नौकरी चाहिए? “रेफर मी”

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आज के कड़े मुकाबले के दौर में नौकरी मिलना जितना मुश्किल है, उतना ही मुश्किल कंपनियों के लिए काबिल लोगों को ढूंढ कर अपने यहां पर नौकरी देना। ऐसे में कंपनियां कई बार अपने ही कर्मचारियों से अच्छे लोगों को ढूंढ कर लाने को कहती है और बदले में आर्थिक या दूसरे तरीके से प्रोत्साहन भी देती है। लेकिन कई बार इस प्रक्रिया में खतरा भी रहता है कर्मचारी अपने लाभ के लिए तथ्यों की गलत जानकारियां कंपनियों को दे देते हैं। कंपनियों की इसी समस्या को देखते हुए रश्मि नंदन ने इस क्षेत्र में काम करने का फैसला लिया। उन्होने तय किया कि नौकरी की चाहत रखने वालों और कंपनियों की जरूरत के मुताबिक काबिल लोगों को एक दूसरे से जोड़ने का काम करेंगे। ऐसे करने से दोनों पक्षों को फायदा होगा।

रश्मि नंदन
रश्मि नंदन

रश्मि ने इस काम की शुरूआत तब कर दी जब वो एमएसआरआईटी से इंजीनियरिंग कर एचसीएल में नौकरी कर रहे थे। यहां पर कंपनी में भर्तियों से जुड़ी कई मेल आती थी। तब उनके मन में ये बात आई कि क्यों ना वो अपने दोस्तों के साथ जो अलग अलग कंपनियों में काम करते थे सभी मिलकर एक ग्रुप बनाकर नई नौकरी से जुड़ी जानकारी एक दूसरे के साथ बांटे। ऐसे में वो उन दोस्तों की भी मदद कर सकते थे जिनको नौकरी नहीं मिली थी या जो नए मौके की तलाश में थे। अप्रैल, 2012 तक उनके पास 100 कंपनियों में मौजूद अपने दोस्तों से सम्पर्क स्थापित कर लिया था। तब उन्होने सोचा कि क्यों ने इस चीज को दूसरे लोगों के लिए भी शुरू किया जाए जो नौकरी की तलाश में रहते हैं।

‘रेफर मी’ नाम की उनकी कंपनी में 5 लोगों की सशक्त टीम है। जिनमें 4 उनके एमएसआरआईटी के पूर्व साथी हैं जबकि एक सदस्य आईआईएम इंदौर से है। जो इनके कारोबार के विकास में मदद कर रहा है। जून, 2013 को शुरू हुई ‘रेफर मी’ कंपनी ना सिर्फ आईटी से जुड़ी कंपनियों में लोगों की नौकरियां लगाती है बल्कि इलेक्ट्रिकल, तेल और पेट्रोलियम उद्योग से जुड़ी कंपनियों में इन लोगों ने लोगों की नौकरी लगाई है। ये लोग अपने प्रचार के लिए फेसबुक और लिंगडिन का सहारा लेते हैं। जहां से इन लोगों को अच्छी प्रतिक्रिया मिलती है। लोगों की बढ़ती दिलचस्पी को देखते हुए रश्मि ने अपनी अच्छी खासी नौकरी को छोड़ इस पेशे को पूरी तरह अपना लिया है।

उनके इस काम में कई चुनौतियां भी हैं। क्योंकि वो मानते हैं कि उन्होने कॉलेज की पढ़ाई खत्म करने के एक साल बाद ही इस काम को शुरू कर दिया था जबकि इसमें किसी तकनीकी विशेषज्ञ व्यक्ति की जरूरत थी जो उनके विचार को शानदार वेबसाइट बनाकर हकीकत में बदलना जानता हो। इसके अलावा शुरूआत में पैसों की समस्या एक बड़ी दिक्कत थी, इसलिए रश्मि को इस काम की शुरूआत के लिए अपनी बचत के अलावा अपने उन दोस्तों से कर्ज लेना पड़ा जो नौकरी पर थे। इतना ही नहीं कम्पनियों के कर्मचारियों के साथ संबंध बनाना और उनका विश्वास जीतना शुरूआती दिनों में उनके लिए बड़ा मुश्किल काम था।

‘रेफर मी’ में किसी भी कंपनी का कर्मचारी अपने यहां चल रही भर्ती की जानकारी डाल सकता है। जबकि जिसको नौकरी की जरूरत होती है वो इस साइट में पैसे देकर अपने को रजिस्टर कर सकता है। रजिस्ट्रेशन की फीस उम्मीदवार की सीटीसी के मुताबिक तय होती है, अगर वो नौकरी कर रहा है तो। जबकि किसी फ्रेशर्स को 350 रुपये चुकाने होते हैं। इस वेबसाइट की खास बात ये है कि अगर रजिस्ट्रेशन के तीन महिने के अंदर किसी की नौकरी नहीं लगती है तो उसके पैसे उसे वापस मिल जाते हैं। जबकि दूसरी वेबसाइट में ऐसी सुविधा नहीं है। रश्मि का कहना है कि लोगों को किसी भी चीज को समझने के लिए वक्त की जरूरत होती है। खासतौर से अगर आप नई तरह की सेवाएं बाजार में ला रहे हों तो। रश्मि के मुताबिक जब कोई नया काम शुरू करता है तो शुरूआत में उसको कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। जैसे पैसों की दिक्कत, समय पर संसाधनों को जुटाने में परेशानी। इसके अलावा आपके आसपास मौजूद लोग आपको ज्यादा तव्वजो नहीं देते। ऐसे में धैर्य बनाये रखना सबसे जरूरी होता है बस आपको अपना आत्मविश्वास नहीं खोना चाहिए। आपको सिर्फ अपने काम में बजट की प्लानिंग, वक्त की पाबंदी और संसाधनों का उचित इस्तेमाल करना आना चाहिए।

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