 5.40 लाख रुपये मिले। ध्यान देने वाली बात है कि केसर केवल ठंड में उगता है, लेकिन संदेश ने कड़ी मेहनत और समर्पण से सफलतापूर्वक जलगांव में सूखे की स्थिति में केसर की फसल उगा ली। अब संदेश की सफलता से प्रेरणा लेकर उनके आस-पास के गांवों और मध्य प्रदेश से कई किसानों ने संदेश से केसर के पौधे लिए और सफलतापूर्वक उनके मॉडल को दोहराया है।

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