अपने बिजनेस को कैसे सफल बनाएं? जानिए मशहूर उद्यमी अशोक सूटा

(यह लेख मूलतः अंग्रेजी में है , जिसे लिखा है योर स्टोरी की संस्थापिका और एडिटर इन चीफ श्रद्धा शर्मा ने )

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बातचीत के दौर में अशोक सूटा माना कि उद्यमिता के क्षेत्र में उन्होंने पहल काफी देर से की और सिलसिलेवार रूप से तो व्यवसाय में बहुत बाद के चरणों में आए। भले ही उन्होंने उद्यमिता के क्षेत्र में देर से कदम रखा हो लेकिन जब कभी भी बात भारतीय सूचना तकनीक (आईटी) के क्षेत्र की होती है तो एक नाम सबसे पहले मन-मस्तिष्क में आता है और वह है अशोक सूटा का। कोई भी व्यवसाय शुरू करना एक आसान काम नहीं है और एक पैमाना तय करना और लगातार वृद्धि करना इससे भी कहीं अधिक कष्टकर कार्य है। 2011 में दुनिया के फलक पर आया उनका नवीनमत उद्यम ‘हैप्पिएस्ट माइंड्स’ ( Happiest Minds) अपने लक्ष्य की प्राप्ति की ओर तेजी से बढ़ रहा है और जल्द ही वह 100 मिलियम अमरीकी डॉलर के राजस्व को सबसे कम समय में पाने वाला उद्यम बन जाएगा। इससे पहले वे ‘माईंडट्री टेक्नोलाज़ीज़’ के सहसंस्थापक रह चुके हैं और इस कंपनी का आईपीओ 103 बार ओवर सबस्क्राइब होने की वजह से खासा मशहूर हुआ था। इससे पहले भी वे विप्रो के आईटी व्यापार को सिर्फ 2 मिलियन डॉलर से 500 मिलियन डॉलर तक ले जाने वाले व्यक्ति के रूप में भी जाने जाते हैं। उन्होंने वर्ष 1984 में विप्रो के साथ काम करना शुरू किया था।

अशोक सूटा
अशोक सूटा

‘‘मैं एक ऐसे क्षेत्र में था जिसे मूल रूप से एक बड़े स्तर के हिसाब से तैयार किया गया था और निश्चित रूप से एक बड़ा बाजार था और भारत उसमें सफल होने के हिसाब से बिल्कुल सही स्थिति में था,’’ वे याद करते हुए बताते हैं। ‘‘उस समय मुख्य सवाल इस क्षेत्र में मौजूद मुख्य खिलाडि़यों का था जो इस लहर की सवारी करने के लिये सबसे अच्छी स्थिति में थे। बहुत ही कम लोगों को इस बात की जानकारी होगी कि हालांकि विप्रो ने इस क्षेत्र में बहुत बाद में कदम रखा था लेकिन फिर भी एक समय ऐसा आया था जब हमने इंफोसिस को पीछे छोड़ते हुए भारत की नंबर दो सॉफ्टवेयर कंपनी बनने में सफलता पाई थी। हालांकि उस समय विप्रो एक बेहद छोटी सी कंपनी थी लेकिन इसे बड़ी सोच के साथ तेज विकास के प्रबंधन के लिये और अपनी मूल योग्यता को संस्थागत बनाये रखने के इरादे से खड़ा किया गया था। उस प्रकार के समर्थन ने एक बहुत बड़ा अंतर पैदा किया है।’’

तो ऐसे में सफलतापूर्वक एक नया व्यापार शुरू करने के लिये जरूरी सामग्री के बारे में बात करने के लिये सूटा से बेहतर और कौन हो सकता है? उच्च स्तर को पाने के लिये जरूरी पांच तत्व सूटा के शब्दों में आपके लिये पेश हैं।

1. बढ़ने के लिये डिजाइन करें

एक ऐसी संस्था का निर्माण करें तो बढ़ने के लिये तैयार हो वरना आप अपनी मंजिल तक कभी नहीं पहुंच पाएंगे। इसका सबसे अच्छा उदाहरण ‘हैप्पिएस्ट माइंड्स’ है। हमने फैसला किया था कि हमें एक निश्चित आकार तक बढ़त करनी है, हम उद्योग के कुछ विशेष क्षेत्रों में छा जाना चाहते थे और सभी प्रकार की विघटनकारी प्रौद्योगिकियों पर अपना ध्यान केंद्रित करना चाहते थे। बहुत से लोग इसे एसएमएसी (SMAC-सामाजिक, मोबाइल, विश्लेषण और बादल) मानते हैं लेकिन हमारी नजरों में यह एसएमएसी के साथ-साथ एकीकृत संचार, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, कृत्रिम बृद्धिमत्ता और संज्ञान में लेने वाले कंप्यूटिंग का मिश्रण है। हमने शुरू से ही इन प्रत्येक भूमिकाओं और समूहों के लिये हर किसी को तैयार किया जिसके फलस्वरूप हमारे पास तीन अलग-अलग उपभोक्ताओं के वर्ग के लिये तीन व्यापार रेखाएं थीं। हमने प्रत्येक व्यवसाय के लिये अलग अध्यक्ष और सीईओ को नियुक्त किया। हमारे रास्ते में बाधा बनने वाली प्रत्येक प्रौद्योगिकी के लिये हमने एक ग्लोबल प्रैक्टिस हेड की नियुक्ति करने के अलावा इंडस्ट्री ग्रुप हेड की भी नियुक्ति की। हमने अपने पहले ही वर्ष में सिर्फ अमरीका में ही आठ कार्यालय शुरू किये। इस प्रकार की बढ़त के लिये आगे आकर निवेश करने की आवश्यकता होती है। हमने तेजी से विस्तार करने और समर्थन के लिये पर्याप्त पैसा उठाया जो हमें आईपीओ तक पहुंचाने में सक्षम रहा जिसके बाद ही हम अपनी जगह बनाने में कामयाब रहे।

2. नकद ही राजा है

व्यापार में सफल होने के लिये आपको लाभ के मुकाबले नकदी के आधार पर निर्णय लेने चाहियें और यही मेरा एक प्रमुख सिद्धांत रहा है। माईंडट्री की स्थापना के समय मेरे पास पैसे की भरमार थी और तभी सुब्रोतो बागची (माइंडट्री के सहसंस्थापक और वर्तमान में अध्यक्ष) और उनके समूह ने अपनी एक व्यापार योजना के साथ मुझसे संपर्क किया। मैंने उनकी तैयार की हुई योजना में सिर्फ तीन छोटे से बदलाव किये जिनमें से एक ने बाद में उनकी कंपनी के अस्तित्व को बचाने में बहुत मदद की। और यकीन मानिये वह जमीन खरीदकर उसपर बुनियादे ढांचे के निर्माण का तो बिल्कुल भी नहीं था। जब डॉटकॉम का बुलबुला फूटा तो हमें बचे-बने रहने और आगे बढ़ने में सिर्फ एक ही चीज ने मदद की ओर वह थी हमारे पास मौजूद नकदी। अगर हमने जमीन खरीदने और निर्माण करने में अपने पैसे को लगा दिया होता तो हमने अपनी आधी से भी अधिक पूंजी से हाथ धो दिया होता। माइंडट्री सिर्फ इसी वजह से बचा रहा क्योंकि उसके पास निवेश का अगला दौर मिलने तक खुद को बनाए रखने के लिये पर्याप्त नकदी मौजूद थी।

3. टाईमिंग मायने रखती है

जब हम माइंडट्री के लिये निवेश जुटाने के दूसरे दौर की तरफ बढ़े तब हमारे पास बैंक में कुछ पैसा जमा था और हमारा बेहतर मूल्यांकन भी हो रहा था हालांकि इस सबके बावजूद हम कुछ शर्तों को लेकर खुश महसूस नहीं कर रहे थे। लेकिन मेरी आंतरिक सूझबूझ की कुछ प्रवृत्तियों ने मुझे आगे बढ़कर इस निवेश को कुबूल करने के लिये राह दिखाई। हमने वैसा ही किया और एक सप्ताह बाद 11 सितंबर को यह हो गया। हालांकि उसके बाद कुछ समय के लिये पैसों का प्रवाह बिल्कुल रुक गया।

4. क्या आप सही व्यवसाय या क्षेत्र में हैं?

जैसा कि मैंने पहले भी कहा है कि आगे बढ़ने के लिये सही स्थान या व्यवसाय में होना भी अत्यधिक महत्वपूर्ण है। एक सपाट से व्यवसाय में आप एक सीमा तक ही प्रगति कर सकते हैं और उसके बाद खुद को आगे बढ़ने के लिये प्रेरित करना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। लेकिन जब आप सही क्षेत्र में होते हो तो आपका व्यवसाय ही आपको आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। भारत में पहले नौजवान के पास पहले कभी बेहतर अवसर नहीं रहा है। वर्तमान समय में आप अवसरों की तरफ अपनी नजरें खुली रखकर अपने करियर को लेकर सचेत होने के अलावा कई अवसरों के बारे में सोच सकते हो। आपको कभी नहीं मालूम होता है कि अवसर आपके सामने कहां से आकर खड़ा हो जाएगा।

मेरी पहली नौकरी में मुझे एक अच्छी तनख्वाह तो मिलती थी लेकिन उसमें सीखने के बहुत कम मौके थे। तो मैंने एक अधिक सीखने वाली नौकरी के बदले में उस नौकरी को छोड़ दिया। मैंने अपने जीवन में हमेशा पैसे और अन्य सुविधाओं को पीछे छोड़ते हुए सीखने को अहमियत दी है। दोबारा आपको बताता चलूं कि विप्रो के साथ जुड़ने से पहले मैं श्रीराम रेफ्रीजरेशन का सफलतापूर्वक संचालन कर रहा था और उस वक्त यह विप्रो के आईटी व्यापार से पांच गुना अधिक बड़ी थी। अपने उस कंपनी के कार्यकाल के दौरान मैं उस घाटे में चल रही कंपनी को एक लाभदायक और अग्रणी कंपनी बनाने में कामयाब रहा था। लेकिन मैंने देखा कि आने वाले समय में आईटी के क्षेत्र में विकास की असीम संभावनाएं हैं।

5. निर्णय लेने की क्षमता

मैं योजना बनाकर काम करने में विश्वास करता हूँ और अपने समय का सूक्ष्म रूप से प्रबंधन करके इसपर अमल करता हूँ। मैंने वर्ष के प्रारंभ में ही चार बोर्ड बैठकों की योजना तैयार कर ली है और ऐसा सिर्फ इसलिये हो पाया कि अगर आप चीजों को आसान बना लेते हैं तो आप एक बड़ी हद तक अपने मन की अस्पष्टता को दूर करने में सफल होते हैं। मेरी अपनी निर्णय लेने की प्रक्रिया दिल, दिमाग और मेरे स्वाभाविक सिद्धांतों पर पूरी तरह निर्भर होती है।

दिमागः अपने प्रश्नों/टिप्पणियों को बड़े समूहों के साथ साझा करें। उसके बाद आप पायेंगे कि भले ही परस्पर विरोधी विचार आपके मन में कौंध रहे हों लेकिन इसके बावजूद सही निर्णय स्वचलित रूप से सामने आने लगेंगे।

दिल: अपने आप से पूछें कि क्या आपका निर्णय समूह में ऊर्जा और प्रसन्नता लाने में सक्षम होगा?

सिद्धांतः अगर आप पांच वर्ष आगे जाकर अपने इस निर्णय को देखें तो आपको इसके बारे में कैसा महसूस होगा?

अगर आपके तीनों जवाब आपस में मेल खा रहे हैं तो आपके लिये एक आसान रास्ते की राह खुली है।

सूटा का इकलौता मंत्र चीजों को बिल्कुल सरल रखना है। वे कहते हैं कि उद्यमशीलता और नेतृत्व को उनके हाल पर छोड़ दो और आपको लगेगा कि सबकुछ कितना आसान हो गया है। उनका मानना है कि अधिकतर लोग वास्तविक खुशी देनी वाली वस्तुओं में पर्याप्त निवेश न करके अपने करियर में अधिक निवेश करते हैं और फिर पीछे पलटकर देखने पर उन्हें अपने किये पर अफसोस होता है।

‘हैप्पिएस्ट माइंड्स’ के बारे में वे कहते हैं, ‘‘हमारी भूमिका लोगों को खुश करने की नहीं है बल्कि खुशी को फैलाने की है ताकि लोग खुश रहने का ही चयन करने में सक्षम हों।’’