ख्यालों की मल्लिका, ऐश्वर्या राय !

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लावण्य, सरसता, सौंदर्य, अदाकारी, सहृयता, स्मित! ये सारे और ऐसे ही और भी बहुत सारे विशेषणों का मानवीकरण कर दिया जाए तो वो नाम कहलाएगा, ऐश्वर्या राय। दुनिया भर में लाखों वेबसाइट उनके नाम से चलती हैं। लाखों लोगों का सपना है कि वो बस एक बार उन्हें करीब से देख पाएं, उनकी मौजूदगी को महसूस कर पाएं।

साभार: ट्विटर
साभार: ट्विटर
वो जब खिलखिलाती हैं तो मानो लगता है जैसे दुनिया में नूर फैल गया हो, वो जब हल्का सा मुस्करा भर देती हैं तो लगता है जैसे क्षितिज पर सूरज की किरणें फैल गई हों। उनका वाक्चातुर्य ऐसा है कि अच्छे अच्छे वक्ता भी लाजवाब हो जाएं। वो किरदारों में ऐसे रंग भर देती हैं जैसे सदियों से उस किरदार को जीती आई हों। वो जीती जागती किसी देवी की मूरत सी लगती हैं।

ऐश्वर्या राय, जिनकी सुंदरता केवल उम्र के साथ बढ़ी है। प्रियंका चोपड़ा ने एक बार टिप्पणी की थी कि ऐश्वर्या राय बच्चन को बनाने के लिए भगवान ने एक सप्ताह का वक्त लिया था और हम इस बात से दिल से सहमत हैं। ऐश्वर्या ने अपनी बुद्धिमत्ता और नेकदिली से हर बार हमें दिखाया है कि वह एक सुंदर चेहरे से बहुत अधिक है। 

लावण्य, सरसता, सौंदर्य, अदाकारी, सहृयता, स्मित! ये सारे और ऐसे ही और भी बहुत सारे विशेषणों का मानवीकरण कर दिया जाए तो वो नाम कहलाएगा, ऐश्वर्या राय। दुनिया भर में लाखों वेबसाइट उनके नाम से चलती हैं। लाखों लोगों का सपना है कि वो बस एक बार उन्हें करीब से देख पाएं, उनकी मौजूदगी को महसूस कर पाएं। वो जब खिलखिलाती हैं तो मानो लगता है जैसे दुनिया में नूर फैल गया हो, वो जब हल्का सा मुस्करा भर देती हैं तो लगता है जैसे क्षितिज पर सूरज की किरणें फैल गई हों। उनका वाक्चातुर्य ऐसा है कि अच्छे अच्छे वक्ता भी लाजवाब हो जाएं। वो किरदारों में ऐसे रंग भर देती हैं जैसे सदियों से उस किरदार को जीती आई हों। वो जीती जागती किसी देवी की मूरत सी लगती हैं।

ऐश्वर्या राय, जिनकी सुंदरता केवल उम्र के साथ बढ़ी है। प्रियंका चोपड़ा ने एक बार टिप्पणी की थी कि ऐश्वर्या राय बच्चन को बनाने के लिए भगवान ने एक सप्ताह का वक्त लिया था और हम इस बात से दिल से सहमत हैं। ऐश्वर्या ने अपनी बुद्धिमत्ता और नेकदिली से हर बार हमें दिखाया है कि वह एक सुंदर चेहरे से बहुत अधिक है। वह पूरे राष्ट्र की प्रिय हैं। ऐश्वर्या राय ने इस बार के आजादी दिवस पर मेलबोर्न आईआईएफएम (मेलबोर्न के भारतीय फिल्म महोत्सव) में अपना तिरंगा झंडा फहराकर हम सबको पुलकित कर दिया था। ऐसा करने वाली वो पहली भारतीय बन गई हैं। लेकिन ये कोई पहला मौका नहीं था जब विश्व सुंदरी ने हम सबका सिर ऊंचा किया हो।ऐसे कई मौके आए हैं जब उन्होंने विश्व पटल पर देश को गौरवांवित किया है।

यूएन एड्स के लिए सद्भावना राजदूत

2012 में, ऐश्वर्या को यूएनएड्स के अंतरराष्ट्रीय सद्भावना राजदूत के रूप में नियुक्त किया गया था और तब से वो बच्चों को संक्रमण से बचाने और एंटीरेट्रोवाइरल उपचार तक पहुंच बढ़ाने के बारे में जागरूकता फैला रही हैं। उन्होंने महिलाओं के साथ काम किया, इस रोग से जुड़े सामाजिक कलंक को तोड़ने में मदद की और दुनिया में बदलाव करने के लिए एक सेलिब्रिटी होने की ताकत का इस्तेमाल किया।

वैक्स की मूर्ति

आजकल, प्रसिद्ध मैडम तुसाद के मोम संग्रहालय में मूर्ति लग जाना किसी सेलिब्रिटी के लिए इतनी भी बड़ी बात नहीं है। लेकिन कुछ साल पहले ही ऐसा दृश्य नहीं था। जब अमिताभ बच्चन अपने मोम संग्रहालय के लिए सबसे पहले बॉलीवुड सेलिब्रिटी बन गए, तो सभी ने सोचा था कि इसके बाद सुपरस्टार रजनीकांत की ही वैक्स स्टैचू लगेगी। लेकिन अमिताभ बच्चन के बाद किसी की मूर्ति लगी तो वह थीं ऐश्वर्या। उन्होंने अपनी वैश्विक लोकप्रियता के कारण उन्हें हरा दिया था।

बॉलीवुड की बार्बी डॉल

कैटरीना कैफ को बार्बी ड्रेस में देखकर हम सबको बड़ा ही प्यारा लगा था। वो एकदम किसी गुड़िया की तरह लग रही थीं। लेकिन सोचिए अगर बार्बी हमारी हिंदुस्तानी लिबास में हमारी सबसे चहेती अभिनेत्री की शक्ल में हो तो? हां ऐसा हुआ था। बार्बी डॉल बनाने वाली विश्वस्तरीय कंपनी मैटेल ने बॉलीवुड बार्बी नाम की बार्बी गुड़िया की एक नई लाइन का शुभारंभ किया था जो ऐश्वर्या राय पर आधारित है। इसके साथ, वह सेलिब्रिटी बार की उस सूची में शामिल हो गईं जिसमें बियॉन्स, एलिजाबेथ टेलर और डायना रॉस जैसे नाम शामिल हैं।

दुनिया में सबसे खूबसूरत महिला

17,000 से अधिक वेबसाइटें उनके लिए समर्पित हैं। ऐश्वर्या राय बच्चन को दुनिया में सबसे खूबसूरत महिला के रूप में जाना जाता है। वो तकरीबन हर एक सौंदर्य और लाइफस्टाइल पत्रिकाओं में शीर्ष पर बनी रही हैं। उन्होंने अपने करियर के सभी पदों को करीने से संभाला है। 2004 की फ़िल्म ट्रॉय के लिए वह सौंदर्या हेलेन की भूमिका निभाने के लिए सबसे पहले चुनी गई अभिनेत्री थीं लेकिन फिल्म कुछ ज्यादा ही कामुक दृश्यों के कारण उन्होंने इस फिल्म को करने से इन्कार कर दिया था।

कान फिल्म समारोह में ज्यूरी

उन्होंने कान फिल्म समारोह में रेड कार्पेट पर सालों से बॉलीवुड और भारत का प्रतिनिधित्व किया है। वर्ष 2003 में वो कान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल की ज्यूरी के रूप मेंसम्मानित होने वाली बॉलीवुड की पहली अभिनेत्री बन गईं। वो लगातार कान फिल्म महोत्सव में अपनी गरिमामय मौजूदगी से लोगों को अचंभित करती रहती हैं। उनका हर मूवमेंट दुनिया भर में खबर बनता है।

डेविड लेटरमैन को करारा जवाब

उस पल जब ऐश्वर्य राय ने अपने शो पर डेविड लेटरमैन में अपनी हाजिरजवाबी से आग लगा दी थी, वह पल हर एक हिंदुस्तानी के लिए शानदार था। विडंबना ये थी कि ऐश्वर्या राय से वहां पूछा जा रहा था कि क्या भारत में वयस्क लोगों के लिए भी अपने माता-पिता के साथ रहना जरूरी है। ऐश्वर्या राय ने इस सवाल में छिपे कटाक्ष को भांपते हुए शानदार जवाब दिया था कि हाँ, हमारे यहां माता-पिता से रात का भोजन साथ में खाने के लिए अपॉइंटमेंट नहीं लेना पड़ता है। वहां मौजूद ने तालियों की गड़ागड़ाह और आह्लाद से ऐश्वर्या के इस जवाब की पुरजोशी की। इसी के साथ डेविड लाजवाब हो गए थे या शायद उन्हें सही जवाब मिल गया था।

वो वीडियो यहां देखें,

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