संघर्षों को मात देकर पुजारा ने बनाई थी इंडियन क्रिकेट टीम में अपनी जगह

जन्मदिन विशेष: स्टेडियम में मिली थी मां के गुजर जाने की खबर, सदमे से उबरकर पेश की मिसाल

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भारतीय क्रिकेट टीम में दाएं हाथ के शीर्ष बल्लेबाज चेतेश्वर अरविंद पुजारा की सितारा-जिंदगी भी वक्त के अंधेरे का सीना चीरती हुई दुनियाभर में जगमगाई है। उनके जीवन की कठिनाइयां भी कुछ कम नहीं रही हैं। समय-समय पर उन्हें तरह-तरह के पापड़ बेलने पड़े हैं, तब कहीं जाकर उनकी औकात करोड़पतियों में शुमार हुई है। आज 25 जनवरी को पुजारा का 30वां जन्मदिन है। पढ़ें हमारी विशेष रिपोर्ट...

चेतेश्वर पुजारा
चेतेश्वर पुजारा
बीबीए की पढ़ाई कर चुके चेतेश्वर पुजारा की जिंदगी का वह सबसे दुखद दिन रहा था, जब उनकी 17 वर्ष की उम्र में मां रीमा पुजारा की कैंसर से मृत्यु हो गई थी। मां के निधन की सूचना उन्हें ऐसे वक्त में मिली थी, जब वह क्रिकेट मैच खेलने के लिए स्टेडियम पहुंचे ही थे। 

गुजरात के राजकोट में 25 जनवरी 1988 को जन्मे चेतेश्वर अरविंद पुजारा के पिता अरविंद शिवलाल पुजारा भी सौराष्ट्र के लिए रणजी ट्रॉफी खिलाड़ी रहे हैं। उनके साथ ही बचपन से खेलते-कूदते, लगातार अभ्यास करते हुए चेतेश्वर ने क्रिकेट की दुनिया में कदम रखा है। आज वह प्रथम श्रेणी के भारतीय खिलाड़ियों में शुमार हैं। उनके परिजन बिपिन पुजारा भी सौराष्ट्र के लिए रणजी ट्रॉफी खेलने वालों में शुमार हैं। चुनाव आयोग की ओर से वह गुजरात के 'ब्रांड एंबेसडर' भी नियुक्त रह चुके हैं। चेतेश्वर पुजारा ने वर्ष 2013 में बिजनेस स्टडीज की पढ़ाई कर चुकी पूजा पाबरी से शादी रचाई थी।

घायल वीवीएस लक्ष्मण के स्थानापन्न के तौर पर चेतेश्वर पुजारा ने वर्ष 2010 में पहली बार ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट मैच खेलकर टीम इंडिया में डेब्यू किया था। उसके तीसरे साल पहली बार जिम्बाब्वे के खिलाफ उन्होंने वनडे खेला। वह टेस्ट क्रिकेट में 14 शतक और 16 हाफ सेंचुरी बना चुके हैं। वह 206 रन का सबसे बड़ा स्कोर खेल चुके हैं। कमाल की टेक्निक और शांत स्वभाव वाले पुजारा ने अगस्त 2012 में न्यूजीलैंड के खिलाफ हैदराबाद में खेले गए टेस्ट मैच में 159 रन बनाकर अपना पहला टेस्ट शतक बनाया था। अपने आठ साल के अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट करियर में 56 टेस्ट और पांच वनडे मैच खेल कर वह 525 चौकों, छह छक्कों की मदद से 4445 रन अब तक बना चुके हैं। वह ऐसे पाँचवें भारतीय बल्लेबाज़ हैं, जिसने अपने पहले ही मैच की चौथी पारी में अर्द्धशतक का रिकार्ड बनाया था। भारतीय क्रिकेट के इतिहास में दो-दो दोहरे शतक लगाने का रिकार्ड भी पुजारा के खाते में दर्ज है।

बीबीए की पढ़ाई कर चुके चेतेश्वर पुजारा की जिंदगी का वह सबसे दुखद दिन रहा था, जब उनकी 17 वर्ष की उम्र में मां रीमा पुजारा की कैंसर से मृत्यु हो गई थी। मां के निधन की सूचना उन्हें ऐसे वक्त में मिली थी, जब वह क्रिकेट मैच खेलने के लिए स्टेडियम पहुंचे ही थे। इस सूचना से उन्हें गहरा धक्का लगा। वह विचलित हो उठे। उस घटना के बाद वह लंबे समय तक सदमे की हालत में रहे। उसके बाद तो उन्हें अपनी आगे की जिंदगी का हर कदम मां का आशिर्वाद लगने लगा। वह आज भी अपनी मां के स्नेह को उतनी ही शिद्दत से जीते हुए क्रिकेट खेलते हैं।

अपनी पत्नी के साथ पुजारा
अपनी पत्नी के साथ पुजारा

चेतेश्वर पुजारा आज की अपनी सारी कामयाबियों का श्रेय अपनी मां को देते हैं। उन्हें दुख इस बात का है कि मां उनकी सफलताओं को अपने सपनों की जिंदगी में साझा नहीं कर पाईं। आज के जमाने में जहां ज्यादातर क्रिकेटर अपनी करोड़ों की कमाई क्रिकेट एकेडमी और फैशन स्टोर खोलने में निवेश कर रहे हैं ताकि उनकी धन-संपदा अथाह हो जाए लेकिन अपनी धुन के पक्के टीम इंडिया की नई ‘वॉल’ चेतेश्वर पुजारा की बात ही कुछ और है। वह अपनी करोड़ों की कमाई नेकनीयती से क्रिकेट को ही वापस कर रहे हैं। वह राजकोट के पास एक ऐसी क्रिकेट एकेडमी चला रहे हैं, जिसमें बच्चों को फ्री में क्रिकेट ट्रेनिंग दी जा रही है।

चेतेश्वर पुजारा कहते हैं कि उनका मकसद उन युवा खिलाड़ियों को मौका देना है, जिन्हें आर्थिक या फिर किसी अन्य वजह से अपना हुनर दिखाने का अवसर आसानी से नहीं मिल पाता है। इस एकेडमी में और भी कई सुविधाएं हैं, जो बिल्कुल फ्री हैं। इस एकेडमी को चलाने पर सालाना करीब 25 लाख रुपए का खर्च हो जाते हैं। एकेडमी का पूरा खर्च स्वयं पुजारा उठाते हैं। चेतेश्वर पुजारा एक साथ एक बात और सबसे अलग है। वह केवल टेस्ट क्रिकेट खेलते हैं। पुजारा ने पिछले एक साल में 16 टेस्ट मैच खेले हैं। एक टेस्ट मैच की फीस 15 लाख रुपए होती है। पुजारा ने एक साल में टेस्ट क्रिकेट से करीब 2.4 करोड़ रुपए कमाए हैं। इसके अलावा वह बीसीसीआई के सेंट्रल ग्रेड कॉन्ट्रेक्ट में ए-ग्रेड के खिलाड़ी के रूप में सूचीबद्ध हैं। इससे उन्हें हरवर्ष दो करोड़ रुपए की रिटेनर फीस मिल जाती है। इससे पिछले साल उन्हें करीब 4.4 करोड़ रुपए की आय हो गई। पुजारा को नेशनल स्पोर्ट्स डे पर उन्हें अर्जुन अवॉर्ड मिलने वाला है।

टीम इंडिया के खिलाड़ियों के साथ पुजारा
टीम इंडिया के खिलाड़ियों के साथ पुजारा

किसी भी क्षेत्र में अपनी कामयाब जिंदगी के कई एक तल्ख अनुभव भी होते हैं। ऐसी तल्खियां पुजारा के भी जीवन में आती जाती रहती हैं। अभी-अभी पुजारा के साथ भी एक ऐसा ही तल्ख वक्त जोहान्सबर्ग में गुजरा है। वहां टीम इंडिया और दक्षिण अफ्रीका के बीच खेले जा रहे तीसरे टेस्ट के पहले सेशन में क्रीज पर विराट कोहली और चेतेश्वर पुजारा ने किसी तरह टीम इंडिया का लंच तक तो कोई और विकेट नहीं गिरने दिया लेकिन इस बीच पुजारा एक ऐसा कीर्तिमान अपने नाम दर्ज करा बैठे, जैसा वह दोबारा कभी न बनाना चाहेंगे।

अपने करियर का 50वां टेस्ट खेल रहे फिलेंडर ने केएल राहुल को खाता भी नहीं खोलने दिया और विकेटकीपर क्विंटन डी कॉक के हाथों कैच आउट कराया। उनके आउट होने के बाद क्रीज पर टीम इंडिया की नई 'दीवार' चेतेश्वर पुजारा आए। उन्होंने इस मैच में अपना खाता खोलने के लिए 53 गेंदों का सामना किया। इसी के साथ वह दूसरे ऐसे भारतीय बल्लेबाज बन गए, जिन्होंने अपना खाता खोलने के लिए 50 से ज्यादा गेंद ली हों। उनकी इस असफलता पर चहेतों ने उनकी काफी लानत-मलामत कर डाली। अब भी सोशल मीडिया पर खूब मजे लिए जा रहे हैं मगर असल में ये मजाक वाली बात है ही नहीं। चेतेश्वर पुजारा ने जो किया, उसकी साउथ अफ्रीका की इन पिचों पर पिछले दो टेस्ट में भी जरूरत थी।

पुजारा से राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण के स्टाइल में क्रीज पर टिकने की उम्मीद रहती है। पिछले दो टेस्ट में पुजारा ये नहीं कर पाए थे मगर यहां क्रीज पर समय बिताना ही एकलौता तरीका था। अपनी 50 रनों की पारी में इस बल्लेबाज ने 179 गेंदें खेलीं और 4.35 घंटे क्रीज पर बिताए। अपनी इस पारी पर पुजारा कहते हैं- 'ये मेरी लाइफ की सबसे मुश्किल पिचों में से एक रही है। हमारा यहां 187 का स्कोर, दूसरी जगहों के 300 के बराबर मानना चाहिए।'

गौरतलब है कि जिस समय बेमेल पिच पर पुजारा अपनी जिंदगी की इस असफलता का इतिहास लिख रहे थे, टीम इंडिया के कोच रवि शास्त्री ड्रेसिंग रूम से उनकी इस पारी को बड़े गौर से देख रहे थे। गौरतलब है कि अपना खाता खोलने के लिए पुजारा से ज्यादा गेंदें लेने का खराब रिकॉर्ड न्यूजीलैंड के जिओफ एलॉट के नाम है। सन 1999 में न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में 77 गेंदें खेलने के बाद भी ये बल्लेबाज अपना खाता नहीं खोल पाया था। फिर 2013 में इंग्लैंड के स्टुअर्ट ब्रॉड ने 66 बॉल खेलने के बाद पहला रन लिया था। जहां तक ऐसे दूसरे इंडियन क्रिकेटर की बात है, वर्ष 1994 में राजेश चौहान ने अहमदाबाद में श्रीलंका के खिलाफ अपना रन लेने में 57 गेंदें खेली थीं।

पुजारा के क्रिकेट इतिहास में की और उल्लेखनीय बातें दर्ज हैं। अपने टेस्ट करियर के 52वें मैच में ने न केवल 13वां शतक जड़ा था, बल्कि क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर का भी एक रिकॉर्ड तोड़ डाला था। पुजारा ने इस मैच में खेलते हुए भारतीय सरजमीं पर 3000 रन भी पूरे कर लिए थे। पुजारा ने यह कमाल अपने टेस्ट करियर की 53वीं पारी में किया था। एक तरफ जहां सचिन को इस मुकाम पर पहुंचने के लिए 56 पारियां खेलना पड़ी थीं, वहीं पुजारा ने उनसे तीन पारी कम खेलते हुए यह रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया।

पुजारा ने दिसंबर 2005 में सौराष्ट्र के लिए अपनी प्रथम श्रेणी की शुरुआत की और अक्टूबर 2010 में बंगलौर में अपना पहला टेस्ट मैच खेला। वह भारत ए टीम का एक हिस्सा रहे हैं, जिसने 2010 के ग्रीष्मकाल में इंग्लैंड का दौरा किया और दौरे का सर्वोच्च स्कोरर था। अक्टूबर 2011 में, बीसीसीआई ने उन्हें डी ग्रेड राष्ट्रीय अनुबंध से सम्मानित किया। उन्हें लंबी पारी खेलने के लिए आवश्यक ध्वनि तकनीक और स्वभाव के लिए जाना जाता है। नवंबर 2012 में अहमदाबाद में इंग्लैंड के खिलाफ उन्होंने अपना पहला दोहरा शतक बनाया और मार्च 2013 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एक और दोहरा शतक लगाया।

वर्ष 2012 में एनकेपी साल्वे चैलेंजर ट्रॉफी में वह दो शतक और एक अर्धशतक के साथ सर्वोच्च स्कोरर रहे थे। वह सिर्फ 11 मैचों में टेस्ट क्रिकेट में 1000 रनों तक पहुंचने वाले सबसे तेज बल्लेबाज़ में से एक और 18 वें टेस्ट खिलाड़ी हैं। वह इमर्जिंग क्रिकेटर ऑफ द ईयर 2013 के विजेता माने जाते हैं। फरवरी 2017 में, बांग्लादेश के खिलाफ एक दिवसीय टेस्ट मैच के दौरान, उन्होंने सबसे अधिक रनों का एक और नया रिकॉर्ड बनाया, जिसमें 1605 रन मिले थे। पुजारा ने आईपीएल के पहले तीन सत्रों में कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए खेले।

वर्ष 2011 के खिलाड़ियों की नीलामी में उन्हें रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (आरसीबी) ने खरीदा था। कोच्चि टस्कर्स केरल के खिलाफ मैच में घुटने से घायल होने से पहले उन्होंने आईपीएल के चौथे सत्र में आरसीबी के लिए शुरूआत की थी। यह भी उल्लेखनीय है कि जब भारतीय सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग फॉर्म से जूझ रहे थे, उन्होंने पुजारा को लगातार रणजी ट्रॉफी मैचों में डबल और ट्रिपल टन का मुकाबला करने का अवसर दिया।

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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