साक्षी मलिक बनीं ‘बेटी बचाओ, बेटी पढाओ’ अभियान की ब्रांड एम्बेसडर

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हरियाणा ने आज अपनी ‘बेटी’ साक्षी मलिक को सम्मानित करते हुए प्रधानमंत्री के ‘बेटी बचाओ, बेटी पढाओ’ अभियान का ब्रांड एम्बेसडर नियुक्त किया और ओलंपिक कांस्य पदकधारी पहलवान को 2.5 करोड़ रूपये का चेक प्रदान किया।  साक्षी का आज सुबह राजधानी में इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया और इसके बाद हरियाणा सरकार ने भी उनके स्वागत में भव्य समारोह किया।

साक्षी को लेने उनके माता पिता और रिश्तेदार आए थे। साक्षी ने महिलाओं के 58 किलोग्राम फ्रीस्टाइल कुश्ती में कांस्य पदक जीता है, उसने अपना कांस्य पदक दिखाते हुए लोगों को अभिवादन किया। साक्षी इसके बाद झज्जर जिले के बहादुरगढ़ गयीं जहां हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने अपने मंत्रिमंडल के वरिष्ठ सहयोगियों कैप्टन अभिमन्यु और ओ पी धनकड़ के साथ राज्य की स्टार खिलाड़ी का स्वागत किया।

यह 23 वर्षीय ओलंपिक पदक जीतने वाली भारत की पहली महिला पहलवान है। साक्षी ने कहा, ‘‘ओलंपिक पदक जीतना मेरा सपना था और मैंने इसके लिए कड़ी मेहनत की है। अब मैंने इसे जीत लिया है इसलिए ऐसा लगता है मैं सपने में जी रही हूं।’’ साक्षी ने कहा, ‘‘जब मैं अपने पिता से गले मिली और उन्हें अपना पदक दिखाया तो उनकी आंखों से आंसू आ गए। मेरा परिवार काफी भावुक है और वे मुझे देखकर काफी खुश थे। कुछ लोग भावुक थे और कुछ खुश हो रहे थे। मैं काफी खुश थी।’’ साक्षी ने प्रेरित करने और उनका साथ देने के लिए अपने परिवार, कोचों और साथी पहलवानों का आभार जताया। उन्होंने कहा, ‘‘मेरे कोचों और परिवार ने मेरा सपना साकार करने में काफी मदद की। सुशील कुमार और योगेश्वर दत्त जैसे मेरे सीनियर खिलाड़ियों ने मुझे काफी प्रेरित किया और मैंने उनसे काफी कुछ सीखा।’’

साक्षी ने साथ ही कहा कि भारत का ध्वजवाहक बनना उनके लिए गौरवपूर्ण लम्हा था। उन्होंने साथ ही राजीव गांधी खेल रत्न के लिए चुने जाने पर खुशी जताई। उन्हें यह पुरस्कार 29 अगस्त को राष्ट्रपति भवन में दिया जाएगा। बहादुरगढ़ में आयोजित भव्य स्वागत समारोह में साक्षी को मुख्यमंत्री खट्टर ने ढाई करोड़ रूपये का चेक प्रदान किया। इस 23 वर्षीय खिलाड़ी को पारंपरिक पगड़ी देकर सम्मानित किया गया। 

वहीं खट्टर ओलंपिक रजत पदकधारी पीवी सिंधु का पूरा नाम भूल गये और उन्होंने उसे कर्नाटक की करार कर दिया। खट्टर ने कहा, ‘‘हम सभी के लिये गौरव का क्षण है, जब हमारी दो बेटियों ने रक्षा बंधन के पर्व के दिन पदक दिलाये। हरियाणा की साक्षी मलिक और सिंधु :उसका नाम पूछने लगे:..कर्नाटक की पीवी सिंधु (सिंधु हैदराबाद की है)। ’’ खट्टर सरकार ने सिंधु के लिये भी 50 लाख रूपये के नकद पुरस्कार की घोषणा की। उन्होंने कहा कि एक बार फिर हरियाणा के खिलाड़ियों ने देश और राज्य का सिर गर्व से उंचा किया है। खट्टर ने साक्षी के परिवार के सदस्यों की मौजूदगी में कहा, ‘‘हमारी सरकार खेलों को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठा रही है। साक्षी ने सभी को गौरवांवित किया है जिसमें उनके देश, उनके राज्य के अलावा उनके कोच, उनका गृह नगर रोहतक और उनका परिवार शामिल है।’’ साक्षी ने कहा, ‘‘मैं चाहती हूं कि भविष्य में सभी मेरा समर्थन करें जिससे कि मैं देश के लिए और पदक जीत सकूं।’’ साक्षी के पिता सुखबीर मलिक जब हवाई अड्डे पर अपनी बेटी से मिले और उसके गले में पदक देखा तो काफी भावुक हो गए। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे उसकी उपलब्धियों पर गर्व है। मुझे ही नहीं बल्कि पूरे देश को उस पर गर्व है। उसने अपने देश और राज्य को गौरवांवित किया है। उसका पदक भारत का पदक है।’’ 

सुखबीर ने बताया कि लोगों ने उनसे कहा था कि कुश्ती लड़कियों का खेल नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘कभी कभी कुछ लोग मुझसे कहते थे कि वह लड़की है और यह :कुश्ती: उसके लिए अच्छी नहीं है। लेकिन 2010 में जब मेरी बेटी ने रूस में एक प्रतियोगिता में पदक जीता और फिर एशियाई चैम्पियनशिप और राष्ट्रमंडल खेल में स्वर्ण पदक जीता तो सभी साक्षी की तरह बनना चाहते थे और उसने जो किया उसे दोहराना चाहते थे।’’ साक्षी इसके बाद अपने मामा से मिलने इस्माइला गांव पहुंची। गांव के बुजुर्गों ने पत्रकारांे से कहा कि पूरे देश को साक्षी और पीवी सिंधू दोनों पर गर्व है।

एक बुजुर्ग ने कहा, ‘‘अब यह मानसिकता बदल गई है कि लड़कियां किसी तरह लड़कों से कम हैं। लड़कियां सभी क्षेत्रों में चमक बिखेर रही हैं, चाहे ये खेल हो या पढ़ाई। वे बराबर हैं और कई मामलों में काफी आगे हैं। मुझे लगता है कि लड़कियों को प्रोत्साहित करने और अपना सपना साकार करने के लिए बराबरी का मौका देने की जरूरत है।’’ साक्षी की यात्रा के दौरान विभिन्न इलाके में लोग मालाएं लेकर उनका इंतजार कर रहे थे।

कुछ लोगों ने उनके गले में नोटों की मालाएं भी डाली जबकि अन्य लोगों विशेषकर युवाओं ने उनके साथ सेल्फी खिंचवाई। साक्षी पर फूल भी बरसाए गए और उन्हें मिठाई खिलाई गई। लोगों ने ढोल की थाप पर नाचकर उनका स्वागत किया। एक अन्य इलाके में स्कूली बच्चों ने बांसुरी और ढोल बजाकर उनका स्वागत किया।- पीटीआई

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