दिव्यांग बेटे को अफसर बनाने के लिए यह पिता कंधे पर बैठाकर ले जाता है कॉलेज

दिव्यांग बेटे की पढ़ाई के लिए पिता ने किया ये अनोखा काम...

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गरीबी और मुफलिसी इंसान को मुश्किल में तो डाल सकती है, लेकिन उसके हौसले नहीं पस्त कर सकती है। इसका जीता जागता उदाहरण हैं मध्य प्रदेश के राजगढ़ इलाके में दौलतपुरा के रहने वाले कालूसिंह सोंधिया।

अपने बेटे के साथ कालू सिंह
अपने बेटे के साथ कालू सिंह
कालू सिंह ने बताया कि उन्होंने सरकार और प्रशासन से मदद के लिए कई बार गुहार लगाई, लेकिन उनकी किसी ने नहीं सुनी। प्रशासन ने सिर्फ 50 फीसदी विकलांगता का प्रमाण पत्र बनाकर दे दिया है। जिसके भरोसे रहने का कोई मतलब नहीं है।

गरीबी और मुफलिसी इंसान को मुश्किल में तो डाल सकती है, लेकिन उसके हौसले नहीं पस्त कर सकती है। इसका जीता जागता उदाहरण हैं मध्य प्रदेश के राजगढ़ इलाके में दौलतपुरा के रहने वाले कालूसिंह सोंधिया। कालूसिंह का इकलौता बेटा जगदीश शारीरिक रूप से दिव्यांग है। वैसे तो कालू सिंह अनपढ़ हैं, लेकिन अपने बेटे को पढ़ाने के लिए वे उसे अपनी गोद में लेकर कई किलोमीटर तक पैदल चलते हैं। दरअसल जगदीश का कद और उसके शरीर की बनावट कुछ ऐसी है कि वह ट्राइसाइकिल भी नहीं चला सकता। कालू सिंह का सपना है कि उनका बेटा पढ़ लिखकर अफसर बने लेकिन आर्थिक रूप से सक्षम न होने की वजह से उन्हें कष्ट उठाना पड़ता है।

जगदीश का कद सिर्फ 3 फीट हहै। उसके हाथ पैर भी सही तरीके से काम नहीं करते हैं। इसलिए कालू सिंह जगदीश को कंधे पर बैठाकर उसे कॉलेज ले जाते हैं। जगदीश के गांव के आस पास कोई कॉलेज भी नहीं है। उसे स्कूल में 12वीं तक की पढ़ाई करने के लिए भी संघर्ष करना पड़ा था। उसने 12वीं तक की पढ़ाई गांव से 10 किलोमीटर दूर संडावता से की। भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2016 में हायर सेकंडरी पास करने के बाद 2017 में उसने अपने गांव से 25 किमी दूर राजगढ़ के कॉलेज में एडमिशन लिया। जगदीश ने 12वीं में 59 प्रतिशत नंबर हासिल किए थे।

लेकिन दिक्कत ये है कि जगदीश खुद से राजगढ़ तक नहीं पहुंच सकता। उसे किसी न किसी की मदद की जरूरत पड़ती है। इसलिए पिता कालू सिंह उसके साथ कॉलेज जाते हैं और उसकी छुट्टी होने तक वहीं रुकते भी हैं। किसी भी व्यक्ति के लिए यह लम्हा भावुक कर देने के लिए होगा कि उसका बेटा क्लास में पढ़ रहा हो और वह कॉलेज खत्म होने तक उसकी प्रतीक्षा करे। कालू सिंह की कुल 6 संताने हैं। पांच बहनें के बीच जगदीश इकलौता भाई है। उसके घर में सबसे बड़ी बहन की शादी हो गई है जबकि चार बहनें अभी पढ़ाई कर रही हैं। कालू सिंह के पास थोड़ी बहुत खेती तो है, लेकिन वह बंजर ही रह जाती है।

सिंचाई के पर्याप्त साधन और आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने की वजह से वह खेती भी नहीं कर पाते हैं। 20 वर्षीय जगदीश का कहना है कि वह बड़े होकर आईएएस अफसर बनना चाहते हैं। किसी भी बेटे के लिए यह गर्व की बात होगी कि उसके बाप के कंधे ही उसका सहारा हैं। कालू सिंह ने बताया कि उन्होंने सरकार और प्रशासन से मदद के लिए कई बार गुहार लगाई, लेकिन उनकी किसी ने नहीं सुनी। प्रशासन ने सिर्फ 50 फीसदी विकलांगता का प्रमाण पत्र बनाकर दे दिया है। जिसके भरोसे रहने का कोई मतलब नहीं है।

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