पारंपरिक कपड़े और कला को आधुनिकता में बदलने का हुनर जानती हैं ‘मालिनी’

‘Krsnah’ के नाम से महिलाओं के लिए कपड़े बनाती हैं मालिनीमालिनी बेंगलुरु में रहकर काम कर रही हैं मालिनी के पास कपड़ा उद्योग में दो दशक का अनुभव21 साल की उम्र में पहली बार लगाई प्रदर्शनी

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बेंगलुरु में मालिनी मुडप्पा की वर्कशॉप में देश भर के कपड़ों की झलक देखने को मिल जाएगी। फिर चाहे वो मध्य-प्रदेश के महेश्वर का कपड़ा हो या फिर तमिलनाडु के कांचीपुरम का। दो साल पहले मालिनी ने ‘Krsnah’ की शुरूआत की थी। आज उनके लिए ‘Krsnah’ किसी जादू से कम नहीं है जो उनको हर दिन उत्साहित करता है। ये महिलाओं के लिए कपड़े बनाने की जगह हैं जिनको पहनकर वो चेरिश्ट, महत्वपूर्ण और खास लगती हैं।

मालिनी के पास कपड़ा उद्योग का दो दशक से भी ज्यादा का अनुभव है। इन्होने विभिन्न बड़े ब्रांड जैसे Abercombie & Fitch और GAP के लिए काम किया। अपना काम शुरू करने से पहले वो ‘Levi Strauss & Co.’ में काम कर रही थीं। यहां पर वो दक्षिण एशिया के प्रमुख के तौर पर काम कर रही थीं। मालिनी का कहना है कि हर ब्रांड में काम करने के दौरान उन्होने काफी कुछ सीखा, लेकिन अपना खुद का काम शुरू करने का सपना देखना उन्होने कभी नहीं छोड़ा। अपने काम को शुरू करने का आइडिया उनको तब आया जब उन्होने देश भर के स्वदेशी कारीगरों के साथ काम किया। महिलाओं के कपड़ों में पारंपरिक रंगाई, छपाई और बुनाई की तकनीक ने उनको काफी प्रभावित किया और आज वो अपनी बहन शोभना शंकर के साथ अपने सपनों को पूरा कर रही है।

मालिनी को बचपन से ही फैशन और स्टाइल की समझ थी। इनके पिता मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विस में थे। इसलिए इनका परिवार घुमता ही रहता था। मालिनी के मुताबिक उनका बचपन जीप और जोंगा के साथ यात्राओं में बीता। इस दौरान ये कश्मीर, असम और पुणे में रहे। वो अपनी मां को आर्मी अफसरों की पार्टी में हिस्सा लेने के लिए तैयार होते हुए देखती थी तो वो भी चाहती थी कि वो भी बड़ी होकर ऐसी ही सुंदर दिखें। उनका कहना है कि रंगों को लेकर प्यार और स्टाइल उनको अपनी मां से विरासत में मिला। वो काफी सुंदर थी जिनको अपने में विश्वास था। उन्होने कभी भी आंखे मूंद कर फैशन का पीछा नहीं किया।

जब भी कोई सलीके से कपड़े पहनता है तो वो दूसरों के मुकाबले अपने को ज्यादा आश्वस्त महसूस करता है। बचपन में मालिनी ने डिजाइन और पैटर्न पर कई तजुर्बे किये। वो कई बार साड़ियों को काट कर अपने लिए और अपनी बहन के लिए स्कर्ट बना देती थीं। जब वो स्कूल से निकल कर कॉलेज आईं तो उन्होने महसूस किया कि उनके पास ऐसा कोई कपड़ा नहीं हैं जो उनको आकर्षित लगें। बस फिर क्या था उन्होने बॉम्बे डाइंग का कपड़ा लिया और अपने लिए कपड़े सिलने शुरू कर दिये। उनकी डूंगरी काफी पसंद थी। धीरे धीरे उनके डिजाइन किये कपड़े लोगों को भाने लगे और उनके दोस्त अपने लिए उनसे कुछ बनाने को कहते। मालिनी अपने खाली वक्त में लोगों की पसंद को पूरा करती इससे उनका जेब खर्च भी निकल जाता। मालिनी का कहना है कि उन्होने काफी पहले ही कपड़ों के रंग, कपड़ों को काटने का तरीका, उनको सफाई से सिलने का तरीका जान लिया था। इस कारण लोगों को उनके सिले कपड़े पसंद आते और वो उसे पहन कर खुशी महसूस करते।

मालिनी ने 21 साल की उम्र में पहली बार अपने सिले कपड़ों की प्रदर्शनी लगाई। मालिनी का कहना है कि आज ना सिर्फ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बल्कि अपने देश में भी महिलाओं में अपने कपड़ों को लेकर समझ बड़ी है। अब वो रेंप में उतरने वाले फैशन के पीछे नहीं भागती। मालिनी का कहना है कि फैशन वो है जिसमें आप आराम के साथ साथ उसे पहन कर अच्छा महूसस करें। मालिनी की छह सदस्यों की एक टीम है। इस काम में उनकी बहन फेसबुक का काम संभालती हैं। मालिनी के पास एक मॉस्टर कटर और तीन टेलर हैं। ‘Krsnah’ का दावा है कि यहां पर हर किसी के लिए कुछ ना कुछ मौजूद है।

मालिनी मुडप्पा
मालिनी मुडप्पा

‘Krsnah’ सीधे बुनकरों से कपड़ा खरीदता है। जिसे बड़ी मेहनत से तैयार किया जाता है और वो अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होता है। जिसे ये विभिन्न स्टाइल और लोगों की पसंद के अनुरूप सिलते हैं। अपने काम में ये देश के विभिन्न हिस्सों की पारंपरिक कला को जोड़ने की कोशिश करते हैं। फिर चाहे वो गुजरात का अजरख हो या फिर महाराष्ट्र का खन्न या फिर उड़ीसा का इकत। मालिनी का कहना है कि वो अपने कपड़ों में इन सभी का मिश्रण करती है। तभी तो इनके बनाये कपड़ों की फिटिंग और फिनिशिंग काफी अच्छी होती है।

मालिनी का कपड़ा उद्योग में सालों का तजुर्बा है। इस सालों के दौरान उन्होने कई बड़े ब्रांड के लिए काम किया। यही वजह है कि उन्होने अपने कपड़ों के लिए मानक काफी ऊंचे रखे हैं। खासतौर से अपने बनाये कपड़ों में वो सफाई और सटीकता का खास ख्याल रखती हैं। मालिनी तब तक किसी तैयार कपड़े को नहीं भेजती जब तक की वो खुद उसकी गुणवत्ता की जांच ना कर ले। उनके सामने बड़ी चुनौती अपने टेलर और कटर को तय मानको के अनुरूप काम कराना होता है। शुरूआत में ये उनके लिए काफी कठिन काम था लेकिन अब मालिनी को उन के काम को लेकर विश्वास पैदा हो गया है कि वो जो भी कुछ करेंगे वो तय मानकों के अनुरूप ही होगा। ऐसे में उन्होने अब उनके काम पर नजर रखना भी छोड़ दिया है। आज मालिनी का काम ही है कि हर रोज ग्राहक उनकी सेवाओं की तारीफ करते हैं जिससे उनका मनोबल दिन ब दिन बढ़ता जा रहा है।