मौत के बाद आपके फेसबुक अकाउंट का क्या होगा?

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‘एक बार गया तो गया; फिर अपने फेसबुक एकाउंट की चिंता क्यों करूंगा?’ प्लान्ड डिपार्चर द्वारा डिजिटल युग में मौत के सवाल का सामना...


"हमारी दृष्टि लोगों को उनका डिजिटल जीवन और डिजिटल विरासत देकर उनका सशक्तीकरण करना है,’’ आनंद रामदेव अपने स्टार्टअप प्लान्ड डिपार्चर के बारे में बताते हैं। ‘‘अपने शोध और व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर हमें मालूम है कि सही समय पर सही जानकारी पाने के लिहाज से लोगों के लिए यह कितना जरूरी है।"

सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल दंपति आनंद और कोमल रामदेव उद्यमिता की मानसिकता को हमेशा ही खाद-पानी देते रहते थे। लेकिन अपना चमकदार कैरियर छोड़कर स्टार्टअप की अनिश्चितता की ओर कदम बढ़ाने के प्रति वे आश्वस्त नहीं थे क्योंकि उन्हें लगता था कि उनके पास कोई ऐसा आइडिया नहीं है जिस पर वे दांव लगा सकें। वे बंगलोर से लंदन चले गए। वहां उनलोगों ने एक कंसल्टेंसी कंपनी शुरू की और बीबीसी, चैनल4, कैमलॉट, मैन इनवेस्टमेंट्स, टेस्को जैसे संस्थानों को मदद की। लेकिन दीर्घकालिक और सार्थक प्रभाव वाली कोई चीज बनाने की उनकी दिमागी खुजली बरकरार रही हालांकि उन्हें पता नहीं था कि उस पर काम कैसे करना है।

वर्ष 2010 में वह सब तब बदल गया जब एक व्यक्तिगत हादसे के कारण कुछ चौंकाने वाली घटनाएं घटीं। वर्ष 2010 में कोमल के पिताजी का देहांत हो गया। दंपति ने पहली बार मौत और उसके गंभीर परिणामों को नजदीक से देखा और झेला। दुख-शोक को छोड़ भी दें, तो इसने दंपति को मृत्यु के कारण उत्पन्न दमघोंटू कानूनी प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ा। कुशलता से नाम दिए गए प्लान्ड डिपार्चर के आरंभ के बारे में आनंद बताते हैं, "ऐसा पहली बार हुआ कि हमलोगों को किसी नजदीकी प्रिय व्यक्ति का बिछुड़ना सहना पड़ा। हमलोग लंदन चले आए और सोचने लगे कि हमलोगों के साथ कुछ हो जाता है तो क्या होगा। हमलोगों ने अपने बैंकों, गिरवीदारों और अन्य संस्थाओं से संपर्क किया। उनमें से हरएक ने कहा कि वे हमलोगों के लिए लाभार्थियों की पहचान नहीं कर पाएंगे। लाभार्थियों को खुद ही संपर्क करना होगा नहीं तो हमारी परिसंपत्तियां बिना दावा वहां पड़ी रहेंगी।

"हमलोगों ने अपना शोध शुरू किया और पाया कि यूके में 29 अरब पाउंड से भी अधिक की बिना दावा वाली परिसंपत्तियां मौजूद हैं। हमलोगों ने यह भी महसूस किया कि इस डिजिटल दुनिया में जहां हमारी सूचनाओं को डिजिटल रूप में संग्रहित किया जा सकता है, यह समस्या और भी विकट होने जा रही है। हमलोग डिजिटल जगत तक पहुंच की कमी के कारण बहुत कष्ट झेलने वाले कई व्यक्तियों से मिले और इस समस्या का समाधान करने का निर्णय किया।"

प्लान्ड डिपार्चर का काम सीधा-सादा लेकिन काफी गंभीर है। यह लोगों को उनकी विरासत और उनके अस्तित्व की हर बुनियादी चीज पर यह सुनिश्चित करने के लिए व्यक्तिगत नियंत्रण प्रदान करता है कि उनकी आकांक्षाओं को साकार किया जा रहा है, यहां तक कि तब भी जब वह व्यक्ति अपना नियंत्रण स्थापित करने के लिए वहां मौजूद रहने वाला नहीं हो। "आप प्लान्ड डिपार्चर के बारे में एक कूरियर कंपनी के बतौर सोच सकते हैं जो सही समय पर सही लोगों को सही सूचना उपलब्ध कराएगी। हमलोग अपने उपभोक्ताओं को अपनी डिजिटल परिसंपत्तियां (जैसे कि प्रोपर्टी के कागजों, पासपोर्ट, सर्टिफिकेट आदि की स्कैन्ड कॉपी, यूजरनेम/ पासवर्ड आदि) हमारे डिजिटल वॉल्ट में रखने की अनुमति देते हैं और उनके संग्रह का नियंत्रण उन्हें दे देते हैं," आनंद बताते हैं।

दंपति का विश्वास है कि हमारे डिजिटल फुटप्रिंट समय के साथ अधिक मूल्यवान होते जाएंगे क्योंकि भविष्य में उसके साथ जुड़ा भावनात्मक और वित्तीय मूल्य बढ़ता जाएगा। "अपने शोध के दौरान हमलोगों के सामने ऐसे अनेक मामले आए, जैसे कि http://www.gopetition.com/petitions/accessing-jakes-digital-data.html जहां मृतक के मित्रों और परिजनों को उनके एकाउंट से जानकारी प्राप्त करने के लिए बहुत कष्टकर प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। साथ ही, ऑनलाइन जगत महज भावनात्मक पक्षों से संबंधित नहीं है। डोमेन नेम या फेसबुक अथवा यूट्यूब के क्यूरेटेड पृष्ठों के साथ भारी भावनात्मक मूल्य जुड़ा हुआ है। अगर मित्रों या सहकर्मियों को इन परिसंपत्तियों के बारे में समय से जानकारी नहीं मिलती है, तो वे साइबर जगत में हमेशा के लिए गुम हो जा सकती हैं," आनंद गंभीरता से बताते हैं।

ऐसे विचार के साथ स्वाभाविक रूप से ढेर सारे संदेह जुड़े हैं लेकिन यह दंपति इस वेंचर की जरूरत के बारे में आश्वस्त है। "हमारे उत्पादों की जरूरतों की पुष्टि गूगल, फेसबुक और याहू पर मिलने वाले लाइक से होती है। सभी अपने उपभोक्ताओं के लिए समाधान लेकर आए हैं। हालांकि हमारा दृढ़ विश्वास है कि समाधान हमलोग जैसे थर्ड पार्टी प्रोवाइडरों को उपलब्ध कराना होगा क्योंकि हमारे डिजिटल फुटप्रिंट गूगल, फेसबुक या याहू के दायरे से बहुत आगे तक के हैं।

हमलोगों के लिए यह बहुत जरूरी है क्योंकि हमारा विश्वास है कि अन्य भौतिक परिसंपत्तियों की तरह उपभोक्ताओं का अपने डिजिटल परिसंपत्तियों पर भी पूरा नियंत्रण होना चाहिए। उन्हंे यह तय करने में सक्षम होना चाहिए कि किसको क्या मिलना चाहिए और उसका वे क्या करेंगे। संस्थाओं को अधिकार नहीं है कि वे उन पर ताला लगा दें या वहां तक पहुंचना पूरी तरह रोक दें," आनंद जोर देकर कहते हैं।

किसी ऐसे उद्योग में अपना स्टार्टअप शुरू करने लिए कुशलता के साथ लोगों को खींच लाना वांछित होता है - मुख्यतः इसलिए कि इस तक के काम का पहले कोई दृष्टांत मौजूद नहीं है। "हमलोगों के लिए यह जागरूकता का मामला है। हमलोग लॉ फर्म और चैरिटी के साथ घनिष्ठता से जुड़कर काम करते हैं। पिछले कुछ महीनों में हमलोग इन संगठनों में रुचि पैदा करने और उनके दिमागों में इसका बीजारोपण करने में सफल रहे हैं। उन पर उनके ग्राहकों का भरोसा रहता है और उनके सुझाव ढेर सारे लोगों के लिए मायने रखने वाले होंगे। यह अच्छी स्थिति है। बातचीत में हमें पता चला कि लॉ फर्मों को भी डिजिटल विरासतों से संबंधित समाधान के बारे में कुछ अंदाजा नहीं है," आनंद बताते हैं।

ये प्लान्ड डिपार्चर के आरंभिक दिन हैं और मोटे तौर पर उस उद्योग के लिए भी जिसमें वे काम कर रहे हैं। इसलिए स्केलिंग में समस्याएं खीझने की हद तक सामान्य हैं। फिर भी यह जतलाता है कि स्टार्टअप उद्योग के साथ-साथ बढ़ेगा और एक दिन उसके बड़े हिस्से पर इसका नियंत्रण होगा।

दंपति चीजों के धीमी गति से बढ़ने को लेकर संतुष्ट है। "ये हमारे लिए शुरुआती दिन हैं और हमारा पहला फोकस इस परिकल्पना को प्रमाणित करने पर रहा है कि B2B2C रूट एक सक्षम रूट है। हमलोगों ने सारे क्षेत्रों से पार्टनर पाकर इस परिकल्पना को प्रमाणित कर दिया है। हमलोगों ने विकास के लिए खुद को तैयार रखने के लिए वांछित सारे उपकरणों को तैयार रखा है। अब हम उस चरण में हैं जिसमें मुख्य संबंध स्थापित करने के लिए हम अपना सेल्स फोर्स बनाना शुरू कर सकते हैं," आनंद बताते हैं। वह अनुमान करते हैं, "इस उद्योग के प्लेयर लॉ उद्योग और गूगल जैसे एकाउंट प्रोवाइडरों के साथ घनिष्ठता से काम करेंगे।"

शुरू में आनंद और कोमल ने इस वेंचर की शुरुआत अपने खर्च से की और पहले राउंड की बाहरी फंडिंग गत वर्ष सितंबर में प्राप्त की। उनलोगों ने क्राउडफंडिंग प्लेटफॉर्म सीडर्स से 1.20 लाख ब्रिटिश पौंड प्राप्त किए। हमलोगों ने सीडर्स पर अपने लक्ष्य के 200 प्रतिशत से भी अधिक रकम तीन सप्ताहों के अंदर हासिल कर ली," इसके जैसे उत्पाद के लिए बाजार में भारी जरूरत दर्शाते हुए आनंद उत्साह से बताते हैं।

आनंद बताते हैं कि अपने विचारों के बारे में अच्छा महसूस करने वाला कारक, जो किसी उद्यमी की यात्रा के आरंभिक दिनों के लिए के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, यह देखना है कि इस क्षेत्र में समाधान की पुष्टि गूगल, फेसबुक और याहू पर मिलने वाले लाइक से हुई है।

स्टार्टअप सकारात्मकता और आशा के विचार के आधार पर बनते हैं और इस प्रभाव के साथ जमीन पर उतरते हैं कि अपने बनने के बाद वे दुनिया को बदल देंगे। ग्राहकों को उनकी मौत के बाद चर्चा करके आकर्षित करना सबसे अच्छा होने पर असहजता वाला हो सकता है और सबसे बुरा होने पर रुग्णता वाला। आनंद इस बात पर दृढ़ हैं कि प्लान्ड डिपार्चर बाजार में आने वाले अन्य ऑफबीट विचारों से भिन्न नहीं है। वह कहते हैं, "हमें अनेक लोग मिले जिन्होंने इसे तत्काल समझ लिया और यह उन्हें अत्यंत उपयोगी लगा। हमें ऐसे भी अनेक लोग मिले जों अपनी डिजिटल विरासतों को संरक्षित करने की जरूरत नहीं महसूस करते हैं और आश्वस्त हैं कि सूचना सही व्यक्ति तक पहुंच जाएगी।

उनकी आरंभिक प्रतिक्रिया थी कि मैं गया तो चला गया - फिर मैं अपने फेसबुक एकाउंट की चिंता क्यों करूं? हालांकि ये टिप्पणियां प्रायः डिजिटल जगत के महत्व के प्रति जागरूकता की कमी को अभिव्यक्त करती थीं। जब हम चर्चा शुरू करते थे और पहुंच की कमी के कारण परेशानी झेलने वाले लोगों की कहानियां सुनाते थे, तो अक्सर इस मामले में समाधान की जरूरत को वे लोग देख पाते थे," वह बताते हैं, "लेकिन हां, अनेक लोग मौत के बारे में सोचने और बात करने को लेकर सहज नहीं रहते हैं। इस तरह से हम देखते हैं, तो प्लान्ड डिपार्चर जीवन की योजना बनाने का एक साधन है और जीवन का अंत हमारी योजना का एक अनिवार्य अंग है!"

आनंद और कोमल के लिए कर्मचारी से उद्यमी में संक्रमण का सबसे कठिन भाग जीवनशैली में भारी परिवर्तन है। प्लान्ड डिपार्चर शुरू करने के पहले दोनो सॉफ्टवेयर कंसल्टेंट थे और अपने प्रोफेशनल सर्किट में जरूरत के हिसाब से सक्रिय रहते थे। कंफ्रेंस, यात्रा, टेक टॉक, ब्लॉग, ट्विटर पर चर्चा और अपने शिड्यूल के बारे में पूरी आजादी उनकी जीवनशैली थी जिसका छूटना उनके लिए सबसे कठिन भाग रहा है।

वह कहते हैं, "हमारी जिंदगी अब कंसल्टेंसी वाले दिनों से पूरी तरह अलग है। हमलोग अब छुट्टियों का मजा नहीं ले पाते हैं और सप्ताहांत के तेजी से गुजर जाने की प्रतीक्षा करते हैं! हमलोग अक्सर समय की कमी के कारण ब्लॉग और ट्विटर पर चर्चा में भाग देने की इच्छा को दबा देते हैं। अपने शिड्यूल के मामले में हमें कोई आजादी नहीं है और ग्राहकों से बातचीत करने की प्राथमिकता सबसे बढ़कर है। हालांकि हमलोगों की समझ में कुर्बानी सही शब्द नहीं है। हमलोगों पर किसी का कोई दबाव नहीं था। हमलोगों ने सचेत रूप से इसके लिए फैसला लिया था।’’

इसका सकारात्मक पक्ष सीखना है। आनंद किसी उद्यमी की यात्रा में सीखने की अद्भुतता के बारे में बताते समय उत्साहित हो जाते हैं। "सीखने के लिहाज से यह जबर्दस्त चीज है। पिछले कुछ महीनों में हमलोगों ने अपनी परियोजना को वेबसाइट से बिजनस में बदल डाला है। हमलोगों ने सीखा है (और अभी भी सीख रहे हैं?) और मार्केटिंग के ऑटोमेशन से लेकर ग्राहकों के समर्थन तक - सारी चीजों को इकट्ठा कर लिया है। हमलोगों के बहुत सीखा है!"

"हमलोगों ने चिंता और अनिश्चितता के साथ जीना भी सीखा है जो किसी उद्यमी के जीवन के सतत सहचर होते हैं," वह बताते हैं।

और यह भी इसकी सबसे अच्छी बात नहीं है। वह कहते हैं, "हम जिन चीजों के प्रति जुनूनी हैं, उन पर काम करने का अवसर उद्यमी होने की सबसे अच्छी बात है। एक सरल सवाल का, कि क्या आपको मजा आ रहा है, ‘हां’ उत्तर देना अच्छा लगता है।"

आनंद और कोमल प्लान्ड डिपार्चर के भविष्य के बारे में सचेत किंतु बहुत महत्वाकांक्षी हैं। वे डिजिटल विरासत की संकल्पना को किसी व्यक्ति की योजना प्रक्रिया का अभिन्न अंग बनाना चाहते हैं। "संभावनाएं और संकेत बहुत अच्छे हैं। हमलोग इसके प्रति आश्वस्त हैं और इसे साकार करने के लिए कठिन परिश्रम कर रहे हैं," वह कहते हैं।

योरस्टोरी को आनंद द्वारा कही गई आखिरी बात महज सलाह नहीं, हार्दिक उद्गार है। "इंतजार मत कीजिए! हो सकता है कि आरंभ करना आपके सोचने से भी कहीं अधिक आसान हो। सबसे बुरी स्थिति के परिदृश्य के बारे में सोचें और देखें कि आपका क्या नुकसान होगा! एक साल की बचत? एक साल के लिए कैरियर में व्यवधान? क्या इससे दुनिया खत्म हो जाएगी? क्या जरूरत पड़ने पर आपको फिर जॉब नहीं मिलेगा?

अवसर की कीमत को इस रूप में मत देखिए कि आप एक साल में कितना कमा लेंगे और कैरियर में क्या हासिल कर लेंगे। जिंदगी एक अवसर है और आप जो चीज सचमुच चाहते हैं, उसे नहीं करना मेरी राय में अवसर का बड़ा नुकसान है। हो सकता है आपको घंटों सनकी की तरह काम करना पड़े, जीवन में ढेर सारी अनिश्चितता और चिंता हो, लेकिन सोचिए कि यह आपके एक सामान्य सवाल का कि आपको मजा आ रहा है, हां में उत्तर देने का अवसर होगा," वह बात समाप्त करते हैं।

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