कानून से खेलने वाली महिला आइपीएस और आइएएस

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जब कोई महिला आइपीएस अथवा आइएएस ही कानून तोड़ने पर आमादा हो जाए, जेल में अपने भाई से मैन्यूअल फांद कर मिलने घुस जाए, किसी महिला कांस्टेबल को खुदकुशी के लिए विवश करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया जाए या उसकी तलाश में देश भर में छापे पड़ने लगें तो इस किस्म की घटनाएं बहुत कुछ सोचने को विवश करती हैं।

आईपीएस भारती घोष
आईपीएस भारती घोष
महाराष्ट्र की एक महिला आइपीएस डी रूपा का मामला सुर्खियों में हैं, जिन्होंने ट्विटर पर भाजपा सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी के साथ अपनी सेल्फी डाल दी है। कहा जा रहा है कि किसी आइपीएस अधिकारी को किसी राजनेता के साथ अपनी तस्वीर इस तरह सार्वजनिक नहीं करनी चाहिए। 

ऐसा भी नहीं कि हर आइपीएस, आइएएस अथवा पुलिस अधिकारी कानून का रखवाला ही होता है। कई बार वे कानून तोड़ते हुए स्वयं शिकंजे में आ जाते हैं, जैसेकि आज पश्चिम बंगाल की महिला आईपीएस भारती घोष, ठाणे (महाराष्‍ट्र) का सहायक पुलिस आयुक्त शामकुमार निपुंगे अथवा छत्तीसगढ़ की महिला आईएएस जिलेनिया किंडो। साथ ही दिल्ली के ईमानदार सब इंस्पेक्टर रहे और एसीपी पद से हुए रिटायर्ड बलजीत सिंह जैसे पुलिसकर्मी भी रहे हैं, जिनसे कभी सीनियर आइपीएस पुलिस कमिश्नर टीआर कक्कड़ तक माफी मांग चुके हैं और भारत की पहली महिला आईपीएस किरण बेदी बलजीत सिंह के ही अंडर में ट्रेनिंग कर चुकी हैं।

इन दिनों पश्चिम बंगाल की लापता आईपीएस भारती घोष मोस्टवांटेड हैं। वह कभी पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी की करीबी रही हैं। सीआईडी ने उन्हें मोस्टवांटेड घोषित किया है। उनके साथ उनका पूर्व अंगरक्षक सुजीत मंडल भी फरार है। भारती पर 300 करोड़ रुपए की जमीन खरीदने का आरोप है। जमीन खरीद से जुड़े दस्तावेज सीआईडी को बरामद हुए हैं। भारती के पति राजू पर भी अवैध वसूली समेत कई तरह के गंभीर आरोप हैं। भारती पर नोटबंदी के समय विशेष अभियान चलाकर सोना हड़पने के भी आरोप हैं। उनके ठिकानों से दो किलोग्राम सोने के जेवर और तीन करोड़ रुपए नकद बरामद हो चुके हैं।

हालांकि वीडियो और ऑडियो जारी कर भारती इस सभी आरोपों का खंडन कर चुकी हैं। भारती ने पश्चिम मिदनापुर जिले के पुलिस अधीक्षक पद से अपना तबादला कर दिए जाने से नाराज होकर 29 दिसंबर 2017 को नौकरी से इस्तीफा दे दिया था। इस्तीफे के बाद इस बात की चर्चा भी राजनीतिक हलकों में आम हो गई थी कि वह बीजेपी में शामिल हो सकती हैं। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को यह बात राज्यसभा सांसद मानस भुइंया ने बताई थी। भारती घोष ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय से मैनेजमेंट विषय में स्नातक किया है। पश्चिम बंगाल पुलिस में शामिल होने के पहले वह कलकत्ता मैनेजमेंट इस्टीट्यूट में शिक्षिका थीं। सीआईडी वुमेन सेल में भी उन्होंने काम किया है। वह कसोवो और बोस्निया में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में भी काम कर चुकी हैं।

वर्ष 2011 में वह मिशन से वेस्ट बंगाल लौटी थीं। उस वक्त मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में राज्य में तृणमूल कांग्रेस की सरकार थी। कुछ समय के बाद ही भारती घोष की पोस्टिंग झाड़ग्राम व पश्चिम मेदिनीपुर में पुलिस अधीक्षक के तौर पर हुई थी। भारती को छह बार यूएन मेडल मिल चुका है। साल 2014 में कमेंडेबल सर्विसेज के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी उन्हें पुरस्कृत कर चुकी हैं। अब भारती की तलाश में पश्चिम बंगाल की सीआईडी टीम देश भर में छापे मार रही है।

इसी दौरान उसने भारती घोष के आवास और उनके नजदीकी एक पुलिस अधिकारी के आवास पर भी छापे मारे। इस मामले में पश्चिम बंगाल के दोनों प्रमुख विपक्षी दलों भाजपा और कांग्रेस ने सीबीआई जांच की मांग की है। उनका ममता सरकार पर आरोप है कि पूर्व एसपी को साल 2011 में मारे गए सीनियर माओवादी नेता किशनजी उर्फ कोटेश्वर राव की मौत के बारे में कुछ अहम जानकारियां हासिल हुई थीं, जब उनकी पोस्टिंग माओ प्रभावित मिदनापुर में की गई थी। डीजी सीआईडी निशांत परवेज कहते हैं कि जांच एजेंसी कानून के हिसाब से कार्रवाई कर रही है।

कानून तोड़ने वाली एक महिला आईएएस हैं जशपुर (छत्तीसगढ़) की जिलेनिया किंडो, जिन पर आरोप है कि उन्होंने अपने रुतबे का गलत फायदा उठाते हुए जेल मैनुअल के विरुद्ध रात में कारागार में कैद अपने आरोपी आइएएस भाई से न सिर्फ मुलाकात की बल्कि जेल के रजिस्टर में अपना नाम भी दर्ज नहीं किया। जेल मैन्यूअल की अनदेखी की तस्वीर सीसीटीवी में कैद हो गई है। जेल डीजी इसकी जांच करा रहे हैं। गौरतलब है कि एक मामले में 14 दिन की रिमांड पर भेजे गये आरोपी पूर्व आईएएस एचपी किंडो इन दिनो जेल में हैं। जब महिला आईएएस जिलेनिया किंडो जेल में अपने भाई से मिलने पहुंची थीं, जेल प्रशासन ने उन्हें जेल के कानून के मुताबिक पांच बजे के बाद भाई से मिलाने से इनकार कर दिया था। इस पर जिलेनिया ने रौब दिखाते हुए जेल के अफसरों पर दबाव बनाया और अंदर भाई तक पहुंच गईं। इसी दौरान जेल अफसरों को जशपुर एसडीएम ने भी फोन कर कहा था कि 'शाम हो गई तो क्या हुआ, मैडम रायपुर से आईं हैं, इन्हें मिलवा दो'।

सीसीटीवी फुटेज में जिलेनिया जेलर के कक्ष अपने भाई के साथ बातें करती दिख रही हैं। जेल अफसरों ने जेल रजिस्टर में जिलेनिया का नाम भी दर्ज नहीं किया है जबकि जेल का नियम है, कोई भी अंदर दाखिल होता है तो सबसे पहले उसका नाम, पता रजिस्टर में दर्ज किया जाता है। एक अन्य आइपीएस से सम्बंधित आपराधिक मामला ठाणे (महाराष्‍ट्र) से लोगों के सामने आया है। आरोपी आईपीएस अध‍िकारी को ग‍िरफ्तार कर ल‍िया गया है। उस पर आरोप है कि उसने एक महिला कॉन्‍स्‍टेबल को आत्‍महत्‍या के ल‍िए उकसाया था। सहायक पुलिस आयुक्त शामकुमार निपुंगे ने उच्चतम न्यायालय में इस मामले में अग्र‍िम जमानत की अर्जी लगाई थी लेकिन उसे खार‍िज कर द‍िया गया तो उसने पुल‍िस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।

पुलिस के मुताबिक ठाणे कमिश्नर कार्यालय स्थित पुलिस मुख्यालय में पदस्थ कॉन्स्टेबल सुभद्रा पंवार पिछले वर्ष छह सितंबर को कालवा टाउनशिप में अपने फ्लैट में पंखे से लटकी मिली थीं। घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला था। पंवार के भाई सुजीत पंवार ने बाद में निपुंगे और उनकी बहन के मंगेतर मुंबई पुलिस में कॉन्स्टेबल अमोल पाफले के खिलाफ महिला का उत्पीड़न करने और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने की शिकायत दर्ज करवाई। निपुंगे के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था और बाद में उसे निलंबित कर दिया। इसी तरह महाराष्ट्र की एक महिला आइपीएस डी रूपा का मामला सुर्खियों में हैं, जिन्होंने ट्विटर पर भाजपा सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी के साथ अपनी सेल्फी डाल दी है। कहा जा रहा है कि किसी आइपीएस अधिकारी को किसी राजनेता के साथ अपनी तस्वीर इस तरह सार्वजनिक नहीं करनी चाहिए। डी रूपा इन दिनो कर्नाटक होमगार्ड एवं सिविल डिफेंस में आइजीपी हैं। ट्वीट तस्वीर के साथ डी रूपा ने लिखा है कि उनको स्वामी से प्रेरणा मिलती है।

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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