इस स्टार्टअप के बारे में जानकर बदल जाएगा अंडरवियर शॉपिंग का नज़रिया

XYXX एक ऐसा ऑनलाइन ब्रैंड, जो रखता है पुरुषों की ज़रूरतों का ख़ास खयाल...

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योगेश का परिवार सूरत में फ़ैब्रिक का ही बिज़नेस करता है। उनकी कंपनी पूरे भारत से फ़ैब्रिक मंगा कर, सूरत में अपने ग्राहकों को बेचती है। योगेश ने अपने ब्रैंड की शुरूआत अपने पिता जी के ऑफ़िस से की थी। जल्द ही उनकी पत्नी हर्षिता भी उनके साथ बिज़नेस में हाथ बंटाने लगीं।

टीम (XYXX)
टीम (XYXX)
पिछले साल जनवरी से ब्रैंड ने ऑनलाइन मार्केटप्लेस में कदम रखा था और कंपनी का दावा है कि उनकी मासिक विकास दर 50 प्रतिशत की रही है। फ़िलहाल, कंपनी हर महीने 9,000 यूनिट्स बेच लेती है और ऑनलाइन माध्यम से 20 लाख रुपए का रेवेन्यू पैदा कर रही है।

स्टार्टअप: XYXX
फ़ाउंडर: योगेश काबरा
जगह: सूरत
शुरूआत: 2017
फ़ंडिंग: बूटस्ट्रैप्ड

आज हम बात करने जा रहे हैं सूरत आधारित स्टार्टअप एक्सवायएक्सएक्स (XYXX) की, जो एक ऑनलाइन मेन्स अंडरवियर ब्रैंड है। 2017 में शुरू हुए इस ब्रैंड के फ़ाउंडर हैं योगेश काबरा। योगेश बताते हैं, "एक बार मैंने अपने दोस्त से पूछा कि एक पुरुष के लिए सबसे अच्छा तोहफ़ा क्या हो सकता है। उसने बिना देर किए जवाब दिया, 'अंडरगार्मेंट्स'। हमारे पास अक्सर इनकी कमी होती है। हम या तो इन्हें खो देते हैं या फिर लंबे समय तक इस्तेमाल करते रहते हैं।"

योगेश ज़ोर देते हुए कहते हैं कि ऐसा सिर्फ़ उनके दोस्तों के ही साथ नहीं है, बल्कि ज़्यादातर पुरुषों के साथ होता है। ब्रिटिश मल्टीनैशनल रीटेलर डेबेनहैम्स की रिपोर्ट के मुताबिक़, ज़्यादातर पुरुष तब ही नए अंडरवियर ख़रीदते हैं, जब या तो वे रिलेशनशिप में हो या फिर उनका रिलेशनशिप शुरू होने वाला हो। योगेश काबरा इस रिपोर्ट से सहमत हैं।

योगेश मानते हैं कि मार्केट रिसर्च करने पर उन्हें पता चला कि इस सेगमेंट में पुरुषों के लिए विकल्पों की काफ़ी कमी है और आमतौर पर उन्हें कम्फ़र्ट के साथ समझौता करना पड़ता है। जहां पर कम्फ़र्ट का फ़ैक्टर पूरा होता है, वहां चीज़ों के दाम बढ़ जाते हैं। योगेश ने अपने ब्रैंड की मदद से इन सभी चुनौतियों को दूर करने का फ़ैसला लिया। योगेश अमेरिका में अपना पोस्ट-ग्रैजुएशन ख़त्म करके लौटे ही थे। भारत आकर उन्हें पता चला कि यहां के बाज़ार में अंडरगार्मेंट्स के लिए विकल्पों की भारी कमी है। योगेश कहते हैं कि आमतौर पर मल्टी-ब्रैंड स्टोर्स पर पुराने डिज़ाइन्स और बेकार फ़ैब्रिक के अंडरगार्मेंट्स मिलते और बड़े ब्रैंड्स की रेंज 700 रुपए के पार चली जाती है। योगेश कहते हैं कि ऊपर के कपड़ों के लिए उन्हें बहुत ज़्यादा अपेक्षा नहीं रहती, लेकिन अंडरगार्मेंट्स बेहद आरामदायक और अच्छे फ़ैब्रिक वाले होने ही चाहिए।

योगेश का परिवार सूरत में फ़ैब्रिक का ही बिज़नेस करता है। उनकी कंपनी पूरे भारत से फ़ैब्रिक मंगा कर, सूरत में अपने ग्राहकों को बेचती है। योगेश ने अपने ब्रैंड की शुरूआत अपने पिता जी के ऑफ़िस से की थी। जल्द ही उनकी पत्नी हर्षिता भी उनके साथ बिज़नेस में हाथ बंटाने लगीं। धीरे-धीरे दोनों ने अपने ब्रैंड के लिए 10 लोगों को हायर कर लिया। योगेश की पत्नी हर्षिता पहले ऐक्सिस बैंक के साथ बतौर ऐनालिस्ट काम करती थीं और उन्होंने अकाउंटिंग और फ़ाइनैंस में मास्टर डिग्री ली है।

योगेश बताते हैं, "हमारा घरेलू बिज़नेस ही टेक्सटाइल का है तो हमारे घर में हमेशा तरह-तरह के फ़ैब्रिक्स की बातें होती रहती थीं। मेरे पिता जी फ़ैब्रिक्स और उनकी गुणवत्ता को लेकर काफ़ी गंभीर रहते हैं। यही वजह रही कि इस क्षेत्र में बिज़नेस शुरू करने के साथ ही, मेरे पास पर्याप्त जानकारी और अनुभव भी था।"

योगेश बताते हैं कि अंडरवियर बनाना काफ़ी जटिल है क्योंकि कारीगर के पास अच्छी क्वॉलिटी को बनाए रखने के लिए कम से कम एक साल का अनुभव होना चाहिए। योगेश कहते हैं कि भारत में जितने भी बड़े अंडरगार्मेंट्स मैनुफ़ैक्चरर हैं, उनमें से ज़्यादातर अपने ब्रैंड नेम के साथ ही प्रोडक्ट बेच रहे हैं और वे थर्ड-पार्टी वेंडर्स के साथ काम नहीं करते। इस वजह से सही वेंडर की तलाश करना भी अपने आप में काफ़ी चुनौतीभरा काम है। शुरूआती दिनों की चुनौतियां गिनाते हुए योगेश ने बतौर स्टार्टअप मिनिमम ऑर्डर क्वॉन्टिटी की समस्या भी बताई।

योगेश कहते हैं कि उनकी कंपनी ने ज़्यादातर काम जुगाड़ से पूरे किए। उन्होंने बताया कि शुरूआत में टीम ने तय किया कि सिर्फ़ हाई स्टैंडर्ड्स वाली यूनिट्स पर ही काम किया जाएगा। योगेश ने बताया कि उनके ब्रैंड के सभी गार्मेंट्स स्थानीय समुदायों की महिलाएं बनाती हैं। अंडरगार्मेंट्स के सेगमेंट में ऑनलाइन मार्केटप्लेस की संभावनाओं के बारे में चर्चा करते हुए योगेश कहते हैं कि यह कोई आकर्षक कैटेगरी नहीं है। ज़्यादातर ग्राहक भी तरह-तरह के फ़ैब्रिक्स और स्टाइल्स से परिचित नहीं रहते हैं। उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि उनका ब्रैंड इनरवियर्स के लिए माइक्रो-मॉडल फ़ैब्रिक का इस्तेमाल करता है और यह फ़ैब्रिक ऑस्ट्रिया में पाए जाने वाले बीचवुड पेड़ों से निकाला जाता है; यह आमतौर पर ऐंटी-माइक्रोबियल होता है और भारतीय मौसम के हिसाब से बिल्कुल उपयुक्त होता है।

पिछले साल जनवरी से ब्रैंड ने ऑनलाइन मार्केटप्लेस में कदम रखा था और कंपनी का दावा है कि उनकी मासिक विकास दर 50 प्रतिशत की रही है। फ़िलहाल, कंपनी हर महीने 9,000 यूनिट्स बेच लेती है और ऑनलाइन माध्यम से 20 लाख रुपए का रेवेन्यू पैदा कर रही है। योगेश के ब्रैंड की प्रोडक्ट रेंज 199 रुपए से लेकर 499 रुपए तक है, जो स्टाइल के ऊपर निर्भर करती है।

योगेश अपने ब्रैंड के पोर्टफ़ोलियो में लॉन्ज और स्लीपवियर प्रोडक्ट्स को भी जोड़ना चाहते हैं। योगेश के ब्रैंड को चेन्नई आधारित 'बट टॉक्स' ब्रैंड से कड़ा कॉम्पिटिशन मिल रहा है, जो एक सब्सक्रिप्शन आधारित मेन्स अंडरवियर ब्रैंड है। योगेश ने बताया कि उनका ब्रैंड जल्द ही टी-शर्ट्स की एक रेंज लॉन्च करने जा रहा है, जो दुर्लभ सुपीमा कॉटन से बनी हैं।

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