राजनांदगांव में 'संवरता बचपन' ने भविष्य के लिए रखी है मजबूत नीव

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यह लेख छत्तीसगढ़ स्टोरी सीरीज़ का हिस्सा है...

छत्तीसगढ़ में ‘संवरता बचपन’ अभियान बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए शुरू किया गया है और इसका एक बड़ा उद्देश्य राजनांदगांव में बच्चों को कुपोषण से मुक्त करना है। स्वयं जिला कलेक्टर भीम सिंह इस अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं।

गर्भवती महिला का पता चलने के बाद आंगनवाड़ी कार्यकर्ता उन्हें डिलीवरी तक बरती जाने वाली सावधानियों, देख-रेख, खान-पान के बारे में जानकारी देती हैं। वे यह भी सुनिश्चित करती हैं कि गर्भवती महिला का नियमित स्वास्थ्य जांच हो। 

सुश्री श्याम कुमारी रामटेके राजनांदगांव जिले के अछोली सेक्टर में ‘संवरता बचपन’ अभियान को कामयाब बनाने के लिए दिन-रात एक कर रही हैं। वे इस सेक्टर के सभी आंगनवाड़ी केन्द्रों की सुपरवाइजर हैं। ‘संवरता बचपन’ अभियान बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए शुरू किया गया है और इसका एक बड़ा उद्देश्य राजनांदगांव में बच्चों को कुपोषण से मुक्त करना है। स्वयं जिला कलेक्टर भीम सिंह इस अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं और उनके मार्ग-दर्शन में विभिन्न विभागों के अधिकारी, कर्मचारी, गाँवों के सरपंच, आंगनवाड़ी कार्यकर्त्ता आदि मिलकर जिले को कुपोषण-मुक्त बनाने के साथ-साथ हर बच्चे के बहुमुखी विकास के लिए अनुकूल स्थिति-परिस्थिति बनने में संलग्न है।

श्याम कुमारी रामटेके नियमित रूप से आंगनवाड़ी केन्द्रों का दौरा करती हैं और वहां आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से गाँवों में महिलाओं और बच्चों की स्थिति का पता लगती हैं। वे खुद भी गाँवों में अलग-अलग मकानों/घरों में जाकर महिलाओं से मिलती हैं और उनकी हर मुमकिन मदद करने की कोशिश करती है। उनकी कोशिश है कि जिला कलेक्टर के निर्देश मुताबिक उनके सेक्टर में आने वाले सभी आंगनबाड़ी केन्द्रों को बच्चों के सर्वांगीण विकास के केंद्र के रूप में विकसित किया जाय। वे हर दिन यह जानती हैं कि उनके सेक्टर में कितनी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सुपोषण मित्रों ने ‘गृह-भेंट’ के तहत कितने लोगों, खासकर महिलाओं और बच्चों से मुलाकात की। वे यह भी पता लगती हैं कि इन मुलाकातों के दौरान कितनी महिलाएं गर्भवती पायी गयीं और कितने बच्चे कुपोषित दिखाई दिए।

गर्भवती महिला का पता चलने के बाद आंगनवाड़ी कार्यकर्ता उन्हें डिलीवरी तक बरती जाने वाली सावधानियों, देख-रेख, खान-पान के बारे में जानकारी देती हैं। वे यह भी सुनिश्चित करती हैं कि गर्भवती महिला का नियमित स्वास्थ्य जांच हो। अगर किसी घर-परिवार में किसी बच्चे में कुपोषण के लक्षण दिखाई देते हैं तो आंगनवाड़ी कार्यकर्त्ता उसे तुरंत अस्पताल लेकर जाते हैं। बच्चे का इलाज करवाते हैं, डॉक्टर की सलाह लेते हैं और फिर बच्चे के घर लौटने के बाद यह सुनिश्चित करते हैं कि उसे सही समय पर सही आहार और दवाइयां मिल रही हैं। जरूरत के मुताबिक बच्चों का टीकाकरण भी करवाया जाता है। आंगनवाड़ी केन्द्रों में गाँव के सभी बच्चों को पौष्टिक आहार दिया जाता है।

राजनांदगांव जिला ही नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ राज्य के सबी आंगनबाड़ी केन्द्रों में शून्य से लेकर 06 वर्ष तक के बच्चों के बहुमुखी विकास की कोशिश हो रही है। संवरता बचपन अभियान के तहत इस अभियान के तहत आंगनबाड़ी केन्द्रों को आकर्षक तरीके से सजाया गया है,माताओं और बच्चों के बैठने की अच्छी व्यवस्थाकी गयी है, मनोरंजक और खेल गतिविधियों के लिए समुचित स्थान निर्धारित किया गया है, अच्छी शिक्षा की भी व्यवस्था की गयी है। संवरता बचपन अभियान को पूर्ण रूप से सफल बनाने के मकसद से आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, सुपोषण मित्रों, सरपंचों और अन्य संबंधित अधिकारियों/कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया है।

सभी आंगनवाड़ी केन्द्रों में माताओं के लिए भी कई तरह की सुविधाएं प्रदान की गयीं हैं। बच्चों की सही देख-रेख, मातों को सही मार्ग-दर्शन के लिए विशेष संसाधन सामग्री भी तैयार की गई है जिसमें प्राम्भिक बाल्यावस्था देख-रेख और शिक्षा प्रदान करने के लिए 52 सप्ताह की समय-सारणी , बच्चों की आयु के अनुसार 360 गतिविधियों का गतिविधि कोषव् गतिविधि पुस्तिका और आंकलन पुस्तिका शामिल हैं। आंगनवाड़ी केन्द्रों में जिस तरह से बचपन संवर रहा है उसे देखकर यही लगता है कि इन बच्चों के साथ-साथ देश का भविष्य भी उज्जवल है।

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