बच्चों को किताबों से जोड़ने की पहल, 24 घंटे खुला रहता है यह फ्री बुक स्टैंड

गुड़गांव में शुरू हुई एक अनोखी लाईब्रेरी...

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किताबों का यह मिनी स्टोर कुछ समय पहले ही सोसायटी के लोगों की ओर से लगाया गया है। यहां बच्चों से लेकर सीनियर सिटिजन का रुझान देखने को मिल रहा है। लोग यहां किताबें रखने के साथ-साथ अन्य लोगों को भी प्रेरित कर रहे हैं। 

सोसाइटी में लगा मिनी बुक स्टैंड
सोसाइटी में लगा मिनी बुक स्टैंड
हालांकि बदलते दौर में लोग ई-बुक्स की ओर भी बढ़ गए हैं, लेकिन जो लोग टेक्नो फ्रेंडली नहीं हैं और अभी भी किताबों का शौक रखते हैं, उनके लिए यह लाइब्रेरी काफी फायदेमंद साबित होगी।

स्टैंड का दरवाजा सभी के लिए खुला रहता है। इसका मकसद है कि सबसे पहले जरूरतमंद बच्चों को बुक्स मिले।

डिजिटल क्रांति के आने के बाद हमारे समाज में जैसे किताबों की अहमियत कुछ घट सी गई है, नहीं तो एक जमाने में जिसके पास देखो किताबों का खजाना हुआ करता था। इसी डिजिटाइजेशन का ही असर है कि बच्चे बुक की बजाय फेसबुक के साथ रहना ज्यादा पसंद करते हैं। बच्चों को किताबों की दुनिया से वापस जोड़ने के लिए गुड़गांव की एक सोसाइटी ने पहल की है। सेक्टर 54 की सनसिटी में दो ओपन मिनी बुक्स स्टैंड बनाए गए हैं, जहां किताबों के शौकीनों को पढ़ने के लिए फ्री में किताबें मिलेंगी। यहां से किताबें घर भी ले जा सकते हैं।

किताबों का यह मिनी स्टोर कुछ समय पहले ही सोसायटी के लोगों की ओर से लगाया गया है। यहां बच्चों से लेकर सीनियर सिटिजन का रुझान देखने को मिल रहा है। लोग यहां किताबें रखने के साथ-साथ अन्य लोगों को भी प्रेरित कर रहे हैं। इस सोसायटी में रहने वाले एक शख्स विकास ने बताया कि खाली समय में किताबें सबसे अच्छा साथ निभाती हैं। किताबें केवल ज्ञान ही नहीं देतीं, बल्कि अच्छा साथी साबित होती हैं। हालांकि बदलते दौर में लोग ई-बुक्स की ओर भी बढ़ गए हैं, लेकिन जो लोग टेक्नो फ्रेंडली नहीं हैं और अभी भी किताबों का शौक रखते हैं, उनके लिए यह लाइब्रेरी काफी फायदेमंद साबित होगी।

आपको शायद याद हो कि कुछ समय पहले ही इसी सोसाइटी में एक ग्रुप ने कम्यूनिटी फ्रिज लगाया था। जहां लोग अपने घर में बची हुई खाद्य सामग्री लाकर रख देते हैं और वहां आस-पास रहने वाले भूखे गरीब लोग उसे निकालकर खा सकते हैं। उस पहल को काफी सराहा जा रहा है। उसी से प्रभावित होकर यह मिनी बुक स्टैंड बनाया गया है। इसमें कहानी, उपन्यास, कॉमिक्स, शॉर्ट स्टोरी, कविता, ड्रॉइंग और पेंटिंग्स समेत कई किताबें रखी गईं हैं। सोसायटी के एक पदाधिकारी सुरेश शर्मा ने बताया कि स्टैंड का दरवाजा सभी के लिए खुला रहता है। इसका मकसद है कि सबसे पहले जरूरतमंद बच्चों को बुक्स मिले।

सोसायटी में रहने वाले ब्रजेश का कहना है कि यहां सोसाइटी से बाहर के बच्चे भी आते हैं और मनपसंद किताबें लेकर जाते हैं। बुक्स स्टैंड में किताबों के आदान-प्रदान पर वक्त की कोई पाबंदी नहीं है। यह स्टैंड सभी दिन 24 घंटे खुला रहता है। यही नहीं जो यहां से किताबें ले जाते हैं, उन पर तय समय सीमा में किताब पढ़कर लौटाने का कोई दबाव नहीं रहता। किताबों के शौकीनों के लिए यह अच्छी पहल है। इसे शहर के अन्य लोगों को भी अपनाना चाहिए और दूसरी सोसायटीज में इस तरह के स्टैंड बनने चाहिए। इस स्टैंड से बच्चों को भी सीखने को मिलेगा कि किताबों से अच्छा कोई दोस्त नहीं होता।

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