अंटार्कटिका के स्पेस सेंटर में 1 साल से भी ज़्यादा वक़्त बिताने वाली पहली महिला बनीं मंगला मनी

भारतीय रिसर्च सेंटर में एक साल से भी अधिक वक्त बिताने वाली पहली भारती महिला बनीं मंगला मनी... 

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मंगला मनी, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की पहली महिला वैज्ञानिक बन चुकी हैं, जिन्होंने अंटार्कटिका स्थित भारतीय रिसर्च सेंटर में एक साल से भी अधिक वक़्त बिताया। मिशन पर जाने से पहले इन्होंने स्नोफॉल जैसी चीज़ भी नहीं देखी थी और हद से ज्यादा ठंडी जगह पर इन्हें वहां बिताने पड़े 403 दिन, जहां न्यूनतम तापमान जाता है -90 डिग्री सेल्सियस तक...

इसरो ने नवंबर 2016 में अपनी 23 सदस्यीय टीम अंटार्कटिका भेजी थी। टीम को एक अभियान के तहत अंटार्कटिका में भारत के रिसर्च स्टेशन (भारती) भेजा गया था। आपको बता दें कि 23 सदस्यों की इस टीम में मंगला मनी, अकेली महिला थीं और टीम के बाक़ी सदस्यों को वह इस अभियान से पहले जानती तक नहीं थीं।

पिछले कुछ दशकों में हमने देखा है कि महिलाएं अब हर क्षेत्र में नई मिसाल कायम कर रही हैं। घरेलू महिला से ऑन्त्रप्रन्योर बनना हो या फिर अपनी तकनीकी योग्यता से विज्ञान के क्षेत्र में नए मुकाम गढ़ना, महिलाएं लगातार कीर्तिमान रच रही हैं। क्या आप मंगला मनी के बारे में जानते हैं? मंगला मनी, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की पहली महिला वैज्ञानिक बन चुकी हैं, जिन्होंने अंटार्कटिका स्थित भारतीय रिसर्च सेंटर में एक साल से भी अधिक वक़्त बिताया।

मिशन से पहले स्नोफ़ॉल तक नहीं देखा

इसरो ने नवंबर 2016 में अपनी 23 सदस्यीय टीम अंटार्कटिका भेजी थी। टीम को एक अभियान के तहत अंटार्कटिका में भारत के रिसर्च स्टेशन (भारती) भेजा गया था। आपको बता दें कि 23 सदस्यों की इस टीम में मंगला मनी, अकेली महिला थीं और टीम के बाक़ी सदस्यों को वह इस अभियान से पहले जानती तक नहीं थीं। इतना ही नहीं, अंटार्कटिका जाने से पहले मंगला मनी ने कभी स्नोफ़ॉल तक नहीं देखा था और उन्होंने 50 साल की उम्र का पड़ाव पार करने के बाद, एक ऐसी जगह पर 403 दिन बिताए, जहां पर न्यूनतम तापमान -90 डिग्री सेल्सियस तक जाता है। मनी ने दिसंबर 2017 में अपना मिशन सफलतापूर्वक पूरा किया।

बीबीसी, विज्ञान में महिलाओं की भूमिका और योगदान पर एक श्रृंखला तैयार कर रहा है, जिसमें मंगला मनी की कहानी भी शामिल है। अंटार्कटिका में भारत के रिसर्च सेंटर में वह ग्राउंड स्टेशन के ऑपरेशन और प्रबंधन संभाल रही थीं। मंगला और उनकी टीम ने अंटार्कटिका से जो सेटेलाइट डेटा इकट्ठा किया, उसे भारत को ट्रांसफ़र किया जाएगा और बाद में उसकी प्रोसेसिंग होगी।

साथियों ने दिया पूरा सहयोग

टाइम्स ऑफ़ इंडिया से बात करते हुए मंगला ने बताया कि उनके टीम सदस्यों ने उन्हें भरपूर सहयोग दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी सदस्य ने उन्हें असहज महसूस नहीं होने दिया। मंगला ने बताया कि अंटार्कटिका में उन्हें पोलर क्लोदिंग का सहारा लेना पड़ता था। उन्होंने जानकारी दी कि वहां के माहौल में एक बार में 2 से 3 घंटे बिताना पर्याप्त होता था और इतने वक़्त के बाद उन्हें कैंप में वापस लौटकर वॉर्म-अप करना पड़ता था। 2016-17 में रूस और चीन के अर्थ स्टेशन्स में भी किसी महिला सदस्य को जगह नहीं मिली थी।

मेंटल-फिजिकल टेस्ट पार कर बनी एक अच्छी टीम

इस अभियान पर जाने से पहले मंगला ने फिजिकल और मेंटल टेस्ट पार किया। एम्स दिल्ली में उनका फुल मेडिकल चेकअप हुआ। इसके बाद वह टीम के साथ उत्तराखंड के चमोली जिले और बद्रीनाथ के दौरे पर गईं, ताकि वे ठंड में अपनी शरीर की क्षमता को परख सकें। मंगला और उनकी टीम को उत्तराखंड में ट्रैकिंग की एक्ससाइज़ भी कराई गई, जिसमें उन्हें पर्याप्त वजन साथ में लेकर ट्रैकिंग करनी पड़ती थी। मंगला मनी ने बताया कि ये सभी टेस्ट न सिर्फ़ अंटार्कटिका के लिए उनकी टीम को फिजिकली और मेंटली तैयार करने के लिए थे, बल्कि मिशन के लिए उनके अंदर टीम स्पिरिट पैदा करने के लिए भी थे।

औरों के लिए बनीं मिसाल

अंग्रेज़ी अखबार द हिंदू से बात करते हुए मंगला ने कहा कि अब हर क्षेत्र में महिलाओं का दखल है और महिलाएं नए कीर्तिमान रच रही हैं। उन्होंने सभी महिलाओं को संदेश देते हुए कहा कि उन्हें अपनी इच्छाशक्ति को मज़बूत रखने और अच्छे मौके का इंतज़ार करने की ज़रूरत है। मंगला मनी से प्रेरित होकर, इसरो की एक युवा महिला वैज्ञानिक अंटार्कटिका मिशन पर जाने के लिए स्वेच्छा से आगे आईं और फ़िलहाल वह अंटार्कटिका स्थित भारत के रिसर्च सेंटर, भारती पर कैंपिंग कर रही हैं। उन्हें उम्मीद है कि वह वहां पर एक साल से अधिक समय तक रुककर मिशन को पूरा करेंगी।

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