'ब्लू व्हेल' यानी खेल-खेल में जान की बाजी

0

महीनों से हर बच्चे, हर अभिभावक के दिमाग में एक डरावना शब्द गूंज रहा है- 'ब्लू व्हेल'। मामला इतना खतरनाक है कि इस ऑनलाइन गेम के खतरनाक परिणामों को देखते हुए यूपी एजुकेशन डिपार्टमेंट ने लखनऊ के सभी स्कूलों में बच्चों के स्मार्टफोन इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी है। 

भारत समेत दुनियाभर में इस चैलेंज की वजह से सवा सौ से ज्यादा लोगों की जानें जा चुकी हैं। इस खतरनाक खेल की शुरुआत वर्ष 2013 में रूस से हुई। सोशल नेटवर्किंग साइट VKontakte के एक ग्रुप F57, जिसे डेथ ग्रुप कहा जाता था, की वजह से पहली मौत 2015 में हुई।

हमारे देश में ब्लू-वेल चैलेंज की वजह से मौतों का सिलसिला उस वक्त शुरू हुआ, जब 30 जुलाई को मुंबई में एक 14 साल के बच्चे ने कथित तौर पर एक इमारत से कूदकर अपनी जान दे दी। इसके बाद इंदौर में 7वीं क्लास में पढ़ने वाले एक लड़के ने 10 अगस्त को खुदकुशी करने से ठीक पहले बचा लिया गया। उसने अपनी स्कूल डायरी में पहले के 50 स्टेज के बारे में लिख रखा था। पश्चिम बंगाल में 12 अगस्त को 10वीं क्लास के एक बच्चे का शरीर मृत पाया गया। 

महीनों से हर बच्चे, हर अभिभावक के दिमाग में एक डरावना शब्द गूंज रहा है- 'ब्लू व्हेल'। इसके बारे में जानने से पहले आइए, इन दिनों की सुर्खियों पर एक नजर डालते हैं- 'ब्लू वेल चैलेंज' पर बैन के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील, Smartphone:blue whale challenge case smartphones banned in ..., कहीं गर्लफ्रेंड को ब्लैकमेल करने तो कहीं दोस्तों को डराने को खेला जा रहा ब्लू व्हेल गेम, जानलेवा  ब्लू व्हेलचैलेंज, जानें सबकुछ, कोलकाता में सबसे ज्यादा बार ढूंढा गया 'ब्लू व्हेल चैलेंज', ब्लू व्हेल चैलेंज से तनाव का सामना कर रहे लोगों के लिए बनी हेल्पलाइन, ब्लू व्हेल मामले में SC में शुक्रवार को सुनवाई, देश में ऑनलाइन गेम 'ब्लू व्हेल चैलेंज' की समस्या का अब जल्द रास्ता निकालेगी सरकार, अब पुडुचेरी में ब्लू व्हेल का शिकार बना छात्र, 'ब्लू व्हेल चैलेंज': पुलिस ने जारी की अडवाइजरी, ऐसे रहें पैरंट्स सतर्क, पश्‍चिम बंगाल: अब बारासात में ब्लू व्हेल का आतंक, बीजेडी नेता ने 'ब्लू व्हेल गेम' से की अमित शाह की तुलना, मचा हंगामा...।

ये सुर्खियां बताती हैं कि 'ब्लू व्हेल चैलेंज' किस तरह आजकल हर भारतीय के दिमाग को धुन रहा है। मामला इतना खतरनाक है कि इस ऑनलाइन गेम के खतरनाक परिणामों को देखते हुए यूपी एजुकेशन डिपार्टमेंट ने लखनऊ के सभी स्कूलों में बच्चों के स्मार्टफोन इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी है। अब आइए, इसके बारे में विस्तार से जानते हैं। ब्लू व्हेल का संबंध वेल्स के सुसाइड से है। पानी में रहने वाले स्तनधारी जीव बीच पर चले जाते हैं। वहां उनकी डिहाइड्रेशन, अपने खुद के वजन या हाई-टाइड की वजह से मौत हो जाती है। मीडिया सूचनाओं के मुताबिक ऑनलाइन गेम ब्लू व्हेल चैलेंज एक तरह का बहुत ही खतरनाक खेल है, जो लगभग 50 दिन तक चलता है। इस दौरान खिलाड़ी को नुकसान पहुंचाने वाले 50 टास्क दिए जाते हैं।

सबसे घातक बात ये होती है कि खेल के अंत में खिलाड़ी को खुदकुशी करनी होती है। इसी दौरान खिलाड़ी को अपने सभी कारनामों के वीडियो बनाकर उस 'व्हेल' या इंस्ट्रक्टर को भेजने होते हैं जो अभी तक उसे इंस्ट्रक्ट करता रहा हो। भारत समेत दुनियाभर में इस चैलेंज की वजह से सवा सौ से ज्यादा लोगों की जानें जा चुकी हैं। इस खतरनाक खेल की शुरुआत वर्ष 2013 में रूस से हुई। सोशल नेटवर्किंग साइट VKontakte के एक ग्रुप F57, जिसे डेथ ग्रुप कहा जाता था, की वजह से पहली मौत 2015 में हुई। रूस की एक यूनिवर्सिटी से बाहर किए गए स्टूडेंट फिलिप बुदेकिन ने दावा किया था कि उसने यह खेल बनाया है। उसके मुताबिक उसने ऐसा इसलिए किया क्योंकि वह चाहता था कि समाज साफ हो जाए। उसके मुताबिक उन लोगों को खुदकुशी के लिए उकसाकर ऐसा किया जा सकता है जिनकी, उसके मुताबिक, कोई वैल्यू नहीं थी। उसे 16 टीनेजर्स को खुदकुशी के लिए उकसाने के आरोप में गिराफ्तार कर लिया गया। 11 मई को बुदेकिन को आरोपी करार देकर 3 साल की सजा सुना दी गई।

भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और आइटी मंत्रालय ने गूगल, फेसबुक, वॉट्सऐप, इंस्टाग्राम और याहू से इस खेल से जुड़े लिंक्स हटाने के निर्देश दिए हैं। इससे पहले महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय ने इस खेल पर बैन लगाने की मांग की थी। अब ब्लू व्हेल पर पाबंदी के लिए तमिलनाडु के एक व्यक्ति ने देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई गई है। सीजेआई दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविल्कर और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की पीठ ने मदुरै के 73 साल के वकील एन एस पोन्नैया की ओर से दाखिल याचिका पर 15 सितंबर को सुनवाई के लिए सहमति जताई है। इस याचिका में केंद्र सरकार को ऑनलाइन गेम पर पाबंदी लगाने और इसके बारे में जनता को जागरूक करने का निर्देश दिए जाने का अनुरोध किया गया है। याचिका में कहा गया है कि 'पांच सितंबर तक मीडिया की खबरों के अनुसार कम से कम 200 लोग ऑनलाइन ब्लू वेल गेम खेलते हुए खुदकुशी कर चुके हैं। इनमें से ज्यादातर 13 से 15 साल तक के किशोर हैं।'

हमारे देश में ब्लू-वेल चैलेंज की वजह से मौतों का सिलसिला उस वक्त शुरू हुआ, जब 30 जुलाई को मुंबई में एक 14 साल के बच्चे ने कथित तौर पर एक इमारत से कूदकर अपनी जान दे दी। इसके बाद इंदौर में 7वीं क्लास में पढ़ने वाले एक लड़के ने 10 अगस्त को खुदकुशी करने से ठीक पहले बचा लिया गया। उसने अपनी स्कूल डायरी में पहले के 50 स्टेज के बारे में लिख रखा था। पश्चिम बंगाल में 12 अगस्त को 10वीं क्लास के एक बच्चे का शरीर मृत पाया गया। उसका सिर प्लास्टिक में लिपटा हुआ था और उसके गले में एक रस्सी बंधी हुई थी।

इससे पहले विदेश में होने वाली कुछ ऐसी ही घटनाएं उल्लेखनीय हैं। वेनेजुएला में 26 अप्रैल को एक 15 साल के बच्चे ने कथित तौर पर इस खेल के लिए जान दे दी। ब्राजील में क्रिश्चियन सोशल पार्टी के पास्टर ने दावा किया कि उसकी भतीजी ने इस खेल के चलते अपनी जान दे दी। एक 15 साल की छात्रा को उसकी जान लेने के ठीक पहले ही रोक लिया गया। उसके हाथ पर वेल के शेप में कई कट्स लगे थे। एक 17 साल के बच्चे ने खुदकुशी की कोशिश से पहले फेसबुक पर लिखा- 'ब्लेम इट ऑन द वेल' यानी इसका दोष 'वेल' पर लगाया जाए।

अर्जंटीना में एक 16 साल के बच्चे ने फाइनल स्टेज के लिए अपनी जान दे दी वहीं एक 14 साल के बच्चे को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इटली में मार्च में अखबारों में इस खेल की चर्चा हुई। इसे असली रूसी खेल करार देते हुए इसके नियमों के बारे में बताया गया। कुछ दिन बाद एक टीनएजर की खुदकुशी को इस खेल से जोड़कर देखा गया। कीनिया में नैरोबी में एक स्टूडेंट ने 3 मई को फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। पुर्तगाल में 18 साल की एक लड़की को रेलवे लाइन के पास पाया गया। उसके हाथ पर कई चोटें पाई गईं। उसने बताया कि उसे किसी ब्लू-व्हेल नाम के शख्स ने उकसाया था। सऊदी अरब में 5 जून को एक 13 साल के बच्चे ने अरपने प्लेस्टेशन के तारों से खुद की जान लेने की कोशिश की। यह इस खेल का सऊदी में पहला मामला था। चीन में एक 10 साल की बच्ची ने खेल के चलते खुद को नुकसान पहुंचाया और एक सुइसाइड ग्रुप भी बनाया।  वहां इस खेल पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

ये भी पढ़ें- बच्चों को ज़रूर दिखाएं ये 10 मिनट की कार्टून फिल्म

यदि आपके पास है कोई दिलचस्प कहानी या फिर कोई ऐसी कहानी जिसे दूसरों तक पहुंचना चाहिए, तो आप हमें लिख भेजें editor_hindi@yourstory.com पर। साथ ही सकारात्मक, दिलचस्प और प्रेरणात्मक कहानियों के लिए हमसे फेसबुक और ट्विटर पर भी जुड़ें...

पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

Related Stories

Stories by जय प्रकाश जय