क्षेत्रीय भाषाओं में अंग्रेजी सिखा रहा है 'मल्टीभाषी' एप

सीखनी है अंग्रेजी, तो इस ऐप को करें डाउनलोड...

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मातृभाषा सबको प्यारी होती है लेकिन अपनी अंतर्राष्ट्रीय मांग की वजह से अंग्रेजी हर जगह तेजी से फैल रही है। कोई भी भाषा सीखना बड़ी बात है। भारत के समाज में सामाजिक-आर्थिक स्थिति लगभग अंग्रेजी में अभिव्यक्त होती है और लाखों लोगों के लिए इस भाषा की प्रवीणता, समृद्धि की कुंजी के रूप में देखी गई है।

साभार: यूट्यूब
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लोगों की आकांक्षाओं को आर्थिक रूप से प्रेरित करने के लिए और अंग्रेजी सिखाने के लिए अनुराधा अग्रवाल ने मल्टीभाषा नामक एप की स्थापना की। यह एक ऑनलाइन भाषा-शिक्षण मंच है जो लोगों को हिंदी, बांग्ला, तमिल, तेलुगू और कन्नड़ जैसे प्रमुख भारतीय भाषाओं के माध्यम से अंग्रेजी सिखाने में मदद करता है।

तकनीक के माध्यम से भाषा सिखाना आसान नहीं है लेकिन अग्रवाल का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों में मोबाइल फोन के बढ़ते उपयोग और इंटरनेट कनेक्टिविटी में भारी वृद्धि ने अंग्रेजी सीखने के प्लेटफार्मों के लिए तगड़ी मांग आई है। हम मुख्य रूप से उन लोगों पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो पिरामिड के नीचे हैं। हम उन्हें खुद को ऊपर उठाने और अपने रोजगार में सुधार लाने में मदद करते हैं। 

मातृभाषा सबको प्यारी होती है लेकिन अपनी अंतर्राष्ट्रीय मांग की वजह से अंग्रेजी हर जगह तेजी से फैल रही है। कोई भी भाषा सीखना बड़ी बात है। भारत के समाज में सामाजिक-आर्थिक स्थिति लगभग अंग्रेजी में अभिव्यक्त होती है और लाखों लोगों के लिए इस भाषा की प्रवीणता, समृद्धि की कुंजी के रूप में देखी गई है। लोगों की आकांक्षाओं को आर्थिक रूप से प्रेरित करने के लिए और अंग्रेजी सिखाने के लिए अनुराधा अग्रवाल ने मल्टीभाषा नामक एप की स्थापना की। यह एक ऑनलाइन भाषा-शिक्षण मंच है जो लोगों को हिंदी, बांग्ला, तमिल, तेलुगू और कन्नड़ जैसे प्रमुख भारतीय भाषाओं के माध्यम से अंग्रेजी सिखाने में मदद करता है।

तकनीक के माध्यम से भाषा सिखाना आसान नहीं है लेकिन अग्रवाल का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों में मोबाइल फोन के बढ़ते उपयोग और इंटरनेट कनेक्टिविटी में भारी वृद्धि ने अंग्रेजी सीखने के प्लेटफार्मों के लिए तगड़ी मांग आई है। हम मुख्य रूप से उन लोगों पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो पिरामिड के नीचे हैं। हम उन्हें खुद को ऊपर उठाने और अपने रोजगार में सुधार लाने में मदद करते हैं। अंग्रेजी बोलते हुए उनमें आत्मविश्वास बहाल हो जाता है।

इतने विविध भाषाओं के देश में 2 आधिकारिक भाषाएं हैं, हिंदी और अंग्रेजी। अंग्रेजी केवल भाषाई समानता की वजह से शहरी परिवारों में तेजी से मातृभाषा बनती जा रही है। अनुराधा को मल्टीभाषा शुरू करने के लिए आइडिया तब आया जब कुछ साल पहले उनके कुछ परिवार के सदस्यों और दोस्तों ने (जिन्हें हिंदी के माध्यम से शिक्षा के माध्यम से स्कूलों में शिक्षित किया गया था) स्वीकार किया कि वे अंग्रेजी में बातचीत करने के लिए कम आत्मविश्वास महसूस करते थे। अनुराधा ने हर रोज़ भाषा की जरूरतों पर सोशल मीडिया पर बाइट-आकार के एनिमेशन पोस्ट करना शुरू कर दिया था जैसे कि फोन पर कैसे बात करनी है और रेस्तरां में भोजन देने के लिए सुझाव दिए।

मल्टीभाषा की संस्थापक अनुराधा
मल्टीभाषा की संस्थापक अनुराधा

मल्टीभाषा एप तेजी से लोकप्रिय हो गया। भारत में सबसे अधिक चीजों की तरह, अंग्रेजी की दक्षता भी विभिन्न सामाजिक-आर्थिक समूहों में असमान रूप से वितरित की जाती है। आबादी का लगभग 12% या 125 मिलियन लोगों का है, जिसके अगले दशक में चौगुनी होने की संभावना है। अग्रवाल एक कंप्यूटर इंजीनियर और प्रबंधन स्नातक हैं। और वो इसे बड़े पैमाने पर बाजार में लाना चाहती थीं। अपने अनुभवों का उपयोग करते हुए उन्हें इंटरैक्टिव पाठ्यक्रमों के साथ एंड्रॉइड और वेब एप्लिकेशन विकसित करने के लिए चार महीने का समय लगा। यह एप मुख्य रूप से प्रारंभिक चरण की भाषा सीखने पर ध्यान केंद्रित करता है। एप एक मिश्रित दृष्टिकोण प्रदान करता है जहां उपयोगकर्ता को स्वयं-सीखने के साथ-साथ चैट, कॉल और वीडियो सत्रों में एक-एक पर ट्यूटर के साथ सीखने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। लगातार प्रतिक्रिया भी सीखने की यात्रा का एक अभिन्न अंग है।

सिर्फ एक साल में ऐप के 130,000 से ज्यादा डाउनलोड हो गए हैं और यूज़र बेस 40% की दर से मासिक बढ़ रहा है। गूगल और केपीएमजी की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में ऑनलाइन शिक्षा अगले पांच सालों में लगभग आठ गुना बढ़ेगी और इसका एडिट मार्केट पर काफी प्रभाव पड़ेगा। जिसकी 2021 तक 1.96 अरब डॉलर तक पहुंचने की क्षमता है। आज भारत में एडटेक बाजार 247 मिलियन अमरीकी डॉलर का है।

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