15 साल के गरीब बच्चे ने बनाई कचरा उठाने की गाड़ी, इंजीनियर बनने की है तमन्ना

नंगे हाथों से सफाई करके बच्चों को न हो जाये कोई बिमारी, इसलिए 15 वर्षीय सिकांतो ने बना डाली कचरा उठाने की गाड़ी...

1

 मथुरा के जय गुरुदेव संस्था स्कूल में पढ़ने वाले सिकांतो के स्कूल में आमतौर पर सभी लड़कियां स्कूल परिसर में झाड़ू लगाकर सफाई करती थीं और लड़के कूड़ा इकट्ठा कर उसे ठिकाने लगाते थे। इस स्थिति को देखकर सिकांतो के मन में एक मशीन बनाने का आइडिया आया। 

कचरा उठाने वाली गाड़ी और सिकांतो (दाएं)
कचरा उठाने वाली गाड़ी और सिकांतो (दाएं)
सिकांतो का परिवार मूल रूप से पश्चिम बंगाल से संबंध रखता है। रोजगार की तलाश में उसके माता-पिता उत्तर प्रदेश आ गए थे। वह आगे चलकर इंजीनियर बनना चाहता है। हालांकि उसके घर की आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के कारण वह इस स्कूल में पढ़ रहा है।

आमतौर पर स्कूलों में सुबह-सुबह सबसे पहले क्या होता है? स्कूल के सभी बच्चे प्रार्थना के लिए एकत्रित होते हैं और फिर वहां पर प्रार्थना होती है। लेकिन 15 साल के सिकांतो मंडल की दिनचर्या कुछ अलग ही है। मथुरा के जय गुरुदेव संस्था स्कूल में पढ़ने वाले सिकांतो के स्कूल में आमतौर पर सभी लड़कियां स्कूल परिसर में झाड़ू लगाकर सफाई करती थीं और लड़के कूड़ा इकट्ठा कर उसे ठिकाने लगाते थे। इस स्थिति को देखकर सिकांतो के मन में एक मशीन बनाने का आइडिया आया। उसे यह देखकर बुरा लगता था कि पढ़ने की जगह बच्चे स्कूल की सफाई में लग जाते हैं। अधिकतर बच्चे नंगे हाथों से ही सफाई का काम करते थे जिससे कि उन्हें बीमारी होने का भी खतरा बना रहता था।

सिकांतो ने बताया कि इस तरीके को वह खत्म करना चाहता था। उसने पहले अपने आइडिया पर काम किया फिर उसे अपने टीचर्स को भी दिखाया। सकारात्मक परिणाम मिलने के बाद उसने इंस्पायर अवॉर्ड के लिए भी अपने प्रॉजेक्ट को भेजा। उसने बताया, 'मुझे हैरानी हुई कि मेरे प्रॉजेक्ट को शामिल कर लिया गया था और इतना ही नहीं मेरे खाते में 5,000 रुपये भी ट्रांसफर कर दिए गए।' कचरा इकट्ठा करने वाले मशीन बनाने में सिकांतो को लगभग डेढ़ महीने लग गए। उसने पहले मैन्युअल का एलीमेंट्री मॉडल तैयार किया फिर उसके बाद उसमें कुछ गलतियां भी दिखीं जिसे दूर किया गया।

सिकांतो ने अपने शुरुआती मॉडल को पुराने फर्नीचर, साइकिल के ब्रेक, चेन, लकड़ियों और कबाड़ के समान से बनाया था। उससे जब पूछा गया कि अभी मौजूद कचरा ढोने वाली गाड़ी से उसके मॉडल में क्या अलग है तो उसने बताया, 'मार्केट में जो भी ऐसी गाड़ियां मौजूद हैं उन्हें चलाने के लिए तेल या बैटरी की जरूरत होती है, लेकिन मेरी गाड़ी की खासियत यह है कि इसे पूरी तरह से हाथ से चलाया जाएगा और यह चलाने में काफी आसान और हल्का भी है। इसमें किसी भी तरह की बैटरी या तेल की जरूरत नहीं होगी।'

सिकांतो की मोबाइल कचरा इकट्ठा करने वाली गाड़ी में काफी आसान और यूनीक फीचर्स हैं। इसमें कचरे को बिना छुए डाला जा सकता है। गाड़ी में एक ग्रिपर और हैंडल भी दिया गया है। जिससे उसे गिराने में आसानी हो जाती है। सिकांतो ने बताया कि उसने इसमें कस्टमाइज्ड स्पेस भी उपलब्ध कराया है, जिसमें झाड़ू और पानी की बोतल भी रखी जा सकती है। किसी भी नगर निगम में काम करने वाले सफाई कर्मचारी के लिए यह गाड़ी एकदम उपयुक्त है। क्योंकि सफाई कर्मियों को स्कूल, पार्क या शहरों की सफाई करने में काफी मुश्किल का सामना करना पड़ता है। सिकांतो ने इस गाड़ी का पेटेंट भी करा लिया है।

जयगुरुदेव बालक विद्यालय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के छात्र सिकांतो मंडल की बनाई गई कचरा उठाने वाली मशीन को इंस्पायर अवॉर्ड योजना में राष्ट्रीय स्तर पर भी सेलेक्ट किया गया। इसकी बदौलत सिकांतो को राष्ट्रीय नवप्रवर्तन संस्थान अहमदाबाद द्वारा जापान एशिया यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम इन साइंस जापान में ट्रेनिंग का मौका मिला। यह ट्रेनिंग प्रोग्राम पिछले साल 2017 में 28 मई से तीन जून तक चला था। सिकांतो ने अपने मॉडल को सबसे पहले जिलास्तर पर प्रदर्शित किया था उसके बाद नेशनल लेवल पर उसे प्रदर्शित करने के लिए भेजा। 2016 में उसने दिल्ली में नेशनल लेवल की प्रदर्शनी में उत्तर प्रदेश की तरफ से तीन अन्य मॉडलों के साथ प्रदर्शित किया था।

सिकांतो की मशीन को देखते केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन 
सिकांतो की मशीन को देखते केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन 

इंस्पायर अवार्ड योजना एक ऐसी राष्ट्रीय स्तर की योजना है जिसमें कक्षा छह से दसवीं तक एक-एक बच्चे का चयन कॉलेज स्तर पर किया जाता है। पांच नाम जिला स्तरीय प्रतियोगिता के लिए चुने जाते हैं। जिला स्तर पर चयनित मॉडल को पांच हजार रुपये, जबकि राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में चयनित मॉडल को 20 हजार रुपये का इनाम दिया जाता है। राष्ट्रीय स्तर पर चयनित मॉडल को पेटेंट किया जाता है। पिछली बार यह आईआईटी दिल्ली में प्रदर्शित आयोजित हुई थी जहां राष्ट्रीय स्तर पर सभी बच्चों के मॉडलों को सेलेक्ट किया गया। इन्हीं मॉडल की बदौलत बच्चों ने जापान यात्रा भी की।

इस दौरान उसे विज्ञान और प्रोद्योगिकी मंत्री की तरफ से शाबासी भी मिली थी। नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन (NIF) ने उसे सम्मानित किया था। NIF ने ही इस मॉडल को हकीकत में उतारने में मदद की थी। NIF को लगा कि इसे विकसित करने में काफी संभावनाएं हैं। इस मोबाइल वेस्ट कलेक्टिंग मशीन के पीछे की तकनीक को गुजरात के एक स्टार्ट अप सृजन इनोवेटर प्राइवेट लिमिटेड को ट्रांसफर कर दिया गया है। इस मशीन के पेटेंट को खरीदने वाले गौरव आचार्य ने बताया कि जल्द ही इस मशीन को मार्केट में उतारने की तैयारी की जाएगी इसके लिए प्रोडक्शन भी शुरू किया जाएगा।

गौरव ने बताया कि यह स्वच्छता गाड़ी काफी स्मार्ट और पेशेवर तरीके से कचरा उठाने और उसके निपटान की समस्या को हल कर देगी। इससे मेहनत तो कम लगती है साथ ही में समय की काफी बचत हो जाती है। गौरव ने कुछ बदलावों के साथ इस मशीन को तैयार किया और उसे इस्तेमाल करके भी देखा। उन्होंने बताया कि इसे बनाने में काफी कम लागत आई और इसीलिए इसका दाम 10,500 रुपये रखा गया है। दीपक ने कहा कि इससे स्वच्छ भारत अभियान को भी बढ़ावा मिलेगा। इस गाड़ी को तैयार करने वाले सिकांतो को इनोवेशन कॉन्क्लेव में इसे प्रदर्शित करने का मौका मिला था। वह इसमें भाग लेने वाला सबसे युवा सदस्य था।

सिकांतो का परिवार मूल रूप से पश्चिम बंगाल से संबंध रखता है। रोजगार की तलाश में उसके माता-पिता उत्तर प्रदेश आ गए थे। वह आगे चलकर इंजीनियर बनना चाहता है। हालांकि उसके घर की आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के कारण वह इस स्कूल में पढ़ रहा है। सिकांतो का कहना है कि वह बड़े होकर अपने परिवार को अच्छी सुविधाएं देना चाहता है। उसने कहा कि एक दिन वह पैसे कमाकर अपने गांव में घर बनवाएगा। उसका बड़े भाई ने पैसों के आभाव में फैक्ट्रियों में काम करके बीएससी पूरी की है। वह अपने भाई की भी मदद करना चाहता है।

यह भी पढ़ें: देश के सबसे गरीब गांव के लोगों ने काजू की खेती से बदली अपनी तकदीर

यदि आपके पास है कोई दिलचस्प कहानी या फिर कोई ऐसी कहानी जिसे दूसरों तक पहुंचना चाहिए, तो आप हमें लिख भेजें editor_hindi@yourstory.com पर। साथ ही सकारात्मक, दिलचस्प और प्रेरणात्मक कहानियों के लिए हमसे फेसबुक और ट्विटर पर भी जुड़ें...

Related Stories

Stories by yourstory हिन्दी