फ़ैमिली बिज़नेस छोड़ शुरू किया स्टार्टअप, बिना ख़रीदे वॉटर प्यूरिफायर उपलब्ध करा रही कंपनी

युवाओं की एक टीम ने अपने स्टार्टअप के माध्यम से पीने के पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए खोजा एक नया और कारगर तकनीकी उपाय...

0

बाजार की स्थिति को देखा जाए तो पहले से ही कई बड़ी कंपनियों के वॉटर प्यूरिफायर मौजूद हैं, लेकिन ओसीईओ की खा़स बात है कि इस टेक सॉल्यूशन में आपको अपने इस्तेमाल के आधार पर (प्रति लीटर) पैसा चुकाना होता है। 

ओसीईसओ की टीम
ओसीईसओ की टीम
डिवाइस की मदद से आपने जितना पानी प्यूरिफाई किया है, आपको उतने ही पानी का भुगतान करना होगा। अभी तक 9000 उपभोक्ता इस तकनीक को अपना चुके हैं।

स्टार्टअपः ओसीईओ

फाउंडर्सः विक्रम गुलेचा, महेंद्र दंतेवाड़िया, हंसमुख गुलेचा और राजीव कृष्ण

शुरूआतः 2017

जगहः बेंगलुरु आधारित

सेक्टरः आईओटी (इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स)

फंडिंगः बूटस्ट्रैप्ड

साफ़ पानी और ख़ासतौर पर पीने के पानी की समस्या शहरी इलाकों में बढ़ती जा रही है। ऐसे में चार युवाओं की एक टीम ने अपने स्टार्टअप के माध्यम से पीने के पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए, एक नया और कारगर तकनीकी उपाय खोज निकाला है। बेंगलुरु आधारित ओसीईओ नाम का स्टार्टअप, एक आईओटी आधारित स्मार्ट वॉटर प्यूरिफायर प्रोडक्ट है। बाजार की स्थिति को देखा जाए तो पहले से ही कई बड़ी कंपनियों के वॉटर प्यूरिफायर मौजूद हैं, लेकिन ओसीईओ की खा़स बात है कि इस टेक सॉल्यूशन में आपको अपने इस्तेमाल के आधार पर (प्रति लीटर) पैसा चुकाना होता है। यानी डिवाइस की मदद से आपने जितना पानी प्यूरिफाई किया है, आपको उतने ही पानी का भुगतान करना होगा। अभी तक 9000 उपभोक्ता इस तकनीक को अपना चुके हैं।

फ़ैमिला बिज़नेस से ही बनी राह

विक्रम गुलेचा, रियल एस्टेट के फ़ैमिली बिज़नेस से जुड़े थे। एक वक़्त पर बिल्डिंग निर्माण के दौरान उन्हें वहां के रहवासियों का ख़्याल आया। विक्रम ने उनके लिए साफ़ पानी की उपलब्धता की ज़रूरत को समझा। विक्रम बताते हैं कि उन्होंने मार्केट में मौजूद प्यूरिफाइंग सिस्टमों के विकल्प को इसलिए नहीं चुना क्योंकि उनकी लागत और रख-रखाव दोनों ही महंगा है। इस समस्या का हल ढूंढने की नीयत के साथ उन्होंने अपने दोस्तों की मदद मांगी और यहीं से एक आईओटी आधारित डिवाइस विकसित करने की जुगत शुरू हुई।

ओसीईओ का वॉटर प्यूरीफायर
ओसीईओ का वॉटर प्यूरीफायर

विक्रम गुलेचा, जैन यूनिवर्सिटी से ग्रैजुएट और हारवर्ड ड्रॉपआउट हैं। यही वजह रही कि उन्हें आसानी से अपने इंजीनियर दोस्तों की मदद मिली और उनकी टीम तैयार हुई। विक्रम बताते हैं कि पहले उन्हें आईओटी की जानकारी नहीं थी। इंटरनेट पर रिसर्च करने के बाद बिज़नेल मॉडल तैयार किया गया और फिर प्रोडक्ट डिवेलपमेंट की प्रक्रिया शुरू हुई। पूरी प्रक्रिया में 6 महीने का वक़्त लगा और जनवरी, 2017 में पहला प्रोडक्ट इन्सटॉल किया गया।

किफ़ायती तकनीक से बनाई पहुंच

ओसीईओ प्यूरिफायर उपभोक्ता के घर पर लगाया जाता है। इस तकनीक की ख़ासियत यह है कि आपको इसके रख-रखाव की चिंता नहीं करनी है और न ही आपको इसे ख़रीदने की ज़रूरत है। आपको सिर्फ़ डिवाइस द्वारा प्यूरिफाई होने वाले पानी का पैसा चुकाना होगा। इसके अलावा, उपभोक्ता मोबाइल और वेब ऐप के ज़रिए अपना सब्सक्रिप्शन रीचार्ज भी करा सकते हैं। कंपनी रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम के ज़रिए अपने डिवाइस के मेन्टेनेंस का ख़्याल रखती है। विक्रम ने जानकारी दी कि पानी की इस्तेमाल लिए कोई भी सीमा तय नहीं की गई है। उपभोक्ता अपनी ज़रूरत के हिसाब से पानी का इस्तेमाल कर सकता है।

आईओटी आधारित इस तकनीक की मदद से पानी के बहाव, पानी की गुणवत्ता, डिवाइस के परफ़ॉर्मेंस आदि का रियल-टाइम डेटा भी इकट्ठा किया जाता है और उपभोक्ताओं को बेहतर से बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने पर ज़ोर दिया जाता है। मशीन में फ़िल्टर आदि की ख़राबी आने पर कंपनी ख़ुद ही उपभोक्ताओं को नए फ़िल्टर्स भिजवा देती है और इससे मैनपावर की भी बचत होती है।

मार्केट से अलग सोच

विक्रम ने बताया कि उनके स्टार्टअप की शुरूआत बूटस्ट्रैप्ड फंडिंग यानी ख़ुद के निवेश से हुई। उनके स्टार्टअप को अभी तक किसी दूसरे सोर्स से फंडिंग नहीं हासिल हुई है। विक्रम कहते हैं कंपनी का मैनेजमेंट, 2018 के दूसरे और तीसरे क्वॉर्टर में निवेश की रणनीति पर फिर से विचार करेगा। आईओटी आधारित सॉल्यूशन्स के मार्केट में ब्लूटूथ और वाई-फाई कनेक्टिविटी के ज़रिए मशीन की मॉनिटरिंग की तकनीक आ चुकी हैं।

इंडिया इस्राइल इनोवेशन चैलेंज के दौरान पीएम मोदी के पीछे खड़े महेंद्र दंतेवाडिया
इंडिया इस्राइल इनोवेशन चैलेंज के दौरान पीएम मोदी के पीछे खड़े महेंद्र दंतेवाडिया

जबकि ओसीईओ प्यूरिफ़ायर्स क्लाउड सर्वरों से कनेक्ट रहते हैं और कंपनी जीपीआरएस/जीएसएम कनेक्टिविटी का इस्तेमाल करती है। विक्रम ने दोनों तकनीकों की तुलना करते हुए बताया कि विस्तृत क्षेत्र में बेहतर कनेक्टिविटी के मामले में ब्लूटूथ और वाई-फाई आधारित तकनीक कारगर नहीं होती। ओसीईओ का मुख्यलाय बेंगलुरु में है और यह चेन्नई और हैदराबाद में फ़ील्ड ट्रायल्स करा रही है। विक्रम बताते हैं कि कंपनी का मैनेजमेंट इंटरनैशनल बाजारों (यूएई, मलेशिया, फिलीपींस, वियतनाम और कंबोडिया) में संभावित पार्टनरशिप पर भी विचार कर रहा है।

यह भी पढ़ें: स्लम के बच्चों को सिलिकॉन वैली के काबिल बनाने के लिए काम कर रहे ये भाई-बहन

यदि आपके पास है कोई दिलचस्प कहानी या फिर कोई ऐसी कहानी जिसे दूसरों तक पहुंचना चाहिए, तो आप हमें लिख भेजें editor_hindi@yourstory.com पर। साथ ही सकारात्मक, दिलचस्प और प्रेरणात्मक कहानियों के लिए हमसे फेसबुक और ट्विटर पर भी जुड़ें...

Related Stories

Stories by yourstory हिन्दी