नई टेक्नोलॉजी से स्टार्टअप की राह हुई आसान

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देश में स्टार्टअप की शुरुआत ने नए कीर्तिमान बनाए हैं। माना जा रहा है कि अगले कुछ वर्षों में हजारों नए स्टार्टअप ऐसे होंगे जहां अरबों रुपए का कारोबार हो रहा होगा। स्टार्टअप इसलिए महत्त्वपूर्ण हो गए हैं, क्योंकि अब आईआईटी और आईआईएम से निकलने वाले युवा कोई नौकरी पकड़ने के बजाय स्टार्टअप शुरू करने को तरजीह देने लगे हैं और स्टार्टअप को सफल बनाने में सबसे बड़ा योगदान है टेक्नोलॉजी का है...

स्टार्टअप की ऐसी हवा चली कि काबिल नौजवान अब किसी नामी संस्थान से ऊंची डिग्री लेने के बाद नौकरी करने के बजाय अपना स्टार्टअप शुरू करने के बारे में सोचने लगे हैं। वे लाखों रुपए की नौकरी करने की जगह पर अपना स्टार्टअप शुरू कर खुद मालिक बनने और अपने जैसे योग्य युवाओं को शानदार पैकेज वाली नौकरी देने का सपना देखने लगे हैं। इसी सोच का असर है कि पिछले कुछ वर्षों में देश में सैकड़ों स्टार्टअप खुल गए हैं और बेमिसाल कामयाबी के आधार पर वे दूसरों को भी स्टार्टअप खोलने की प्ररेणा देने लगे हैं और ये सबकुछ मुमकिन हुआ है सपनों और टेक्नोलॉजी के मिश्रण से।

स्टार्टअप के लिए नई टेक्नोलॉजी एक बड़ा चैलेंज भी है लेकिन उसी ने सबसे पहले राह आसान भी की है। उसके बिना बाजार के कॉम्पटीशन में कामयाब नहीं हुआ जा सकता है। कई तरह के स्टार्टअप तो इसी को अपना बिजनेस पार्ट टारगेट कर तरह-तरह के काम में उतर रहे हैं। मसलन, आजकल के बिजनेस ट्रेंड को देखते हुए पोर्टल बनाना भी नया स्टार्टअप हो सकता है और वेब पेज बनाना भी। अलग-अलग तरह के कामों के लिए भिन्न-भिन्न प्रकार के पोर्टल, वेब पेज। इस ऑनलाइन आधुनिक दौड़ का जायजा लेने के लिए कभी वेब स्पेस पर नजर डालकर देखिए कि किस तरह तमाम बिजनेस सेवाएं किस तरह भविष्य के बाजार को ध्यान में रखते हुए क्रांतिकारी बदलाव की ओर तेजी से मूव कर रही हैं।

कहते हैं न कि आजकल जिंदगी ऑनलाइन हो गई है। एन. रघुरामन बताते हैं कि साइबर स्पेस ने शॉपिंग के लिए हजारों अवसर सामने ला खड़े किए हैं। ऐसा ही है वर्चुअली डॉट कॉम, जो पारंपरिक स्टोर्स के लिए बनाया गया है। यह वेबसाइट ऑनलाइन शॉपिंग करने के लिए नहीं है, लेकिन यहां पर कोई भी विभिन्न प्रकार के उत्पादों को ब्राउज कर सकता है। यह ऐसा प्लेटफॉर्म है जहां पर पारंपरिक खुदरा व्यापारी अपने लिए ग्राहक पा सकते हैं। साथ ही ऑनलाइन स्टोर्स से प्रतियोगिता कर सकते हैं। यह प्रोडक्ट फोटोग्राफी वेबसाइट है। यहां पर कोई भी खुदरा विक्रेता अपना स्टोर खोल सकता है और देशभर के ग्राहकों के लिए अपने उत्पाद दिखा सकता है।

इंटरनेट के कारण बिज़नेस करने के तरीके बदल गए हैं। इन्टरनेट की मदद से नए स्टार्टअप्स अपने यूनिक बिज़नेस आइडियाज आए दिन पेश करते जा रहे हैं। यह भी गौरतलब है कि भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में इन्टरनेट उपभोक्ताओं की संख्या में तेजी से इजाफा रहा है। इसी के साथ ऑनलाइन स्टार्टअप की अंतहीन संभावनाएं भी पैदा हो रही हैं।

ऑनलाइन व्यापार का सबसे बड़ा फायदा यह है कि कम समय में, कम निवेश से कामयाब व्यापार शुरू किया जा सकता है। एक सबसे बड़ी नजीर फ्लिपकार्ट कंपनी की ही ले लें कि वह देखते ही देखते कैसे फर्श से अर्श पर जा पहुंची है और आज उसकी हैसियत 100,000 करोड़ रूपए तक पहुंच गई है। इसी तरह अमेजन, स्नैपडील समेत कॉमर्स इंडस्ट्री में कई धुरंधरों ने बाजार को कम्प्यूटर स्क्रीन पर पहुंचा कर ऑनलाइन बिजनेस को नई ऊंचाइयां दे दी हैं। देश में स्टार्टअप की शुरुआत ने नए कीर्तिमान बनाए हैं। माना जा रहा है कि अगले 3-4 वर्ष में हजारों नए स्टार्टअप ऐसे होंगे जहां अरबों रुपए का कारोबार हो रहा होगा। स्टार्टअप इसलिए महत्त्वपूर्ण हो गए हैं, क्योंकि अब IIT और IIM से निकलने वाले युवा कोई नौकरी पकड़ने के बजाय स्टार्टअप शुरू करने को तरजीह देने लगे हैं, स्टार्टअप को सफल बनाने में सबसे बड़ा योगदान है टेक्नॉलजी का है।

कई प्रतिष्ठित कंपनियों के नियोक्ता यह देख कर परेशान हैं कि जब वे किसी नामी IIT या IIM संस्थान में लगने वाले जॉब मेले में नौकरी के लिए युवाओं का चयन करने जाते हैं, तो उनमें से 15-20 फीसदी युवा लाखों रुपए महीने का वेतन ठुकरा देते हैं। पहले ऐसा नहीं था। आखिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि युवा नौकरी के बड़े अॉफर्स ठुकराने लगे हैं? इस सवाल का एक जवाब है स्टार्टअप। अब काबिल नौजवान किसी नामी संस्थान से ऊंची डिग्री लेने के बाद नौकरी करने के बजाय अपना स्टार्टअप शुरू करने के बारे में सोचने लगे हैं। वे किसी कंपनी में लाखों रुपए की नौकरी करने के स्थान पर अपना स्टार्टअप शुरू कर खुद मालिक बनने और अपने जैसे योग्य युवाओं को शानदार पैकेज वाली नौकरी देने का सपना देखने लगे हैं। इसी सोच का असर है कि पिछले कुछ वर्षों में देश में सैकड़ों स्टार्टअप खुल गए हैं और बेमिसाल कामयाबी के आधार पर वे दूसरों को भी स्टार्टअप खोलने की प्ररेणा देने लगे हैं।

क्या है यह स्टार्टअप?

आज भी कई ऐसे लोग हैं, जो ये नहीं जानते कि स्टार्टअप है क्या? स्टार्टअप ऐसी कंपनी को कहा जाता है, जो अपने शुरुआती दौर में होती है। एक तरह से यह प्रायोगिक तौर पर किसी व्यवसाय की शुरुआत करना हुआ। स्टार्टअप छोटे स्तर पर शुरू किये जाते हैं और बाजार में टिके रहने के लिए इन्हें अक्सर फंडिंग की जरूरत होती है।

90 के दशक में अनेक डॉटकॉम (इंटरनेट) कंपनियों की स्थापना के दौर में स्टार्टअप शब्द चलन में आया था, पर 21वीं सदी के पहले दशक में ऐसी दर्जनों स्टार्टअप कंपनियां अस्तित्व में आईं। आईआईटी और आईआईएम जैसे संस्थानों से डिग्री हासिल करने के बाद युवाओं ने फ्लिपकार्ट, स्नैपडील, शादी डौटकौम जैसे स्टार्टअप न सिर्फ शुरू किए बल्कि उन की सफलता ने साबित कर दिया कि कैसे देश में हजारों नए रोजगार और बेशुमार पूंजी पैदा की जा सकती है।

मिसाल के तौर पर वर्ष 2007 में महज 40 हजार रुपए से शुरू किए गए स्टार्टअप ‘फ्लिपकार्ट’ ने यह उदाहरण पेश किया है कि करोड़ों रुपए का कारोबार करने के लिए सब से ज्यादा जरूरी चीज है जज्बा और तकनीक। स्टार्टअप कंपनियों की मौजूदगी बढ़ने से हमारा देश दुनिया में सबसे युवा स्टार्टअप मुल्क बन गया है। आंकड़ों के मुताबिक देश में 72 फीसदी स्टार्टअप कंपनियों के संस्थापक 35 साल से कम उम्र के युवा हैं। इसे एक शानदार उपलब्धि माना जा सकता है। यही नहीं, रोजगार तलाश करने वाले प्रतिभाशाली युवा बड़ी कंपनियों के बजाय अपना खुद का स्टार्टअप शुरू करना पसंद कर रहे हैं। खुद सरकार को स्टार्टअप कंपनियों में देश का बेहतर भविष्य दिखाई दे रहा है। प्रधानमंत्री कार्यालय भी युवाओं को प्रोत्साहित करने की कई योजनाओं पर काम कर रहा है।

आंध्र प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैसे कई राज्यों की सरकारों ने स्टार्टअप कंपनियों को वित्तीय मदद देने और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर मुहैया कराने की योजना पर काम किया जा रहा है। इस प्रोत्साहन के पीछे यह विचार काम कर रहा है कि इस से बड़ी संख्या में रोजगार का सृजन होगा जो बेरोजगार युवाओं के लिए सब से ज्यादा जरूरी चीज है।

एक समय ऐसा भी था जब सरकारी नौकरी को सबसे सुरक्षित माना जाता था। फिर प्राइवेट सेक्टर में ऊंची नौकरी को प्रतिष्ठा की नजर से देखने का समय आ गया, जो बहुराष्ट्रीय कंपनियों की आमद के साथ थोड़ा फीका पड़ गया, लेकिन जैसी सनसनी पिछले एक दशक के भीतर स्टार्टअप कंपनियों ने अपनी कामयाबी से फैलाई है, उससे एक नई उम्मीद की किरण देश में जगी है। अब ज्यादातर युवा अपना स्टार्टअप शुरू करने को एक रुतबे की बात मानते हैं, इसी सोच का नतीजा है कि देश में पिछले 7-8 वर्षों में कई बेहतरीन स्टार्टअप शुरू हुए हैं, जिन्होंने बाजार का चेहरा ही बदल कर रख दिया।

एक रिपोर्ट के अनुसार देश में 3,100 स्टार्टअप थे, जिनकी संख्या 2020 तक बढ़ कर 11,500 होने का अनुमान है। टैक्सी बुकिंग, भोजन का अॉर्डर, अॉनलाइन शॉपिंग, फ्लाइट, होटल आदि की बुकिंग से ले कर कई ऐसे काम हैं, जिनमें पहले कई झंझट थे, लेकिन स्टार्टअप कंपनियों ने ई-कॉमर्स का सहारा लेकर ये सारे काम इतने आसान कर दिए हैं कि अब वे चुटकी बजाते ही हो जाते हैं। अब कई बड़ी पुरानी कंपनियों में भी स्टार्टअप कंपनियों को ले कर दिलचस्पी जग रही है और वे इसमें या तो निवेश कर रही हैं या फिर अपना कामकाज इन्हें सौंप रही हैं।

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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