आपके सपनों के लिए सीढ़ियां सजाए “तामारई”

अपने विचारों से दूसरों को प्रभावित करने की कलाइंसान को अंदर से बेहतर बनता है “तामारई”

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सफलता के लिए यूं तो कई लोग हाथ पैर मारते हैं लेकिन कामयाबी कुछ ही लोगों को नसीब होती है। इसकी कई वजहें हो सकती हैं, किंतु मोटे तौर पर कामयाब ना होने के पीछे लक्ष्य को लेकर उदासीनता या सोच और काम में सही तालमेल का अभाव बड़ी वजह रहता है। लोगों में इसी कमी को दूर करने और उनमें निजी और व्यावसायिक उत्कृष्टता को निखारने के लिए तामारई काफी मददगार साबित हो रहा है।

कमल के फूल ‘लोटस’ दर्शन पर आधारित तामारई न्यूरो लिंग्विस्टिक कार्यक्रम है। ये कार्यक्रम ना सिर्फ आपके मौजूदा पैटर्न के बारे में बताता है बल्कि आप अपने विचारों के माध्यम से दूसरों को कैसे प्रभावित कर सकते हैं इसकी भी जानकारी देता है। ये वो तरीका है जिनके माध्यम से कोई भी वो परिणाम हासिल कर सकता हैं जिनकी चाहत उसने की होती है। प्रशिक्षण और विकास के क्षेत्र में होने के नाते पायल ने देखा कि हर ओर खास तरह का स्पार्क्स है और तब उन्हे एक नई क्षमता का पता चला और वो था विशुद्ध रूप से मनोविज्ञान। जो हकीकत में लोगों के लिए प्रेरणा बन सकता है। उनको ये एहसास दिला सकता है कि वो क्या कर सकते हैं।

पायल बताती है कि उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती ये थी कि वो कॉरपोरेट कामकाजी के तौर पर काम कर रही थीं और अब वो उद्यमी बनने की राह पर थीं। ये कदम एक तरह से अपनी सुविधा क्षेत्र से बाहर कदम रखने जैसा था। बावजूद इसके लोगों की सेवा को ध्यान में रख वो आगे बढ़ीं। उनको ये सब एक साहसिक कदम की तरह लग रहा था। शुरूआत में जानकारी जुटाने के लिए उन्होने कई वेबसाइटों को खंगाला। इस दौरान उन्होने ट्रेनिंग सेंटर मार्केटिंग और प्रमोशन के बारे में जानकारी जुटाई। इस तरह वो अपने काम को लेकर ज्यादा जिज्ञासु और उत्साहित हो गई। पायल का कहना है कि “ये सब आसान लगने लगता है कि जब आप अपनी शर्तों पर अपने लिये काम करते हैं लेकिन इसमें भी अनुशासन जरूरी होता है, आपको निरंतर नई सोच बनाये रखनी होती है और अपने पर दृढ़ता से विश्वास बनाये रखना होता है।”

हालांकि ये सभी महिलाओं के लिए इतना आसान नहीं होता क्योंकि वित्तिय प्रबंधन, व्यापार में पूर्वानुमान और आमदनी जैसे कई क्षेत्र हैं जहां चुनौतियां मिल सकती हैं। इसके लिए जरूरत होती है जानकारी की ताकि सही काम की पहचान हो सके। अपने तुजर्बे के आधार पर पायल का मानना है कि भारत में नये जमाने के मुताबिक विचार और अनुभव के आधार पर सीखने की कला जारी है।

लंबे वक्त के नजरिये से ऐसे बहुत कम लोग हैं जो अपने व्यक्तित्व के विकास के लिए निवेश करना चाहते हैं। ऐसा करने के लिए हिम्मत की जरूरत होती है और बाद में आपकी जिंदगी में खोज और तजुर्बा उनकी पहचान बन जाता है। जो भीतरी तौर पर इंसान को बेहतर बनता है। एक तरह से ये नये की फिल्म देखने जैसा है। जहां पर आप कुछ खास तरह की खोज करते हैं जहां आपको लगता है कि आप अपना विकास साफ हवा में कर रहे हैं। प्राचीन भारत में इंसान को गुरूकुल में कई तरह के अनुभवों से गुजरना होता था। लेकिन आज के दौर में कई लोगों के पास भले ही सामान्य ज्ञान की जबरदस्त जानकारी हो लेकिन जिंदगी जीने के बारे में उनको काफी कम जानकारी होती है। इसी चीज की कमी को दूर करने का काम करता है न्यूरो लिंग्विस्टिक कार्यक्रम। यह प्रामणिकता के आधार के ज्ञान के दरवाजे खोलता है। ये बताता है कि जो पैसा हम अपने शरीर पर खर्च कर रहे हैं उससे हम कैसे स्वस्थ रह सकते हैं। अपने दिमाग को शांत रख सकते हैं और कैसे तंदुरस्त शरीर पा सकते हैं।

भागदौड़ भरी इस जिंदगी में लोग न्यूरो लिंग्विस्टिक कार्यक्रम से जुड़ना चाहते हैं। खास बात ये है कि इसमें समाज के हर तबके से लोग शामिल हैं। खासतौर से कार्पोरेट सेक्टर, मेडिकल से जुड़े लोग, फिल्म, ट्रेनिंग और कोचिंग से जुड़े लोगों का इस ओर ज्यादा रूझान है। ये कार्यक्रम मदद करता है कि लोग कैसे अपनी भावनाओं पर काबू पा सकें, कैसे आपसी संबंध को और मजबूत बनाये जाएं साथ ही अपने भीतर छुपी बुराईयों को कैसे बाहर निकाला जाए। अपने तजुर्बे के आधार पर वो बताती हैं कि कई बार सिर्फ दो दिन की वर्कशॉप में लोगों के वो विचार और उम्मीदें जाग जाती हैं जो उनकी जिंदगी से कहीं दूर चली गई थी। तामारई कई तरह के सामाजिक मुद्दों को उठाने की ताकत भी देता है। ये कार्यस्थल में होने वाले उत्पीड़न के बारे में जागरूक और रोकथाम करने में मददगार है। इसी वजह से वर्तमान में पायल एक प्रमुख कानून फर्म में यौन उत्पीड़न समिति की सदस्य भी हैं। आने वाले महीनों में ज्यादा से ज्यादा लोगों तक अपनी पहुंच बनाने के लिए आम लोगों के लिये वर्कशॉप तो कारर्पोरेट जगत के विभिन्न मैनेजमेंट स्तर के लोगों के बीच न्यूरो लिंग्विस्टिक कार्यक्रम ले जाने की योजना है खासतौर से कामकाजी महिलाओं के लिए उनके पास विशेष योजना है। पायल ने ऐसी उद्यमी महिलओं को भी अपने साथ जोड़ने की कोशिश की है जो दूसरों के लिए कुछ करना चाहती हैं। खासतौर से ऑटिस्टिक बच्चों और उनके परिवार वालों के लिए।

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