जिन्होंने करियर बनाने के लिए शहर से किया गांव का रुख.. मिलिए मोबाइल ऐप के ग्रैंड मास्टर सुरेश केराई से....

- गुजरात के गांव मानकुआ से अपना ऑफिस चला रहे हैं सुरेश- अब तक अपनी फर्म ‘अकॉय ऐप्स’ के जरिए बना चुके हैं 24 ऐप, 10 लाख से ज्यादा हो चुकी है डाउनलोडिंग- गांव की लड़कियों को देते हैं अपने यहां नौकरी

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अक्सर लोग सोचते हैं कि सुनहरे भविष्य के लिए उन्हें बड़े शहरों का रुख करना होगा जहां रहकर वे अपने सपनों की उड़ान पर पंख लगा सकते हैं इसी कारण युवाओं का गांवों से शहरों की तरफ पलायन लगातार जारी है लेकिन गुजरात के सुरेश केराई ने इस मिथक को तोड़ते हुए गुजरात के बड़े शहर अहमदाबाद से अपने गांव मानकुआ का रुख किया वहां अपनी खुद की फर्म शुरू की और कुछ सालों में ही अपने उद्देश्य में सफलता भी प्राप्त की। वे अब तक 24 मोबाइल ऐप बना चुके हैं जिनकी कुल डाउनलोडिंग 10 लाख का आंकड़ा पार कर चुकी है।

किसी भी इंसान की सफलता में उनकी मन की आवाज बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। लेकिन यह भी सच है कि जिंदगी के फैसले इंसान मन से कम दिमाग से ज्यादा लेता है। जब सुरेश केराई के सामने वह मौका आया और उन्हें अपनी नौकरी और मन का काम में से एक कोई चुनना था तो उन्होंने मन की आवाज सुनी और नौकरी छोड़ दी। खूब मेहनत की और आज अपनी पत्नी के साथ मिलकर एक ऐप डेवलपर कंपनी चला रहे हैं।

सुरेश भुज से लगभग बारह किलोमीटर दूर मानकुआ गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने गुजराती माध्यम से अपनी ग्रेजुएशन की और फिर एमसीए किया। लगभग तीन साल तक आईटी क्षेत्र में काम किया जहां उन्होंने मोबाइल ऐप बनाना और उससे जुड़ी कई अन्य बारीकियों को समझा। सन 2012 की बात है उस समय सुरेश अहमदाबाद में काम कर रहे थे इस दौरान उन्होंने फ्रीलांस काम करने की सोची ताकि कुछ ऐसा काम भी कर सकें जो वह करना चाहते हैं और साथ ही थोड़ा पैसा भी कमा सकें। उन्होंने अब क्लाइंट्स को अपना प्रोफाइल दिखाना था इसलिए प्रोफाइल को अच्छा बनाने के लिए उन्होंने विवेकानंद के जीवन और शिक्षाओं पर एक ऐप बनाया। यह ऐप सुरेश ने बनाया तो अपने प्रोफाइल को मजबूत करने के लिए था लेकिन जैसे ही ऐप मार्किट में आया इसे लोगों ने हाथों हाथ लिया। इस ऐप को मिली अपार सफलता के बाद सुरेश ने नौकरी छोड़कर इसी काम में अपना भविष्य तलाशने का फैसला किया और अपने गांव मानकुआ लौट आए।

यह सुरेश का बहुत बड़ा निर्णय था क्योंकि वे अहमदाबाद से गांव लौट रहे थे और आजकल ज्यादातर लोग रोजगार के लिए गांव से शहरों की ओर रुख कर रहे हैं। शुरुआत के लगभग एक साल तक सुरेश ने अपने गांव में अपनी पत्नी के साथ घर से ही काम किया और ऐप बनाना शुरु किया। जब धीरे-धीरे सुरेश को कामयाबी मिलने लगी तो फिर सुरेश ने गांव में ही अपना एक ऑफिस भी खोल लिया।

सुरेश अधिकतर एजुकेशन ऐप ही बनाते हैं। जिसमें एजुकेशनल क्विज़ गेम ऐप मुख्य रूप से होते हैं। यह ऐप ऐसे होते हैं जिन्हें आप अपने दोस्तों के साथ खेल सकते हैं।

सुरेश अपनी फर्म ‘अकॉय ऐप्स’ को गांव से ही चला रहे हैं। उनके ऑफिस में आठ लड़कियां काम करती हैं। उन्होंने अपने गांव की लड़कियों को ही नौकरी पर क्यों रखा, लड़कों को क्यों नहीं रखा? इस पर सुरेश बताते हैं कि अक्सर ऐसा होता है कि आज के माता-पिता शिक्षा तो अब बेटा-बेटी दोनों को समान रूप से देने की कोशिश कर रहे हैं और कई माता-पिता दे भी रहे हैं लेकिन जब भविष्य में अपने पैरों पर खड़ा होने की बारी आती है तो वे लड़के को तो शहर जाकर नौकरी करने की परमीशन दे देते हैं लेकिन लड़की को नौकरी के लिए शहर नहीं जाने दिया जाता। इस प्रकार गांव में कई ऐसी लड़कियां हैं जो अच्छी पढ़ी-लिखी और टेलेन्टिड होने के बाद भी नौकरी नहीं कर पा रही हैं। ऐसे में मैंने कोशिश की है कि मैं ज्यादा से ज्यादा लड़कियों को रोजगार देने का प्रयास करूं।

सुरेश इन लड़कियों को खुद ट्रेनिंग देते हैं। सुरेश के पास अच्छे कंटेंट राइटर, डेवलपर और डिज़ाइनर सभी लोग हैं। यह लोग ऐप सर्विसेज भी देते हैं।

आज सुरेश की फर्म में आठ लड़कियां हैं। और कंपनी अब तक 24 मोबाइल ऐप बना चुकी है। यह लोग तीन भाषाओं में ऐप बनाते हैं जिनमें गुजराती, हिंदी और अंग्रेजी भाषा शामिल है। इनके बनाए सभी ऐप का डाउनलोड अब तक कुल मिलाकर दस लाख से ज्यादा का आंकड़ा पार कर चुका है। सुरेश बताते हैं कि हम लोगों का मेन फोकस एजुकेशनल ऐप बनाना है ताकि बच्चों व प्रवेश परीक्षा में बैठने वाले छात्रों को हमारे ऐप से लाभ मिल सके।

बच्चों के लिए इनकी एक ऐप 'किंडर गार्डन फन’ की दो लाख से ज्यादा डाउनलोडिंग है। 'जीके इन गुजराती ‘ ऐप को ढाई लाख से ज्यादा लोगों ने डाउनलोड किया है। अभी छह माह पहले इनका नया ऐप 'जीके इन हिंदी ‘ लॉच हुआ है जिसे अबतक एक लाख तीस हजार से ज्यादा बार डाउनलोड किया जा चुका है।

सुरेश बताते हैं कि हम लोग अपने ऐप को नियमित रूप से अपडेट भी करते रहते हैं। इनकी ऐप की खासियत यह है कि इन ऐप क्विज़ को आप अपने दोस्तों के साथ मोबाइल पर एक साथ खेल भी सकते हैं। उसी समय आपके सामने क्विज़ गेम का रिजल्ट भी आ जाता है। इसके लिए इन लोगों ने गूगल गेम सर्विस का उपयोग किया है।

अपने अब तक के सफर में थोड़ी बहुत मुश्किलें तो सुरेश को जरूर आईं क्योंकि वे अपनी अच्छी लगी लगाई नौकरी छोड़कर गांव चले गए थे। इसलिए थोड़ा आर्थिक संकट के दौर से गुजरना स्वभाविक था लेकिन परिवार के साथ और खुद पर विश्वास ने सुरेश के हौंसलों को कभी कम नहीं होने दिया। सुरेश जानते थे कि आज नहीं तो कल उन्हें अपने काम में अच्छी सफलता मिलेगी। इसलिए उन्हें बस अपना फोकस अपने काम पर केंद्रित रखना है।

भविष्य में भी सुरेश एजुकेशन सेक्टर से जुड़ी ही नई-नई ऐप बनाना चाहते हैं और युवाओं को गाइड करना चाहते हैं। सुरेश एप्पल और एडंरॉयड के लिए ऐप बनाते हैं। साथ ही सुरेश अपने काम का विस्तार कर और भी पढ़ी-लिखी लड़कियों को रोजगार देना चाहते हैं।