महिलाओं की मदद के लिए इंजीनियरिंग छात्र किसलय ने बनाया ऐप 'चिल्ला' में हैं सुरक्षा के अनोखे फीचर्स

‘चिल्ला’ मोबाइल ऐप, महिलाओं की सुरक्षा के लिए इंजीनियरिंग छात्र का ख़ास तोहफ़ाएक ऐसा एप जो महिलाओं की सुरक्षा का रखता है बेहद खास ध्यानआपकी चीख से आपके रिश्तेदारों को भेजा जा सकता है आपात संदेशमोबाइल को अनलॉक किए बिना ही फीड नंबर पर आपात संदेश भेजना संभव

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सुरक्षा को लेकर कौन चिंतित नहीं रहता? आज की आपाधापी और भागदौड़ में महिला हो या पुरुष, लड़की हो या लड़का सबको घर से काम के सिलसिले में और पढ़ाई के लिए निकलना ही पड़ता है। बेटी जबतक घर नहीं आ जाती माता-पिता की बेचैनी को बनी रहती है। ऐसे में इंजीनियरिंग के छात्र किसलय ने एक राहत की ख़बर दी है। सुरक्षा की चिंता को कम करते हुए किसलय ने एक ऐसा मोबाइल ऐप बनाया है जो आपकी परवाह करते हुए आपकी सुरक्षा सुनिश्चत करता है। ऐप का नाम है 'चिल्ला', नाम से ही जाहिर है कि जब आप मुश्किल में होंगे तो इसके जरिए आपकी गुहार आपके मददगारों तक आसानी से पहुंच जाएगी।

कैसे काम करता है ऐप

इस ऐप के जरिए आपकी चीख या आपात संदेश मोबाइल को अनलॉक किए बिना फीड नंबर पर आसानी से पहुंचाया जा सकता है। आपके मोबाइल में मौजूद ‘चिल्ला’ ऐप आपात की स्थिति में सूचना के साथ-साथ आपके लोकेशन की जानकारी और ऑडियो संदेश भी मोबाइल में फीड नंबर और ई-मेल पर तुरंत मुहैया करा देगा। कहने की जरुरत नहीं कि बढ़ रहे महिला अपराध की रोकथाम में ये ऐप मील का पत्थर साबित होगा।

महिला अपराध रोकने में मददगार

भारतीय कानून में महिला की सुरक्षा को लेकर तमाम कानून हैं लेकिन अपराध का ग्राफ है कि लगातार बढ़ता ही जा रहा है। भारत में अपराधिक घटनाओं की अíधिकारिक जानकारी देने वाली संस्था एनसीआरबी की ओर से जारी 2014 के एक आंकड़े के मुताबिक भारत में हर दिन बलात्कार की संख्या 93 है। हालांकि ये वो आंकड़े हैं, जिसकी रिपोर्टिंग हो पाई, कई मामलों में सामाजिक कारणों से ऐसी घटनाओं में पुलिस केस भी दर्ज नहीं कराया जाता। कहने का मतलब यह कि जघन्य अपराध की श्रेणी में आने वाली घटनाओं के आंकड़े जब चौंकाने वाले हैं, तो छेड़छाड़ और दूसरी घटनाओं की संख्या तो इससे कहीं ज्यादा होती है। ऐसे में सावधानी ही बचाव का सबसे बेहतर विकल्प है।

भारत सरकार के एक कानून के मुताबिक साल 2017 के जनवरी से मोबाइल फोन बिना पैनिक बटन के नहीं बेचा जा सकता। टेलीकॉम मंत्रालय के नियमों के मुताबिक ये जरूरी किया गया है कि बिना पैनिक बटन वाले मोबाइल फोन को 2017 जनवरी के बाद बेचने की इजाजत नहीं होगी।  तकनीकी का इस्तेमाल लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए किया जाना चाहिए और अगर इसका प्रयोग महिलाओं की सुरक्षा के लिए हो तो उससे बेहतर और क्या हो सकता है।

चिल्ला ऐप का कमाल 

चिल्ला ऐप बनानेवाले इंजीनियरिंग के छात्र किसलय ने योर स्टोरी को बताया कि इसके बनाने के पीछे एक सच्ची घटना जुड़ी है। कहानी उनके दोस्त की है, जिसके साथ देर रात छेड़खानी हुई... मदद के लिए जब वो चीखी तो कुछ दूर पर खड़े दोस्त उसकी ओर मदद के लिए दौड़े। इस घटना के बाद किसलय के इंजीनियर दिमाग में इस ऐप का जन्म हुआ। इस घटना के बाद किसलय लगातार आठ महीने तक इस ऐप को बनाने में लगे रहे। उन दिनों को याद करते हुए किसलय बताते हैं कि कॉलेज में क्लास खत्म करने के बाद जब भी वक्त मिलता वो इस आइडिया को साकार करने के काम में लग जाते। योर स्टोरी से बात करते हुए किसलय कहते हैं कि इस ऐप की ख़ासियत ये है कि आप इस ऐप से मोबाइल को बिना अनलॉक किए भी आपात स्थिति में संदेश भेज सकते हैं। संदेश भेजने के लिए मोबाइल को अनलॉक करने और ऐप को ऑन करने में जो वक्त लगता है, उससे बचने के लिए इसे ऐसा बनाया गया है कि मोबाइल को बिना अनलॉक किए ही संदेश भेजा जा सके। किसलय बताते हैं कि ‘ऐप की इस ख़ासियत से आपात स्थिति में संदेश को जल्द से जल्द भेजना संभव हो पाया, जिससे कि इसे इस्तेमाल करने वालों को जल्द से जल्द सहायता मिल सके।’

ऐसे करें चिल्ला ऐप का इस्तेमाल:  

1- चीखने की आवाज से ये ऐप एक्टिवेट हो जाएगा

2- इसके अलावा पावर बटन को पांच बार प्रेस करने से भी ये एक्टिवेट हो जाता है

एक्टिवेट होने के बाद: 

तुरंत ही एक SOS संदेश (SMS) आपके मोबाइल से उसमें फीड नंबर पर भेजता है जिसमें आपके लोकेशन की जानकारी भी शामिल रहती है।  इसके बाद एक ऑडियो रिकॉर्डिंग को आपके फीड ई-मेल पर भेजा जाता है। और  तुरंत ही SOS वाले नंबर या आपके अभिभावक के नंबर पर एक ऑटोमेटेड कॉल भी प्लेस हो जाता है।

कहां से करें डाउनलोड:

ऐप के एंड्रॉइड वर्जन को गूगल प्लेस्टोर में जाकर डाउनलोड किया जा सकता है। गूगल प्लेस्टोर पर ऐप को इसके इस्तेमाल करने वालों ने 4.9 की रेटिंग दी है।

प्लेस्टोर लिंक- https://play.google.com/store/apps/details?id=comm.Kishlay.screamDetector

ऐप को संचालित करने के इन स्टेप्स को इस फोटो से भी समझा जा सकता है। 
ऐप को संचालित करने के इन स्टेप्स को इस फोटो से भी समझा जा सकता है। 

अपने ऐप की ख़ासियत पर योर स्टोरी को जानकारी देते हुए किसलय बताते हैं कि आपकी चीख को पहचान कर आपके रिश्तेदारों को अलर्ट भेजने वाला ये ऐप बेहद ही क्रांतिकारी सोच के साथ आधुनिकतम तकनीकी के इस्तेमाल से बनाया गया है। किसलय आगे कहते हैं कि ये ऐप खासकर महिलाओं की रक्षा और सुरक्षा के मामले में मील का पत्थर साबित होने वाला है। किसलय ने योर स्टोरी को ये भी बताया कि ना सिर्फ महिलाओं की सुरक्षा बल्कि, दूसरे किसी भी आपात के मामले में भी इस ऐप की मदद से ज़रूरत पड़ने पर सहायता पहुँचाई जा सकती है। जैसे अगर किसी को हार्ट अटैक आ जाए तो इस ऐप की मदद से इसे इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति का लोकेशन ट्रेस कर जल्द से जल्द मेडिकल सहायता मुहैया कराई जा सकती है।

किसलय के इस दावे की पुष्टि इस बात से भी होती है कि उनके ऐप को भारत सरकार ने मान्यता दी है और इस ऐप को भारत सरकार के Ministry of IT and Communication की बेवसाइट पर सिटीजन ऐप की श्रेणी में अपलोड किया गया है।

इस नायाब “चिल्ला” ऐप को बनाने वाले किसलय राज बिहार की राजधानी पटना के रहने वाले हैं। अभी वो कोलकाता के Institute Of Engineering & Management में बी-टेक फाइनल ईयर के छात्र हैं और कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई कर रहे हैं। योर स्टोरी से बात करते हुए किसलय ने उम्मीद जतायी कि ‘महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराध की घटनाओं की रोकथाम में उनके द्वारा बनाए गया ये ऐप बेहद उपयोगी साबित होगा। 

-नीरज सिंह