जानिये उस शख्स के बारे में जो दलित कारोबारियों की फौज खड़ी करने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहा है 

मिलिंद कांबले अगले दस सालों में देश को कम से कम 100 दलित अरबपति देने का सपना लेकर जी रहे हैं

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मिलिंद कांबले आधुनिक भारत के वो क्रांतिकारी नेता हैं जिन्होंने बिना किसी नारेबाजी और धरना-प्रदर्शन के ही एक बड़ी क्रांति का सूत्रपात किया। इसी क्रांति की वजह से दलितों की सोच बदली, उनके काम करने का अंदाज़ बदला, उन्हें कारोबार की दुनिया में भी अपने पैर जमाने का मौका मिला। मिलिंद कांबले ने दलित चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (डिक्की) की स्थापना कर दलित समुदाय के उद्यमियों और कारोबारियों को एकजुट किया। 

डिक्की के ज़रिये मिलिंद ने दलित युवाओं को कारोबार करने के प्रेरित और प्रोत्साहित किया, कारोबार करने के तौर-तरीके दिखाए और समझाए। मिलिंद कांबले की पहल और कोशिशों का ही नतीजा है कि हर साल हज़ारों दलित उद्यमी बन रहे हैं। अगर मिलिंद चाहते तो वे सरकारी नौकरी पर लग सकते थे लेकिन समाज सेवा के मकसद से वे उद्यमी बने। मिलिंद अपने कारोबार पर पूरा ध्यान देते हुए तेज़ी से तरक्की भी कर सकते थे, लेकिन उन्होंने दलितों की मदद करने की ज़िम्मेदारी अपने कंधों पर ली है।

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