ये 'आयरन वूमेन’ किसी ‘मिस इंडिया’ से कम नहीं, फर्राटे से दौड़ाती हैं बुलेट, करती हैं वेटलिफ्टिंग

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एक वक्त था जब वो दिखने में बेडौल और बदसूरत लगती थीं, लेकिन आज वो एक खूबसूरत महिला होने के साथ साथ बॉडी बिल्डर हैं। लोगों ने उनको वेटलिफ्टिंग में अपना करियर बनाने से मना किया, लेकिन मजबूत इरादे और इच्छा शक्ति की बदौलत आज उनके नाम वेटलिफ्टिंग में पुरूषों के बनाये कई सारे रिकॉर्डस तोड़ने का खिताब दर्ज है। ‘आयरन वूमेन’ नाम से चर्चित यासमीन मनक ने इंडियन बॉडी बिल्डिंग एंड फिटनेस फेडरेशन की ओर से आयोजित मिस इंडिया-2016 को ना सिर्फ अपने नाम किया है बल्कि आज वो गुड़गांव में ‘स्कल्प्ट’ नाम से अपना जिम भी चलाती हैं। जहां पर वो करीब तीन सौ लड़कों को ट्रेनिंग देती हैं।

मुश्किल भरा बचपन

36 साल की यासमीन मनक आज भले ही एक चर्चित चेहरा हों, लेकिन इनका बचपन काफी परेशानियों में बीता। यासमीन जब 2 साल की थी तब उनके माता-पिता का तलाक हो गया था इसलिए उनको बड़ा करने की जिम्मेदारी उनके दादा-दादी ने संभाली। गुडगांव के रॉटरी पब्लिक स्कूल से 12वीं तक की पढाई और उसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन करने वाली यासमीन का कहना है, 

“जब मैं 7वीं क्लास में थीं तब मुझे टायफॉयड हो गया था, लेकिन मेरी बीमारी का पता देर से चला इसलिए डॉक्टरों को मेरे इलाज के लिये स्टॉराइड का इस्तेमाल करना पड़ा। इससे ना सिर्फ मेरा वजन बढ़ गया बल्कि शरीर भी बेडौल हो गया। मेरे चेहरे पर दाने निकल आये थे। स्कूल में मेरे दोस्त, रिश्तेदार सब मजाक बनाने लगे। मैं जब शीशे में अपने आपको देखती थी तो मुझे भी अपना चेहरा खराब लगता था।”

17 साल की उम्र में स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद यासमीन ने फैसला लिया कि वो अपने शरीर को शेप में लाएंगी। हालांकि तब जिम इतना ज्यादा प्रचलन में नहीं था। यासमीन के घर के पास ही एक जिम सेंटर था। इसलिए उन्होंने वहां जाकर एक्सरसाइज करना शुरू कर दिया। वहीं दूसरी ओर अपना जेब खर्च चलाने के लिए उन्होंने गुड़गांव के एक स्कूल में केजी टीचर के तौर पर काम करना शुरू कर दिया, यासमीन मनक हालांकि संयुक्त परिवार में रहती थीं, लेकिन वो किसी पर बोझ नहीं बनना चाहतीं थीं।

यासमीन सुबह शाम जिम जाती और खाली वक्त में स्कूल। धीरे धीरे वो जिम में दूसरों से बेहतर एक्सरसाइज करने लगीं तो उनके इंस्ट्रक्टर ने यासमीन से कहा कि उनमें दूसरों के मुकाबले ज्यादा स्टेमिना है। इसलिए वो जिम के दूसरे लोगों को लीड करें। इस तरह यासमीन ने ग्रुप के दूसरे लोगों को एक्सरसाइज सीखाने का काम शुरू कर दिया। यासमीन ने योर स्टोरी को बताया कि 

“मैंने वर्कआउट” करने के कुछ कैसेट्स खरीदे, जिनके जरिये मैं खुद उनको करने की कोशिश करती। उसके बाद उसी एक्ससाइज को मैं जिम में अपने ग्रुप को सीखाती थी।”

इस बीच गुड़गांव में ‘एनर्जिक प्लाजा’ नाम से एक बड़ा जिम खुल गया था। वहां पर उनकी एक दोस्त भी काम करती थी। उसी की सिफारिश पर यासमीन को वहां पर काम मिल गया। जहां पर उन्होंने ग्रुप में लोगों की क्लासेस लेना शुरू कर दिया। इस तरह सिर्फ चार महीने बच्चों पढ़ाने के बाद वो फुल टाइम जिम इंस्ट्रक्टर बन गईं। धीरे धीरे यासमीन का तजुर्बा बढ़ने लगा था अब वो खुद कुछ करना चाहती थी इसलिए उन्होने साल 2003 में अपना एक एरोबीक स्टूडियो ‘स्कल्प्ट’ नाम से खोला। 

उनकी ये शुरूआत बहुत अच्छी रही। उनके जितने भी क्लाइंट थे वो सब उनके पास आने लगे। इसके बाद साल 2007 में उन्होंने इसका विस्तार कर उसमें जिम भी खोल दिया। यासमीन अपने जिम में हर महीने करीब तीन सौ लड़के-लड़कियों को ट्रेनिंग देती हैं। इसके अलावा वो ना सिर्फ कुछ लोगों को पर्सनल ट्रेनिंग देती हैं बल्कि उनके कई ऑनलाइन ग्राहक भी हैं जो उनसे एक्सरसाइज सीखते हैं।

यासमीन ने अपने काम की शुरूआत फिटनेस और इन शेप में रहने के लिए की थी, लेकिन कुछ सालों बाद उनको लगने लगा कि लोगों को बेसिक ट्रेनिंग देने और एक्ससाइज के कारण वो बहुत पतली हो गई हैं। साथ ही उनको लगने लगा था कि वो स्लिम तो हो गई हैं लेकिन उनकी बॉडी का कोई भी शेप नहीं रह गया है। इसलिए उन्होने साल 2013 में बॉडी बिल्डिंग, पॉवर लिफ्टिंग और वेट लिफ्टिंग के क्षेत्र में उतरने का फैसला किया। इसके लिये उन्होने 6 दिन की खास ट्रेनिंग लेकर इन सबकी बेसिक तकनीक सीखी जिसके बाद उन्होंने बॉडी बिल्डिंग बनाने के बारे में सोचा।

अपनी उपलब्धियों के बारे में यासमीन का कहना है कि उन्होने ओपन पॉवर लिफ्टिंग में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया था। हालांकि पॉवर लिफ्टिंग और बॉडी बिल्डिंग दोनों अलग-अलग चीजें हैं। बॉडी बिल्डिंग में शरीर की शेप देखी जाती है, जबकि पॉवर लिफ्टिंग में आप कितना वजन उठा सकते हैं ये देखा जाता है। इतना ही नहीं पॉवर लिफ्टिंग में आमतौर पर लोग बहुत मोटे होते हैं। यासमीन कहती हैं, 

“मेरी खासियत ये है कि मैं 66 किलो की होने के बाद भी शेप में रहते हुए भी भारी वेट उठा सकती हूं। यहीं वजह है कि जिस ओपन पॉवर लिफ्टिंग प्रतियोगिता में मैंने हिस्सा लिया था उसमें मैंने 150 किलो वजन उठाया था। जबकि सबसे ज्यादा 180 किलो वजन उठाने वाली का वेट 95 किलो था।”

यासमीन ने पिछले साल मुंबई में आयोजित बॉडी बिल्डिंग प्रतियोगिता ‘फिट फैक्टर’ में भाग लिया था। उसमें वो फर्स्ट रनर अप रहीं थी। इस साल मार्च में आयोजित उसी प्रतियोगिता में दो लेवल हुए। पहले लेवल में उन्होने स्टेट लेवल पर गोल्ड मेडल हासिल किया है। उसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर मिस इंडिया प्रतियोगिता में दो गोल्ड मेडल जीते। इसमें दो केटेगिरी होती हैं। पहली फिजिक, जिसमें मसल्स के साथ आपकी बॉडी शेप में होनी चाहिए। दूसरी केटेगिरी में महिला की फिटनेस देखी जाती है। इसमें मसल्स की जगह टोंड बॉडी और शेप देखी जाती है। खास बात ये होती है कि इसमें स्टेज पर सिर्फ पोज देते हुए कैटवॉक करना होता है। इस प्रतियोगिता में उनका मुकाबला 20 लड़कियों के साथ था।

इस प्रतियोगिता का आयोजन आईआईबीएफ फेडरेशन की ओर से किया जाता है जो कि एक मान्यता प्राप्त संगठन है। इस प्रतियोगिता को जीतने के बाद ‘ओलम्पिया’ के लिए चयन होता है। जिसमें हिस्सा लेना हर बॉडी बिल्डर का सपना होता है। अपनी भविष्य की योजनाओं के बारे में यासमीन का कहना है कि वो ऑफ सीजन में पॉवर लिफ्टिंग पर ज्यादा ध्यान देगीं। फिलहाल उनकी नजर अगस्त और सितम्बर में होने वाले दो अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं पर है। पहली प्रतियोगिता अगस्त में हांगकांग में होगी जबकि दूसरी प्रतियोगिता भूटान में सितम्बर में आयोजित की जाएगी। इन दोनों ही जगहों पर वो देश का प्रतिनिधित्व करेंगीं।

यासमीन आज जिस मुकाम पर हैं यहां तक पहुंचने के लिए उनको काफी मेहनत करनी पड़ी, यहां तक की काफी लोगों ने उनको वेटलिफ्टिंग में करियर बनाने से मना भी किया लेकिन मनक ने उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया। बावजूद यासमीन का कहना है कि इस जगह तक पहुंचने में उनके परिवार और दोस्तों ने काफी मदद की है। यासमीन ग्लैडरेक्स मिसेज इंडिया-2005 का खिताब भी अपने नाम कर चुकी हैं।

एक्सरसाइज के अलावा यासमीन मनक का एक और शौक भी है और वो है बाइक चलाना। यही वजह है कि उन्होंने अपने जिम ‘स्कल्प्ट’ के नाम से एक बाइकर्स ग्रुप भी बनाया हुआ है। बाइक चलाने का शौक उनको तब हुआ जब एक बार वो गोवा घूमने के लिए गई थीं। वहां पर उन्होंने देखा कि बाइक किराये पर मिलती है। ये देखकर उनका मन भी बाइक चलाने को हुआ। तब अपने दोस्त की मदद से उन्होंने वहां पर बाइक चलाना सीखा। उसके बाद गुड़गांव लौटने पर उन्होंने अपने लिये नई बुलेट खरीदी और आज वो हर 3 महीने में अपने ग्रुप के साथ लॉंग ड्राइव पर निकल जाती हैं। अब तक वो बाइक के जरिये अपने ग्रुप के साथ कौसानी, मनाली, उदयपुर, जयपुर, ऋषिकेश सहित कई जगहों पर घूम चुकी हैं। खास बात ये है कि उनका 20 लोगों का ग्रुप है, जिसमें वो अकेली महिला हैं। इसमें उनके जिम से जुड़े लोग ही शामिल हैं।

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