स्टार्टअप का जूनून हो तो मंजिल दूर नहीं

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संभावनाओं की कोई कमी नहीं है और अगर आपके पास जूनून है तो कोई मंजिल दूर नहीं है। भारत में स्टार्टअप ने तो जैसे हमारे समय की बिजनेस की लाइफस्टाइल ही चेंज कर दी है। इंडियन स्टार्टअप में बूम के साथ ही देश में आंत्रेप्रेन्योर की संख्या काफी तेजी से बढ़ रही है।

फोटो साभार: Shutterstock
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इंडियन स्टार्टअप में बूम के साथ ही देश में आंत्रेप्रन्योर की संख्या काफी तेजी से बढ़ रही है। वे दिन लद गए जब लोग स्टार्टअप शुरू करने के लिए अपनी नौकरी छोड़ने से पहले सौ बार सोचते थे।

देश में ऑनलाइन पेमेंट का कारोबार लगभग 2 लाख करोड़ का है। जो 25 से 30 फीसदी की दर से हर साल बढ़ रहा है। पेटीएम, पेयू और ऑक्सिजन जैसे स्टार्टअप बायर प्रोटेक्शन और अकाउंट को मॉनीटर करने की सारी सुविधाओं पर भी जोर दे रही हैं ताकी वो लोगों का विश्वास जीत सकें। 

स्टार्टअप के लिए हमारे देश की सरकार लगातार कोई न कोई ऐसा कदम उठा रही है, जिससे देश के युवा इस दिशा में तेजी से हाथ बढ़ाएं। रजिस्ट्रेशन प्रोसेस को सरल बनाने के लिए सरकार ने करीब 1,200 जटिल कानूनों और प्रक्रियाओं को हटाया है, ताकि देश के युवा उद्यमियों को बढ़ावा दिया जा सके। सरकार ने खासकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए कई कदम उठाए हैं। गत दो साल में सरकार ने अनेक नियमावलियों और कानूनों, प्रक्रियाओं और कागजी कार्यवाहियों को समाप्त करने की कोशिश की है। करीब 1,200 कानूनों को हटा दिया है, जैसा पहले कभी नहीं हुआ था।

देश में ऑनलाइन पेमेंट का कारोबार लगभग 2 लाख करोड़ का है। जो 25 से 30 फीसदी की दर से हर साल बढ़ रहा है। पेटीएम, पेयू और ऑक्सिजन जैसे स्टार्टअप बायर प्रोटेक्शन और अकाउंट को मॉनीटर करने की सारी सुविधाओं पर भी जोर दे रही हैं ताकी वो लोगों का विश्वास जीत सकें। आज लगभग 8.5 करोड़ लोग पेटीएम वॉलेट इस्तेमाल करते हैं। पे-यू, जो कि एक चेकआउट और वॉलेट सर्विस है, 40 लाख से ज्यादा यूसर्स को ट्रांजेक्शन करने में मदद करती है। और ऑक्सिजन अपने प्लेटफॉर्म के जरिए हर महीने 5 करोड़ ट्रांजेक्शन्स को संभव बनाता है। सबसे बड़ा चैलेंज है की फिलहाल देश में 29 हज़ार पिनकोड्स में से सिर्फ कुछ ही हज़ार पिनकोड्स तक ई-कॉमर्स की सुविधा है। पेमेंट की ये कम्पनियां जितनी ज़रूरी खरीददार के लिए हैं उतनी ही ज़रूरी है एक ऑनलाईन दुकानदार के लिए भी हैं।

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इमोशन से स्टार्टअप शुरू तो हो सकता है, लेकिन यह सफल होने की गारंटी नहीं देता। कोई भी स्टार्टअप शुरू करने एवं उसे सफलता के अंजाम तक पहुंचाने के लिए इंटरप्रेन्योर को अपनी टीम के चयन में बेहद संजीदगी बरतनी चाहिए।

इंडियन स्टार्टअप में बूम के साथ ही देश में आंत्रेप्रन्योर की संख्या काफी तेजी से बढ़ रही है। वे दिन लद गए जब लोग स्टार्टअप शुरू करने के लिए अपनी नौकरी छोड़ने से पहले सौ बार सोचते थे। आईडीएफसी पीई के संस्थापक लुईस मिरांडा कहते हैं, कि स्टार्टअप को सफल बनाने के लिए अच्छे लोगों की मदद लें। आपके आस-पास ऐसे लोग नहीं होने चाहिए, जो हर बात में हां करते हों। ऐसे लोग आपको सही सलाह कभी नहीं दे पाएंगे। इमोशन से स्टार्टअप शुरू तो हो सकता है, लेकिन यह सफल होने की गारंटी नहीं देता। कोई भी स्टार्टअप शुरू करने एवं उसे सफलता के अंजाम तक पहुंचाने के लिए आंत्रेप्रेन्योर को अपनी टीम के चयन में बेहद संजीदगी बरतनी चाहिए।

आज कोई भी एक दिन में कंपनी पंजीकृत करा सकता है। एमएसएमई के लिए पंजीकरण में करीब पांच मिनट लगता है। स्टार्टअप में जो असफल हो जाते हैं, वह तुरंत कारोबार से बाहर निकल सकते हैं, क्योंकि देश में दिवालिया कानून बन चुका है। देश में जीएसटी कानून और जीएसटी लागू हो चुका है। यह सारे कदम भारत को कारोबार के लिए एक उपयुक्त जगह बनाने के लिए उठाए गए हैं। सरकार ने फंडों का फंड बनाया है, ताकि युवा उद्यमियों को धन उपलब्ध कराने के लिए विशाल संख्या वेंचर फंड मौजूद रहें। जब स्टार्टअप को वेंचर फंड से सहायता मिलेगी, तो स्टार्टअप परितंत्र का विकास होगा।

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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