ट्रंप ने साधा आईबीएम पर निशाना

मिनियापोलिस में रहने वाले 500 कर्मचारियों को हटाने और उनकी नौकरियां भारत एवं अन्य देशों में स्थानांतरित कर देने वाली कंपनियों पर ट्रंप ने कहा, कि वे उन पर 35 प्रतिशत कर लगाएंगे।

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राष्ट्रपति पद के रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका की दिग्गज प्रौद्योगिकी कंपनी आईबीएम पर मिनियापोलिस में रहने वाले 500 कर्मचारियों को हटाने और उनकी नौकरियां भारत एवं अन्य देशों में स्थानांतरित कर देने का आरोप लगाते हुए कहा है कि वह ऐसा करने वाली कंपनियों पर 35 प्रतिशत का कर लगाएंगे।

डेमोक्रेटिक पार्टी का गढ़ माने जाने वाले राज्य मिनेसोटा में मतदाताओं को लुभाने के लिए कल मिनियापोलिस में अपने भाषण के दौरान ट्रंप ने कहा, ‘आईबीएम ने मिनियापोलिस में 500 कर्मचारियों को हटा दिया और उनकी नौकरियों को भारत एवं अन्य देशों में भेज दिया। ट्रंप प्रशासन नौकरियों को अमेरिका से बाहर जाने से रोकेगा और हम नौकरियों को मिनेसोटा से बाहर जाने से रोकेंगे। यदि कोई कंपनी मिनेसोटा छोड़ना चाहती है, अपने कर्मचारियों को हटाना चाहती है और किसी दूसरे देश में चली जाना चाहती है और फिर अपने उत्पादों को वापस अमेरिका में भेजना चाहती है तो हम उन पर 35 प्रतिशत का कर लगाएंगे। हम जीवाश्म तेल, प्राकृतिक गैस और साफ कोयले समेत अमेरिकी उर्जा का दोहन भी करेंगे।'  ट्रंप ने कहा कि वह ओबामा के उन सभी हानिकारक नियमनों को निरस्त करेंगे, जो मिनेसोटा के किसानों, कर्मचारियों और छोटे कारोबारों को नुकसान पहुंचाते हैं। उन्होंने कहा, ‘हम एक बार फिर अमीर राष्ट्र बनेंगे। लेकिन अमीर राष्ट्र बनने के लिए हमें एक सुरक्षित राष्ट्र भी बनना चाहिए।’ उन्होंने दावा किया कि डेमोक्रेटिक उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन अमेरिका आने वाले सीरियाई शरणार्थियों की संख्या में 550 प्रतिशत का इजाफा चाहती हैं। वह विश्व के सबसे खतरनाक क्षेत्रों में से असीमित आव्रजन और शरणार्थियों का प्रवेश चाहती हैं। उन्होंने कहा, ‘उनकी योजना आपके स्कूलों और समुदायों में आतंकवाद, चरमपंथ और कट्टरपंथ की पीढ़ियां आयात करना है। जब मैं राष्ट्रपति चुना जाऊंगा तो हम सीरियाई शरणार्थी कार्यक्रम को निलंबित कर देंगे और हम चरमपंथी इस्लामी आतंकियों को हमारे देश से बाहर रखेंगे।’

साथ ही रिपब्लिकन राष्ट्रपति उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी विश्व के इतिहास में ‘नौकरियों की सबसे बड़ी चोरी’ से जूझ रहे हैं और अमेरिकी कंपनियां भारत, चीन, मैक्सिको एवं सिंगापुर जैसे देशों में नौकरियां ले जा रही हैं। उन्होंने फ्लोरिडा के टेंपा में अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा, ‘चीन के विश्व व्यापार संगठन में प्रवेश के बाद से अमेरिका 70,000 फैक्ट्रियां गंवा चुका है, दूसरा बिल और हिलेरी ने त्रासदी का साथ दिया। हम विश्व के इतिहास में नौकरियों की सबसे बड़ी चोरी से जूझ रहे हैं। कभी कोई ऐसा देश नहीं रहा जिसने इतने बेवकूफाना तरीके से हमारी तरह नौकरियां खोयी हों, लेकिन बड़ा आसान है इसे हल करना। उन्होंने उदाहरण दिया , ‘गुडरिच लाइटिंग सिस्टम्स ने 255 कर्मचारियों को हटाया एवं उनकी नौकरियां भारत स्थानांतरित कीं। बैक्सटर हेल्थ केयर कोरपोरेशन ने 199 कर्मचारियों को हटाया एवं उनकी नौकरियां सिंगापुर स्थानांतरित की दीं। एस्सिलेर लेबोरेटरीज ने 181 श्रमिकों की छंटनी की और उनका काम मैक्सिको भेज दिया। यह बद से बदतर होता जा रहा है। ’ 

ट्रंप का कहना है कि चुनाव जीतने पर वे प्रशासन नौकरियां अमेरिका से नहीं जाने देंगे।

उधर दूसरी तरफ अमेरिकी चुनाव का साया संयुक्त जलवायु वार्ता पर भी छाने लगा है। संयुक्त राष्ट्र जलवायु वार्ता अमेरिकी चुनाव की शुरु हो चुकी है। इस चुनाव का ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी लाने से संबंधी वैश्विक संधि में अमेरिका की भूमिका पर बड़ा असर हो सकता है।जलवायु परिवर्तन और पिछले साल पेरिस में स्वीकार की गयी ऐतिहासिक गैस उत्सर्जन संधि पर हिलेरी क्लिंटन और डोनाल्ड ट्रप की भिन्न भिन्न राय को देखते हुए कुछ देशों के प्रतिनिधि अपने पसंदीदा नतीजे को लेकर असामान्य रूप से मुखर हैं।

ब्राजील के पर्यावरण मंत्री फिल्हो ने बृहस्पतिवार को संवाददाताओं से कहा था कि उनका मानना है कि अमेरिकी समाज जलवायु संबंधी कार्रवाई का समर्थन करता है, भले ही कोई भी अगला राष्ट्रपति बने, लेकिन ‘निजी तौर पर मुझे उम्मीद है कि ट्रंप नहीं जीतेंगे।’ हिलेरी राष्ट्रपति बराक ओबामा की सरकार की जलवायु नीतियों का समर्थन करती हैं जिनमें पेरिस समझौते के सिलसिले में निरंतर सहयोग शामिल हैं।

ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ग्लोबल वार्मिंग (धरती के बढ़ते तापमान) के बारे में आशंका व्यक्त ही है और इस साल अपने भाषण में कहा कि यदि वह चुनाव जीत गए तो वह जलवायु संधि रद्द कर देंगे।

इन टिप्पणियों ने अन्य देशों के मन में चिंता पैदा हो गयी है कि यदि ट्रंप निर्वाचित हो गए तो क्या अमेरिका संधि के तहत अपने वादे को नजरअंदाज करेगा या उससे पूरी तरह मुंह मोड़ लेगा। पेरिस संधि पर ट्रंप के बयान के बारे में पूछे जाने पर चीन के शीर्ष जलवायु वार्ताकार शी झेन्हुआ ने कहा ‘बुद्धिमान नेता को वैश्विक विकास प्रवृतियों पर मुहर लगाना चाहिए।’

इन्हीं सबके बीच हिलेरी और ट्रंप की नजरें निर्णायक वोटों पर लगी हुई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में कांटे की टक्कर के मद्देनजर हिलेरी क्लिंटन और डोनाल्ड ट्रंप उन निर्णायक मतदाताओं को आखिरी पलों में रिझाने की कोशिश कर रहे हैं जो आखिरी पलों में किसी पार्टी के पक्ष में वोट डालने का मन बनाते हैं।

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