हिंदुओं के फेस्टिवल में हर रोज 5,000 श्रद्धालुओं को भोजन करा मिसाल पेश कर रहे मुस्लिम

पुड्डुकोट्टई का कुंभभिषेकम फेस्टिवल बना भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द का बेहतरीन उदाहरण...

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 तमिलनाडु के पुड्डुकोट्टई में मुस्लिमों ने हिंदू तीर्थयात्रियों के लिए सामूहिक भोजन की व्यवस्था करके एक मिसाल पेश की है। पुड्डुकोट्टई में इन दिनों कुंभभिषेकम फेस्टिवल चल रहा है जिसमें बड़ी संख्या में हिंदू तीर्थयात्री भाग ले रहे हैं।

पंडाल में भोजन करते श्रद्धालु (फोटो साभार- न्यूज मिनट)
पंडाल में भोजन करते श्रद्धालु (फोटो साभार- न्यूज मिनट)
गांव में रहने वाले मुस्लिमों ने मिलकर फैसला किया कि वे इस मौके पर श्रद्धालुओं के भोजन की व्यवस्था करेंगे। इतना ही नहीं उन्होंने खुद ही खाना बनाया। इसके लिए अलग से एक पंडाल बनाया गया और वहां खाने के लिए टेबल-कुर्सियां लगाई गईं।

देश में एक तरफ जहां आए दिन सांप्रदायिक तनाव या हिंसा की खबरें सुनने को मिलती हैं वहीं दूसरी ओर तमिलनाडु के पुड्डुकोट्टई में मुस्लिमों ने हिंदू तीर्थयात्रियों के लिए सामूहिक भोजन की व्यवस्था करके एक मिसाल पेश की है। पुड्डुकोट्टई में इन दिनों कुंभभिषेकम फेस्टिवल चल रहा है जिसमें बड़ी संख्या में हिंदू तीर्थयात्री भाग ले रहे हैं। यह फेस्टिवल अन्नावसाल में अंबिका समेता मंदिर (पुड्डुकोट्टई) में आयोजित किया जा रहा है। इस साल यहां जितने भी तीर्थयात्री पहुंच रहे हैं उन्हें यहां के मुस्लिमों द्वारा शानदार शाकाहारी भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।

अन्नावसाल में इस बार गांव वालों ने 10वीं शताब्दी में बने चोल मंदिर में कुंभाभिषेकम फेस्टिवल आयोजित करने का फैसला किया। इस काम में सभी गांव वालों ने मिलकर सहयोग करने की योजना बनाई। सभी ने पैसे इकट्ठे किए और मंदिर परिसर को साफ-सुथरा बनाया। गांव में रहने वाले मुस्लिमों ने मिलकर फैसला किया कि वे इस मौके पर श्रद्धालुओं के भोजन की व्यवस्था करेंगे। इतना ही नहीं उन्होंने खुद ही खाना बनाया। इसके लिए अलग से एक पंडाल बनाया गया और वहां खाने के लिए टेबल-कुर्सियां लगाई गईं।

इस फेस्टिवल में कई सारे श्रद्धालुओं ने व्रत रखा था। उनके लिए अलग से खाने की व्यवस्था की गई। दक्षिण भारत में केले के पत्ते पर खाना परोसने का रिवाज है। उसी तरह के परंपरागत केले के पत्तों पर खाना परोसा गया। न्यूज मिनट के मुताबिक खाने में अप्पलम पापड़ और पायासम खीर भी दिया गया। खाने की व्यवस्था करने वाले ग्रुप के सदस्य मोहम्मद फारूक ने कहा, 'धार्मिक सद्भाव तमिलनाडु और पूरे भारत की खासियत है। हम इस फेस्टिवल में अपना योगदान देकर इसे और भी यादगार बनाना चाहते थे। यहां एक दिन में लगभग 5,000 लोग भोजन कर रहे हैं। श्रद्धालुयों को खाना खिलाकर हमें अत्यधिक प्रसन्नता हो रही है।'

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