कैंसर से जूझ रहे ड्राइवर को मिली मदद, पीएम मोदी ने इलाज के लिए मंजूर किए 3 लाख रुपये

कैंसर की वजह से जिंदगी व मौत की जंग लड़ रहे अवतार सिंह की सारी कमाई उनके इलाज में चली गई। लाखों रुपये इस गंभीर बीमारी से निपटने में खर्च हो गए। परिवार वाले तो अवतार के जीने की सारी उम्मीदें छोड़ चुके थे, लेकिन पीएम की ओर से मदद मिलने के बाद एक बार फिर उन्हें जीने की उम्मीद दिखी है।

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हिमाचल प्रदेश के 38 वर्षीय अवतार सिंह को कैंसर है। उनकी आर्थिक स्थिति इतनी खराब है, कि कैंसर का इलाज करा पाना उनके लिए नामुमकिन-सा था। एक समय ऐसा भी आया कि अवतार की सारी उम्मीदें खत्म हो गईं, लेकिन उनकी खुशनसीबी ने उनका साथ दिया और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी मदद के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाया।

बाएं: हिमाचल प्रदेश के 38 वर्षीय अवतार सिंह
बाएं: हिमाचल प्रदेश के 38 वर्षीय अवतार सिंह
डॉक्टरों ने अवतार सिंह से इलाज के लिए 3 लाख रुपये जुटाने को कहा, लेकिन ऑटो चलाने वाले अवतार के पास इतनी जल्दी इतने पैसे जुटाना मुमकिन नहीं था। पैसों के लिए वे इधर-उधर खूब भटके लेकिन उन्हें हर तरफ से निराशा ही मिली और फिर.....!

कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से इस देश में न जाने कितने लोग जूझ रहे हैं। इनमें से अधिकतर लोग तो इलाज के आभाव में अपनी जान से हाथ धो बैठते हैं। लेकिन हिमाचल प्रदेश के अवतार सिंह इस मामले में खुशनसीब हैं कि उन्हें देश के प्रधानमंत्री की तरफ से कैंसर के इलाज के लिए मदद की घोषणा हुई है। कांगड़ा जिले के नूरपुर गांव के रहने वाले 38 वर्षीय अवतार सिंह को मुंह का कैंसर है। उनकी आर्थिक स्थिति बेहद बुरी है, इसलिए इलाज कराने में तमाम दिक्कतें आ रही थीं। एक समय तो ऐसा भी आया कि उन्हें सारी उम्मीदें खत्म होती दिखाई देने लगीं।

डॉक्टरों ने अवतार सिंह से इलाज के लिए 3 लाख रुपये जुटाने को कहा, लेकिन ऑटो चलाने वाले अवतार के पास इतनी जल्दी इतने पैसे जुटाना मुमकिन नहीं था। पैसों के लिए वह इधर-उधर खूब भटके लेकिन उन्हें हर तरफ से निराशा ही मिली। एक दिन ऐसे ही वह पैसों की तलाश और मदद की आस में बीजेपी की कांगड़ा यूनिट के पदाधिकारी रणबीर निक्का से मिले। रणबीर ने अवतार की दयनीय हालत देखी और कुछ करने का आश्वासन दिया। हालांकि इतनी निराशा झेलने के बाद अवतार को नहीं लग रहा था कि उन्हें कुछ मदद मिल पाएगी, लेकिन रणबीर ने अवतार के मामले को गंभीरता से लिया और सांसद शांता कुमार के सामने पूरी कहानी बयां कर दी।

कांगड़ा से सांसद शांता कुमार से सभी स्थानीय नेताओं ने कहा कि अवतार को बीमारी के इलाज के लिये मदद दिलवाई जाये। शांता कुमार ने  31 मार्च को प्रधानमंत्री मोदी को खत लिखकर पूरे मामले की जानकारी दी और आर्थिक मदद का अनुरोध किया। उनके इस अनुरोध को स्वीकार कर लिया गया है। सिंह और उनके परिवार के सदस्यों ने मदद के लिए प्रधानमंत्री मोदी के प्रति आभार जताया और कहा कि अब दिल्ली के एक अस्पताल में उनका इलाज शुरू हो सकेगा।

कैंसर की वजह से जिंदगी व मौत की जंग लड़ रहे अवतार सिंह की सारी कमाई उनके इलाज में चली गई। लाखों रुपये इस गंभीर बीमारी से निपटने में खर्च हो गए। कैंसर की वजह से ही वह किसी काम करने के काबिल नहीं रहे और पिछले वर्ष उनकी नौकरी चली गई थी। इस हालत में उनके परिवार वाले तो अवतार के जीने की भी उम्मीद छोड़ चुके थे। लेकिन पीएम की ओर से मदद मिलने के बाद एक बार फिर से उन्हें जीने की उम्मीद दिखी है। प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र के बाद पीएम ने अवतार की जरूरत को समझते हुए उन्हें तुरंत इलाज के लिए जरूरी राशि जारी करने के निर्देश दिए हैं। अवतार सिंह और उनके पूरे परिवार ने इस मदद के लिए आभार प्रकट किया है।

कैसे होता है मुंह का कैंसर?

तंबाकू चबाकर या फिर सिगरेट-बीड़ी के कश मारकर मानसिक थकान मिटाने या मूड फ्रेश करने की लत खासकर मेहनतकश लोगों को महंगी पड़ रही है। तंबाकू, पान, सुपारी, पान मसालों, गुटखे, धूम्रपान-सिगरेट या बीड़ी के सेवन से मुंह गले, फेंफड़े, पेट और मूत्राशय का कैंसर होता है। पूरी दुनिया में कैंसर से होनेवाली मौतों में 22 प्रतिशत और फेंफड़े के कैंसर से होनेवाली मौतों में 71 प्रतिशत सिर्फ तंबाकू के कारण होती हैं। भारत में कैंसर से पीड़ित लोगों की अनुमानित संख्या लगभग 35 लाख है और हर साल कैंसर लगभग 7 लाख मरीज और जुड़ जाते हैं।

कैंसर आज महामारी के रूप में उभर रहा है मगर जागरुकता के अभाव में लाखों लोग इस बीमारी की गिरफ्त में आ जाते हैं। पुरुषों में 40 फीसदी कैंसर मुंह एवं गले का होता है, जबकि महिलाओं में यह स्तन एवं बच्चेदानी के कैंसर के केस अधिक मिलते हैं। कैंसर से बचे रहें, इसके लिए खानपान की आदतों में सावधानी बरतने की जरूरत है। शराब का सेवन कम करें, धूम्रपान, तंबाकू से एकदम दूर ही रहें। हो सके तो अधिक नमक, फास्ट फूड, कोल्डड्रिंक से परहेज करें। नियमित व्यायामशारीरिक गतिविधियां करते रहें। खुद भी कैंसर से दूर रहें और अपने आसपास के लोगों को भी इससे बचने के लिए जागरूक करते रहें, ताकि फिर कैंसर के इलाज के लिए किसी गरीब को पीएम को पत्र लिखने की जरूरत न पड़े।

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