घरवालों को वक्त देने की जगह फोन पर लगे रहते हैं तो ये आपके ऑफिस पर भी बुरा असर डालता है

हर समय फोन पर लगे रहने की आदत पर्सनल लाइफ के साथ-साथ प्रोफेशनल लाइफ पर भी डालती है असर...

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अगर आप भी दिनभर अपने फोन में घुसे रहते हैं, भले वो डिनर टेबल पर सबके साथ खाने का वक्त हो या तब भी जब पूरा परिवार साथ बैठकर गपशप कर रहा हो तो ये आपके लिए ही खतरनाक आदत है।

साभार: ट्विटर
साभार: ट्विटर
यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास की ऑथर्स की एक टीम ने शोध में पाया, काम के लिये घर में मोबाइल उपकरणों का इस्तमाल कर्मचारी के दफ्तर और साथी पर गलत असर डालते हैं। फोन में ही लगे रहने से न केवल इंसान की कार्यक्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है बल्कि उसका जीवनसाथी भी समान रूप से दिक्कतों का सामना करता है।

यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास की ऑथर्स की एक टीम ने शोध में पाया है कि काम के लिये घर में मोबाइल उपकरणों का इस्तमाल कर्मचारी के दफ्तर और साथी पर गलत असर डालते हैं। यूटीए कॉलेज ऑफ बिज़नेस के मैनेजमेंट के असिसटेंट प्रोफेसर वायन क्रॉफर्ड उन 5 लेखकों में से एक थे, ‘जिन्होंने योर जॉब इज़ मेस्सिंग विद माइन!’ लिखा। जर्नल ऑफ ऑक्यूपेशनल हेल्थ साइकोलॉजी में एक लेख भी छपा जिसका नाम था, मोबाइल डिवाइस का घर में काम के लिये इस्तमाल, फैमिली टाइम और साथी के लिये नुकसानदेह।

इस रिसर्च में वायन का साथ दिया बेलर यूनिवर्सिटीके डॉन कर्सन, उटाह स्टेट यूनिवर्सिटी के मेरेदिथ थॉम्पसन और टेक्सास ए एंड एम यूनिवर्सिटी के ड्वायन व्हीटेन और वेन्डी बोसवेल ने। कुल 344 शादी-शुदा जोड़ों पर किये गए इस सर्वे में सभी प्रतिभागियों ने फुल टाइम काम किया और घर में मोबाइल डिवाइस और टैबलेट का घर में काम के लिये इस्तमाल किया। क्रॉफर्ड के मुताबिक, “बहुत से ऐसे रिसर्च हो चुके हैं जो टेक्नोलॉजी पर किये गए हैं और उनका असर कर्मचारियों पर कैसे होता है। पर इस बार हमने ये रिसर्च किया कि कैसे ये जीवनसाथी के काम पर भी असर करता है।“

सर्वे के मुताबिक फैमिली टाइम में इस्तमाल किये गए डिवाइस की वजह से काम को लेकर संतुष्टि में कमी के अलावा परफोर्मेस पर भी नकारात्मक असर दिख रहा था। क्रॉफर्ड बताते हैं, “इस बात में कोई आश्चर्य नहीं है कि अगर एक व्यक्ति घर में मोबाइल का इस्तमाल कर रहा है, तो साथी के साथ मतभेद होंगे। फौर मिली टाइम में कई और दूसरे काम हो सकते हैं, पर तब भी दफ्तर के काम में लगे रहना, घर में भी और दफ्तर में भी असर करता है। तो कंपनी को इस बात की चिंता हो ना हो कि कर्मचारी को हर वक्त काम कराते रहना किस तरह से उसपर असर कर रहा है, फर्म को ये बात समझनी होगी कि उनकी वजह से अगर पति-पत्नी के रिश्ते खराब हो रहे हैं, तो उसी बात का असर उनके काम पर भी आखिरकार पड़ने वाला है।“

अब्दुल रशीद, डिपार्टमेट ऑफ मैनेजमेंट के चेयरपर्सन कहते हैं कि क्रॉफर्ड का रिसर्च और काम बिज़नेस के लिहाज़ से काफी महत्पूर्ण है। वो बताते हैं, “काम के बाद का अलग समय मोबाइल पर काम के लिये ही लगे रहना, आखिर में जजब हमारे ही काम को प्रभावित करता है, तो बेहतर है कि हमें काम के वक्त में ही केवल कर्मचारियों से महत्पूर्ण और बेहतर काम कराया जाए। और परिवार के साथ का उनका वक्त बिल्कुल काम से दूर हो।“

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IIMC दिल्ली से पत्रकारिता की एबीसीडी सीखी। नेटवर्क-18 और इंडिया टुडे के लिए दो साल तक काम किया। घूमने का जुनून है। इस जुनून को chalatmusaafir.in पर देखा जा सकता है। देश के कोने-कोने में जाकर वहां की विरासत और खासियत को सामने लाने का सपना है।

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