घर बैठे डाॅक्टर से परामर्श चाहिए? icliniq पर आईए, स्वस्थ रहिए...

ट्रैवल एक्जीक्यूटिव ध्रुव कुमार ने नवंबर 2011 में शुरू किया यह आॅनलाइन पोर्टलमरीजों को डाॅक्टरों से आॅनलाइन परामर्श की सुविधा उपलब्ध करवाता है यह पोर्टलफोन पर परामर्श उपलब्ध करवाने के अलावा वीडियो मशवरे की भी सुविधा है उपलब्धअबतक 50 हजार से अधिक रोगियों को दे चुके हैं परामर्श जिनमें से 25 प्रतिशत विदेशी हैं

0

कई अन्य ट्रैवल एक्जीक्यूटिव्स की तरह काम को बोझ के मारे ध्रुव कुमार को भी कई बार लगता था कि उन्हें अपने स्वास्थ्य से संबंधित जानकारियों के लिये एक डाॅक्टर से परामर्श करना चाहिये। इसके अलावा औरों की तरह उनके लिये भी एक भरोसेमंद डाॅक्टर को खोजना और अपनी समस्या आॅनलाइन पोस्ट करना बेहद चुनौतीपूर्ण था। ध्रुव कहते हैं, ‘‘मैंने कई बार याहू आंसर्स की मदद ली लेकिन वे भी अधिकतर मेरी ही तरह के साधारण उपयोगकर्ताओं के प्रश्न और उत्तर ही साबित हुए। मैं एक ऐसे पोर्टल की तलाश में था जिसपर मैं अपनी परेशानी पोस्ट कर सकूं और एक वास्तविक और अनुभवी डाॅक्टर से उसका समाधान पाने में कामयाब रहूृँ।’’

ध्रुव ने एक ऐसे आॅनलाइन पोर्टल की स्थापना करने की दिशा में पांव बढ़ाये जहां उनके जैसे लोग अपनी स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के हल के लिये अनुभवी और योग्य डाॅक्टरों का समय लेने में कामयाब रहें। वर्ष 2010 की गर्मियों के दिनों में ध्रुन ने icliniq नाम की एक कंपनी का गठन किया। यह एक ऐसा वर्चुअल प्लेटफाॅर्म है जो डाॅक्टरों और मरीजों दोनों को वास्तविक समय में आॅनलाइन साथ लाने में मदद करता है। कोई भी व्यक्ति उनकी इस सेवा का इस्तेमाल करते हुए डाक्टरों की सलाह आॅनलाइन प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य संबंधी किसी आपातकालीन स्थिति से गुजर रहा व्यक्ति फोन के द्वारा अथवा एचडी वीडियो की सहायता से डाॅक्टर से तुरंत संपर्क साध सकता है और उनकी सेवाओं का लाभ ले सकता है।

प्रारंभिक दौर में ध्रुव ने बैंकएंड डेवलपमेंट का काम कोयंबटूर आधारित एक स्टार्टअप को सौंपते हुए इस वेबसाइट को आउटसोर्स कर दिया था लेकिन यह प्रयोग असफल रहा। इसके बाद अपने कदम आगे बढ़ाते हुए उन्होंने अपनी ही एक टीम तैयार करने का फैसला किया और नवंबर 2011 में icliniq का शुभारंभ किया। यह एक ऐसा सरल आॅनलाइन मंच है जिसपर डाॅक्टर और रोगी दोनों ही अपना पंजीकरण करवा सकते हैं।

ध्रुव कहते हैं, ‘‘वास्तव में हमें यह लगा था कि हम एकबार अपने इस काम के बारे में फेसबुक पर जानकारी साझा करेंगे तो कम से कम हमारे परिचित और रिश्तेदार तो आईक्लीनिक का उपयोग प्रारंभ कर देंगे। उन सबने हमारी इस अवधारणा की प्रशंसा तो की लेकिन किसी ने भी इसका इस्तेमाल तक करना शुरू नही किया। हमारे साथ जुड़े डाॅक्टरों के भरोसेमंद होने का सवाल और डाटा की सुरक्षा उनकी मुख्य चितांए थीं।’’ इसके अलावा प्रारंभिक चरण में कई डाॅक्टर सिर्फ ध्रुव की चिकनी-चुपड़ी बातों में आकर आईक्लीनिक के साथ जुड़ तो गए हालांकि उन्हें इस अवधारणा अवधारणा की सफलता में बिल्कुल भी यकीन नहीं था।

ध्रुव आगे कहते हैं, ‘‘बीतते हुए हर लम्हे के साथ हम खुद को सुधारने का काम करते रहे और लगभग एक वर्ष बाद हमें एक गंभीर आत्मनिरीक्षण की आवश्यकता महसूस हुई। मैं हमेशा से ही अपनी इस अवधारणा की सफलता के प्रति आश्वस्त था और जल्द ही मुझे अहसास हुआ कि हम खुद को एक प्रौद्योगिकी कंपनी के रूप में लेकर आगे बढ़ रहे हैं।’’ इसके बाद ही उन्होंने आईक्लीनिक को एक स्वास्थ्यसेवा से संबंधित कंपनी के रूप में देखना शुरू किया। इसके बाद वे प्रौद्योगिकी का प्रयोग एक बिल्कुल अलग तरीके से स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में करने लगे।

ध्रुव कहते हैं, ‘‘हमनें अपने साथ जुड़े डाॅक्टरों को टेली-स्वास्थ्य प्रेमी होने के लिये प्रशिक्षित किया। चूंकि यह भारत के लोगों के लिये एक बिल्कुल नया अनुभव था इसलिये हमें मंजिल तक पहुंचने के रास्ते भी खुद ही तलाशने थे। हालांकि उस समय तक हमें वीडियो के माध्यम से भी अधिक मशवरे भी नहीं मिल रहे थे। हम कई सारे डाॅक्टरों और अपनी वेबसाइट पर आने वाले लोगों से लगातार संपर्क कर रहे थे और फिर हमें महसूस हुआ कि हमारे द्वारा प्रारंभिक स्तर पर ही एक बहुत बड़ी गलती हो रही है।’’

इसके बाद कंपनी ने लोगों की परेशानियों को लिखित रूप में लेना प्रारंभ किया और वीडियो मशवरे की अवधारणा के स्थान पर फोन के द्वारा मशवरा देने की सुविधा को लेकर आए। वास्तव में यह सेवा सामने आने के बाद ही सही मायनों में आईक्लीनिक का व्यापार बढ़ा।

इनके साथ जुड़ने के लिये किसी भी डाॅक्टर को सिर्फ icliniq.com पर खुद को पंजीकृत करवाना पड़ता है। पंजीकरण की यह प्रक्रिया एक बेहद कड़ी सत्यापन प्रक्रिया से गुजरते हुए डाॅक्टरों को टेली-स्वास्थ्य जानकार बनने के लिये प्रेरित करती है। चूंकि टेली-स्वास्थ्य सेवाओं के अंतर्गत आपको मरीज का इलाज बिना शारीरिक संपर्क बनाए यानि कि मरीज को बिना छुए करना होता है इसलिये इन डाॅक्टरों को उनकी समस्याओं के ठीक समाधान के लिये सही सवाल पूछने के लिये तैयार होना चाहिये। उनका डैशबोर्ड उनके द्वारा पूछे जाने वाले सवालों और परामर्शों को प्रदर्शित करता रहता है।

कोई भी मरीज अपनी समस्या या स्वास्थ्य से संबंधित सवाल को 160 अक्षरों में आईक्लीनिक पर पोस्ट कर सकता है। इसके अलावा वह परामर्श के लिये फोन काॅल या वीडियो के विकलप में से भी किसी एक का चुनाव कर सकता है। साथ ही वह अपने स्वास्थ्य से संबंधित किसी भी समस्या को साधे डाॅक्टर के पास भी पोस्ट कर सकता है।

आंकड़ों की बात करें तो इस मंच के माध्यम से अबतक करीब 50 हजार से अधिक इनके द्वारा दिये जा रहे परामर्श का फायदा उठा चुके हैं और आश्चर्यजनक यह है कि उनमें से 25 प्रतिशत विदेशी नागरिक हैं। ध्रुव बताते हैं, ‘‘फिलहाल हमसे जुड़े 10 प्रतिशत मरीज हमारी सेवाओं की एवज में हमें भुगतान कर रहे हैं। दुनिया के लगभग हर प्रसिद्ध देश के उपभोक्ता हमारी सेवाओं का उपयोग भुगतान करते हुए कर रहे हैं। भारत के अलावा अमरीका और मध्य पूर्व के देशों के रहने वाले लोग आईक्लीनिक की सेवाओं का लाभ उठाने वालों में प्रमुख हैं।’’

यह कंपनी प्रदान की जा रही सेवाओं के बदले में एक मामूली सा शुल्क लेती है और बाकी के बचे हुए पैसों का भुगतान डाॅक्टरों को कर दिया जाता है। ध्रुव कहते हैं, ‘‘हम अभी भी लाभ कमाने वाली कंपनी में परिवर्तित नहीं हो पाए है क्योंकि हमारा प्रमुख लक्ष्य आॅनलाइन सवास्थ्य सेवाओं की दुनिया को बेहतर बनाते हुए इसके इर्द-गिर्द एक व्यापार को बढ़ावा देना था और अब मुझे लगता है कि हम अपने मिशन में कामयाब हो रहे हैं।’’

यदि आपके पास है कोई दिलचस्प कहानी या फिर कोई ऐसी कहानी जिसे दूसरों तक पहुंचना चाहिए, तो आप हमें लिख भेजें editor_hindi@yourstory.com पर। साथ ही सकारात्मक, दिलचस्प और प्रेरणात्मक कहानियों के लिए हमसे फेसबुक और ट्विटर पर भी जुड़ें...

Worked with Media barons like TEHELKA, TIMES NOW & NDTV. Presently working as freelance writer, translator, voice over artist. Writing is my passion.

Stories by Nishant Goel