स्वच्छ भारत के लिए एक और कदम, अब कूड़ेदान का इस्तेमाल करने पर मिलेगी वाईफाई की सुविधा

0

क्या आप इस बात पर यकीन करेंगे की कोई कूड़ादान आपको वाई-फाई जैसी सुविधा भी दे सकता है और वो भी झटपट। इसके लिए बस आपको अपने पास रखे कूड़े को उसमें डालना होगा। ऐसा करते ही आपके फोन का वाई-फाई तुरंत चालू हो जाएगा। इस तरह की सुविधा को शुरू करने जा रही है कोलकाता की कंपनी ग्रीन क्लीन इंडिया। कंपनी के संस्थापकों का कहना है कि वो इस प्रोजेक्ट की शुरूआत कोलकाता से करेंगे लेकिन जल्दी ही पुणे और बेंगलुरू जैसे दूसरे शहरों में इस तरह के कूड़ेदान लगाये जाएंगे। फिलहाल कंपनी ने साधारण किस्म के डस्टबिन अलग अलग जगहों पर अपने खर्चे से लगा रही है ताकि लोगों को सफाई को लेकर जागरूक किया जा सके।

“हम सब लोग सफाई की बात तो करते हैं लेकिन इसके लिए कोई जिम्मेदारी उठाने के तैयार नहीं है। हर पंद्रह दिन में झाडू लेकर सफाई करने से देश साफ नहीं होगा। जबकि जरूरत है कि जहां पर कूड़ेदान हैं उनका सही इस्तेमाल किया जाये और जहां पर वो लगे हैं उनमें से ज्यादातर का इस्तेमाल नहीं हो सकता।” 

ये कहना है कि ग्रीन क्लीन इंडिया के सह-संस्थापक जॉय का। इसी बात को ध्यान में रखते हुए ग्रीन क्लीन इंडिया अलग अलग जगहों पर कूडेदान लगाने का काम कर रही है जिसकी देखभाल का खर्चा भी वो खुद उठाते हैं। जिनको कंपनी एडबिंस नाम से पुकारती है। अब तक ग्रीन क्लीन इंडिया कंपनी के तहत कोलकाता के 15 रेजिडेंट सोसायटी में ऐसे एडबिंस लगाने का काम पूरा कर चुकी है। साधारण किस्म के ये एडबिंस पीले रंग को होते हैं। इसकी खास वजह ये है कि पीला रंग दूर से नजर आता है। इनके बाहर जहां किसी कंपनी का प्रचार होता है वहीं इनका इस्तेमाल कूड़ा डालने के लिये किया जाता है। इन एडबिंस को लोहे के स्टेंड में रखा जाता है। ताकि इनमें कूड़ा डालने और उससे कूड़ा बाहर निकालने में आसानी हो साथ ही उनकी आसानी से साफ सफाई भी की जा सके। कंपनी की योजना इस तरह के एडबिंस शहर के दूसरी जगहों पर लगाने की है। कंपनी के सह-संस्थापक का कहना है कि एक एडबिंस को लगाने में 4 से 5 हजार रुपये तक का खर्चा आता है। जिसे वो विज्ञापन के जरिये होने वाली आय से पूरा करते हैं।

कंपनी के सह-सस्थापक अंकित जहां चार्टड अकाउंटेंट हैं वहीं जॉय ऑटोमोबाइल इंजीनियर हैं। इस काम को शुरू करने से पहले अंकित और जॉय दोनों अच्छे दोस्त थे और दोनों ने तय किया था कि वो सफाई को लेकर कुछ करेंगे लेकिन क्या करना है वो ये नहीं जानते। इस बीच एक दिन जॉय अपने घर से पैदल कहीं जा रहे थे और उनके हाथ में चाय का एक खाली कप था जिसे वो उसे कहीं फेंकना चाहते थे लेकिन ऐसा करने के लिए उनको कहीं भी डस्टबिन नहीं मिल रहा था। जिसके बाद उन्होने फैसला लिया कि वो शहर की साफ सफाई के लिये डस्टबिन लगाएंगे। जॉय का कहना है कि सरकार से मदद ना मिल पाने के कारण वो सड़कों पर इस तरह के डस्टबिन नहीं लगा पा रहे हैं लेकिन विभिन्न रेजिडेंट सोसायटी में उनको अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। 

कंपनी के सह-संस्थापक जॉय का कहना है कि वो एक नई तरह की तकनीक पर काम कर रहे हैं। जिसके जरिये इन डस्टबिन का इस्तेमाल जहां वाई फाई के लिये किया जा सकेगा। इसके लिये जब कोई व्यक्ति इसमें कूड़ा डालेगा तो एक ओटीपी पासवर्ड कूड़ा फेंकने वाले के मोबाइल में आ जाएगा। जिसके बाद वो व्यक्ति आसानी से इंटरनेट का इस्तेमाल कर सकेगा। वहीं दूसरी ओर कूड़ेदान में कितना कूड़ा इकट्ठा हो गया है इसकी भी जानकारी रखी जा सकेगी। इस बात की जानकारी इसमें लगे सेंसर बताएंगे। कंपनी की योजना खास तरह के इन डस्टबिन को रेलवे स्टेशन, मेट्रो स्टेशन, बस स्टॉप, स्कूल, कॉलेज, पार्क और दूसरे सार्वजनिक स्थानों पर लगाने की है। इस योजना की शुरूआत कोलकाता से होगी लेकिन इसके बाद इस तरह के डस्टबिन पुणे और बेंगलुरू जैसे शहरों में भी लगाने की है।

ग्रीन क्लीन इंडिया सबसे पहले कोलकाता में वाई फाई डस्टबिन लगाने का काम शुरू करेगी और वो ये काम इस साल जून में शुरू करेंगे, जबकि दूसरे शहरों में इस तरह के डस्टबिन साल के अंत तक लगाने का काम किया जाएगा। जॉय का कहना है कि 

“हम चाहते हैं कि सड़क के हर कोने में डस्टबिन हो, लोगों में इस बात की आदत डालनी है कि वो डस्टबिन का इस्तेमाल करें। सिर्फ बात करने से सफाई नहीं होगी।”

ऐसी ही और प्रेरणादायक कहानियाँ पढ़ने के लिए हमारे Facebook पेज को लाइक करें

अब पढ़िए ये संबंधित कहानियाँ:

बीमारी की वजह से नौकरी जाने के बाद भी हिम्मत नहीं हारी, ईको टूरिज्म से रोज़गार बढ़ा रहा है एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर

'मन की बात' ने बदल दी इस 'तिकड़ी' की किस्मत, नौकरी करने के बजाय अब दूसरों को दे रहे हैं रोजगार

11वीं में पढ़ने वाले छात्र ने सच किया मोदी के 'मेक इन इण्डिया' का सपना

यदि आपके पास है कोई दिलचस्प कहानी या फिर कोई ऐसी कहानी जिसे दूसरों तक पहुंचना चाहिए, तो आप हमें लिख भेजें editor_hindi@yourstory.com पर। साथ ही सकारात्मक, दिलचस्प और प्रेरणात्मक कहानियों के लिए हमसे फेसबुक और ट्विटर पर भी जुड़ें...

I would like to quote myself as ‘a writer by chance’, as fate wants me to write. Now, writing has become my passion, my child, my engagement, and my contentment. Worked as a freelance writer in gathering social and youth oriented real stories.

Related Stories

Stories by Geeta Bisht