मिलिए 16 साल की उम्र में एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल जीतने वाले किसान के बेटे सौरभ चौधरी से

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भारत के 16 वर्षीय निशानेबाज सौरभ चौधरी ने पुरुषों के 10 मीटर एयर पिस्टल इवेंट में 240.7 अंक लेकर गोल्ड मेडल हासिल किया। एशियन गेम्स में ये एक रिकॉर्ड है। दरअसल चौधरी 10मीटर एयर पिस्टर इवेंट में गोल्ड मेडल जीतने वाले भारत के पहले निशानेबाज हैं। 

पहली बार किसी सीनियर कंपटीशन में हिस्सा ले रहे चौधरी ने अपनी उम्र के हिसाब के काफी परिपक्वता दिखाई। जिसकी बदौलत उन्होंने 2010 के चैंपियन जापान के तोमोयुकी मतसुदा को पैनाल्टी मेट शूट में पछाड़ दिया।

इंडोनेशिया के जकार्ता और पालेमबांग में चल रहे 18वें एशियाई खेलों में भारत ने तीसरे दिन इतिहास रचा है। खेलों के पहले दिन बजरंग पुनिया और दूसरे दिन विनेश फोगाट ने गोल्ड जीतकर इतिहास रच था। विनेश एशियाई खेलों में रेसलिंग में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनी हैं। लेकिन खेल के तीसरे दिन भी भारतीय खिलाड़ी सौरभ चौधरी ने वो कर दिखाया है जिसकी किसी को उम्मीद भी नहीं होगी! भारत के 16 वर्षीय निशानेबाज सौरभ चौधरी ने पुरुषों के 10 मीटर एयर पिस्टल इवेंट में 240.7 अंक लेकर गोल्ड मेडल हासिल किया। एशियन गेम्स में ये एक रिकॉर्ड है। दरअसल चौधरी 10मीटर एयर पिस्टर इवेंट में गोल्ड मेडल जीतने वाले भारत के पहले निशानेबाज हैं। इस इवेंट में भारत के लिए पदक जीतने वाले अन्य निशानेबाज विजय कुमार हैं जिन्होंने 2010 के ग्वांगझू खेलों में ब्रॉन्ज मेडल जीता था। वहीं एशियाई खेलों में निशानेबाजी की सभी स्पर्धाओं की बात करें तो ये भारतीय इतिहास का 5वां गोल्ड मेडल है।

पहली बार किसी सीनियर कंपटीशन में हिस्सा ले रहे चौधरी ने अपनी उम्र के हिसाब के काफी परिपक्वता दिखाई। जिसकी बदौलत उन्होंने 2010 के चैंपियन जापान के तोमोयुकी मतसुदा को पैनाल्टी मेट शूट में पछाड़ दिया। तोमोयुकी मतसुदा को सिल्वर से संतोष करना पड़ा। सौरभ के साथी अभिषेक वर्मा 219.3 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहे और उन्हें ब्रॉन्ज से संतोष करना पड़ा।

एक किसान परिवार से आने वाले सौरभ के लिए गोल्ड मेडल तक का सफर आसान नहीं रहा। उनका किसान परिवार एयर पिस्टल जैसे महंगे खेल का खर्च नहीं उठा पा रहा था। लेकिन अपने बेटे की लगन को देखकर उनके पिता ने पांच महीने बाद पिस्टल खरीद दी। सौरभ से देश को उम्मीदें काफी थीं। इसकी वजह है उनका पिछला प्रदर्शन। इससे पहले उन्होंने 243.7 अंकों के साथ जर्मनी में हुए आईएसएसएफ जूनियर वर्ल्ड कप में वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था। इसी इवेंट में उन्होंने गोल्ड मेडल हासिल किया था।

जब सौरभ से पूछा गया कि क्या उन पर कई बार के वर्ल्ड चैंपियन और ओलंपिक पदक विजेता जापानी शूटर तोमोयुकी मतसुदा और कोरियन शूटर जिन के साथ खेलने का कोई दबाव था? तो तीन साल पहले ही शूटिंग में उतरने वाले सौरभ ने कहा, "मैंने कोई दबाव महसूस नहीं किया।" सौरभ कहीं भी नर्वस नहीं दिखे। सौरभ ने क्वॉलिफिकेशन राउंड में 586 अंक हासिल करके पहला स्थान हासिल किया था। वह पूर्व ओलिंपिक चैंपियन कोरिया के जिन जोन्गो से दो अंक आगे रहे थे।

सौरभ का अगला लक्ष्य वर्ल्ड चैंपियनशिप है। सौरभ ने मेरठ से 53 किलोमीटर दूर बागपत के पास बेनोली में अमित शेरॉन अकादमी में शूटिंग सीखी। शूटिंग के अलावा जब भी वह घर पर होते हैं तो अपने पिता को खेती के में मदद करते हैं। सौरभ कहते हैं, "मुझे खेती पसंद है। हमें ट्रेनिंग से ज्यादा समय नहीं मिलता है। लेकिन जब भी मैं फ्री होता हूं तो खेती में हाथ बटाता हूं। मैं अपने गांव (कलीना) जाता हूं और पिता की मदद करता हूं।"

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