UPSC टॉपर्स: ग्रैजुएशन के 12 साल बाद गांव में रहकर की तैयारी, दूसरे प्रयास में हासिल की दूसरी रैंक 

12 साल पहले गांव में रहकर किया था ग्रैजुएशन, UPSC में हासिल की दूसरी रैंक...

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 सविल सेवा की परीक्षा में हमें हर साल कुछ ऐसे युवाओं की कहानियां सुनने को मिलती हैं जो कठिन परिस्थितियों और चुनौतियों से लड़ते हुए इस मुकाम तक पहुंचते हैं। इस बार भी कई सारे युवाओं ने सफलता हासिल की जिनका सफर मुश्किलों भरा रहा। इस कड़ी में हम आपको हरियाणा की रहने वाली अनु कुमारी से रूबरू कराने जा रहे हैं जिन्होंने 12 साल पहले ग्रैजुएशन किया था।

अनु कुमारी
अनु कुमारी
अनु के परिवार वालों ने उनका काफी सपोर्ट किया। नौकरी छोड़ने के कुछ दिन बाद ही यूपीएससी का नोटिफिकेशन आया और उनके भाई ने फॉर्म भी भर दिया। लेकिन तैयारी के लिए सिर्फ डेढ़ महीने बचे थे। इस दौरान अनु ने थोड़ा बहुत पढ़कर ही एग्जाम दिया। 

भारत में आईएएस को देश की सबसे प्रतिष्ठित सेवा माना जाता है। यूपीएससी द्वारा आयोजित की जाने वाली परीक्षा का परिणाम 27 अप्रैल को घोषित हो गया। इस परीक्षा में लाखों युवा होनहारों में अपना भाग्य आजमाया था जिसमें से मात्र कुछ लोगों को ही सफलता हासिल हुई। सबसे कठिन मानी जानी वाली सविल सेवा की परीक्षा में हमें हर साल कुछ ऐसे युवाओं की कहानियां सुनने को मिलती हैं जो कठिन परिस्थितियों और चुनौतियों से लड़ते हुए इस मुकाम तक पहुंचते हैं। इस बार भी कई सारे युवाओं ने सफलता हासिल की जिनका सफर मुश्किलों भरा रहा। इस कड़ी में हम आपको हरियाणा की रहने वाली अनु कुमारी से रूबरू कराने जा रहे हैं जिन्होंने 12 साल पहले ग्रैजुएशन किया था।

हरियाणा के सोनीपत जिले की रहने वाली 31 वर्षीय अनु ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिन्दू कॉलेज से 2006 में फिजिक्स ऑनर्स किया था। इसके बाद उन्होंने आईएमटी नागपुर से एमबीए किया और फिर कॉर्पोरेट की नौकरी में व्यस्त हो गईं। लगभग 8-9 साल तक प्राइवेट नौकरी में रहने के दौरान उन्हें लगा कि वे अपने काम से संतुष्ट नहीं हैं। इसलिए उन्होंने करियर बदलने का फैसला किया और यूपीएससी के बारे में सोचना शुरू किया। वह अपने घर वापस आ गईं और तैयारी शुरू कर दी। अनु की शादी हो चुकी है और उनका एक चार साल का छोटा बेटा वियान भी है।

अनु के परिवार वालों ने उनका काफी सपोर्ट किया। नौकरी छोड़ने के कुछ दिन बाद ही यूपीएससी का नोटिफिकेशन आया और उनके भाई ने फॉर्म भी भर दिया। लेकिन तैयारी के लिए सिर्फ डेढ़ महीने बचे थे। इस दौरान अनु ने थोड़ा बहुत पढ़कर ही एग्जाम दिया। लेकिन एक नंबर से वे प्री नहीं क्वॉलिफाई कर सकीं। घर पर बेटे के साथ रहने की वजह से उन्हें पढ़ने में कई दिक्कतें आती थीं और ध्यान भी भंग होता था। इसलिए उन्होंने बेटे को अपनी मां के पास छोड़ा और अपने मौसी के यहां चली आईं। वे बताती हैं कि जिस गांव में रहकर अपनी तैयारी कर रही थीं वहां अखबार तक नहीं आता था। अनु ने इंटरनेट के माध्यम से अपनी तैयारी को अंजाम दिया।

अनु ने लगभग डेढ़ साल तक जमकर मेहनत की और आज उनकी मेहनत का फल पूरी दुनिया के सामने है। अनु ने कहा, 'तकनीकी तौर पर माना जाए तो यह मेरा पहला अटेंम्ट था, क्योंकि पहली बार मैंने कोई तैयारी नहीं की थी।' अनु कहती हैं कि वो सिविल सर्विस इसलिए करना चाहती थीं क्योंकि उनके भीतर महिलाओं और बच्चों के लिए काम करने का जुनून है। अपनी रणनीति के बारे में बताते हुए वह कहती हैं कि किसी को भी इस एग्जाम को पास करने के लिए कोचिंग की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, 'ऑनलाइन रिसोर्स इतनी आसानी से उपलब्ध हैं कि कोचिंग जाने का मतलब ही नहीं है।'

अनु ने मुख्य परीक्षा के लिए समाज शास्त्र को अपना वैकल्पिक विषय चुना था। उन्होंने बताया, 'प्री एग्जाम के पहले दो महीने सिर्फ प्री की तैयारी की। टेस्ट सीरीज जॉइन की और उनका बार-बार रिवीजन किया। पहले मैं 65-70 नंबर स्कोर करती थी, लेकिन बाद में मुझे 140-150 नंबर आने लगे। मुख्य परीक्षा में निबंध के लिए काफी अभ्यास किया।' अनु ने इंटरव्यू के पहले 5 बार मॉक टेस्ट भी दिए, जिससे कि उन्हें काफी मदद मिली। इंटरव्यू में उनसे महिला विकास और संयुक्त परिवार जैसे मुद्दों पर सवाल किए गए। वह कहती हैं कि अगर आप दृढ़ निश्चयी हैं तो आपको मंजिल जरूर मिलेगी।

अनु जिस गांव में रहकर अपनी तैयारी कर रही थीं वहां कोई अखबार तक नहीं आता था। उन्होंने सारी मेहनत इंटरनेट के जरिए ही की। इस सफलता से बेहद प्रसन्न अनु कहती हैं, 'मैं बहुत खुश हूं। परिवार दोस्तों की शुक्रगुजार हूं। शादी और नौकरी लगने के बाद फिर से पढ़ना मुश्किल होता है, लेकिन परिवारवालों की मदद ने इसे आसान बना दिया।' अनु के पिता काफी प्रगतिशील ख्यालों वाले व्यतक्ति हैं। उन्होंने कहा, 'हमें बेटों की तरह ही बेटियों को भी पूरी आजादी देना चाहिए। अगर आपकी बेटी कुछ करना चाहती है तो उसकी पूरी मदद कीजिए।' घर और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाकर सफलता हासिल करने वाली अनु वाकई में पूरे देश की बेटियों के लिए प्रेरणादायक बन गई हैं।

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