पुणे के इस गांव ने किया नामुमकिन को मुमकिन, गांव में मच्छरों का नामो निशां नहीं

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वैसे तो कई स्तर पर मच्छरों से निपटने के लिए अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन पूरी तरह से मच्छरों को भगाना नामुमकिन सा लगता है। पर पुणे के एक गांव ने इस नामुमकिन से लगने वाले काम को मुमकिन बना दिया है।

पुणे के इंदापुर तालुके के अंतर्गत आने वाले संसार गांव में रहने वाले लोगों और पुणे नगर निगम ने गांव से मच्छरों को पूरी तरह से खात्मा कर दिया है। जल्द ही यह मॉडल पुणे के बाकी इलाकों में भी अमल में लाया जाएगा।

भारत में बीमारियों का एक बड़ी वजह गंदगी होती है। गंदगी से मच्छर पनपते हैं और उन मच्छरों से गंभीर बीमारियां। वैसे तो कई स्तर पर मच्छरों से निपटने के लिए अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन पूरी तरह से मच्छरों को भगाना नामुमकिन सा लगता है। पर पुणे के एक गांव ने इस नामुमकिन से लगने वाले काम को मुमकिन बना दिया है। पुणे के इंदापुर तालुके के अंतर्गत आने वाले संसार गांव में रहने वाले लोगों और पुणे नगर निगम ने गांव से मच्छरों को पूरी तरह से खात्मा कर दिया है। जल्द ही यह मॉडल पुणे के बाकी इलाकों में भी अमल में लाया जाएगा।

इस प्रॉजेक्ट की शुरुआत दो साल पहले स्वास्थ्य विभाग द्वारा 2016 में की गई थी। विभाग ने गांव में युवा से लेकर बुजुर्ग को इस अभियान में शामिल होने की अपील की थी। गांव के सामाजिक कार्यकर्ता पीएस पाठक ने पुणे मिरर से बात करते हुए कहा, 'हमने लोगों तक संदेश पहुंचाने में काफी मेहनत की और लोगों को जागरूक किय। स्कूलों में भी कैंपेन चलाए गए और बच्चों को स्वच्छता के बारे में बताया गया।'

स्कूलों में बच्चों के बीच चित्रकला प्रतियोगिता कराई गई ताकि समस्या का सही तरीके से पता लगाया जा सके। वहीं निबंध प्रतियोगिता के जरिए बच्चों को बताया गया कि कैसे मच्छरों के पनपने की जगह की पहचान करना है। संसार गांव के पुष्कराज निंबालकर ने कहा, 'गांव के सभी लोगों को बताया गया कि मच्छर कहां पनपते हैं। उन जगहों को पहचान करके उसे साफ बनाने का काम सौंपा गया। इसके लिए टीम को 15-15 लोगों के ग्रुप में बांटा गया और उन्हें अलग-अलग इलाकों में क्रियान्वन का जिम्मा सौंपा गया।'

इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग ने गांव से निकलने वाले कचरे के उचित निपटान की व्यवस्था की। उन्होंने गांव के जल निकास को दुरुस्त किया और पाइप पर जाली लगा दी ताकि वहां मच्छर न पनप पाएं। इसके साथ ही पेयजल की स्वच्छता को भी दुरुस्त किया गया। इसके बाद जो परिणाम निकला वो चौंकाने वाला था। पुणे के जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. दिलीप माने के मुताबिक 100 घरों का सर्वेक्षण करने पर पता लगा कि एक भी मच्छर का लारवा नहीं मिला है। हालांकि ये ऐसा पहला गांव नहीं है। इसके पहले औरंगाबाद और तेलंगाना के मेदक जिले को मच्छरमुक्त घोषित किया जा चुका है।

हाल ही में राजस्थान के जयपुर में जहरीले मच्छरों द्वारा पनपने वाले जीका वायरस बीमारी के कुछ मामले सामने आए हैं। ऐसे में मच्छर जनित रोगों से बचाव करने एवं प्रबंधित करने की संसार गांव की तकनीक देशभर के गांवों में शुरू होनी चाहिए।

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