पुरुषों के अंडरगारमेंट बेचने वाला पहला ई-कॉमर्स प्लैटफॉर्म है बटटॉक्स

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ऐसे समय में जब हम ऑनलाइन किराने का सामान भी खरीद लेते हैं, बिल भुगतान करते हैं और कमोडिटी खरीदते हैं, इस सुविधा को देखते हुए तीन युवा उद्यमियों ने पुरुषों को बेहतर अंडरवियर की खरीद में मदद करने के लिए तकनीक का इस्तेमाल किया है। चेन्नई के रहने वाले बृजेश देवारेड्डी, सुरेज सलीम और मनीष किशोर ने ई-कॉमर्स प्लेटफार्म बटटॉक्स का शुभारंभ किया है, जो अपने ग्राहकों को उनके लिए मुफीद अंडरवियर खरीदने की सुविधा प्रदान करता है।

बेशक बटटॉक्स, अंडरगारमेंट ऑनलाइन बेचने वाला देश का पहला स्टार्टअप नहीं हैं। हाल के वर्षों में, जिवामे और प्रिटी सीक्रेट्स जैसे कई ऑनलाइन उद्यमों ने भारत में इनरवियर मार्केट को बढ़ाने में मदद की है, इस मार्केट का 2024 तक 68,270 करोड़ (10.2 अरब डॉलर) तक पहुंच जाने का अनुमान है। लेकिन बटकॉक्स निश्चित रूप से पहला उद्यम है जो पुरुषों के इनरवियर पर ध्यान केंद्रित करता है।

रूढ़िवादी भारत में, आम तौर अच्छी फिटिंग वाले इनरवियर मौजूद नहीं होते है। जबकि महिलाएं आमतौर पर बिना अपने शरीर के आकार का ध्यान दिए ऐसे ही लॉन्जरी खरीद लेती हैं वहीं पुरुष शायद ही कभी अपने अंडरग्राम के लिए काफी ध्यान देते हैं। यहां तक कि भारत में ऑनलाइन शॉपिंग एप्स में पुरुषों के अंतर्वस्त्रों की वर्गीकृत श्रेणियां नहीं होती हैं। 

ऐसे समय में जब हम ऑनलाइन किराने का सामान भी खरीद लेते हैं, बिल भुगतान करते हैं और कमोडिटी खरीदते हैं, इस सुविधा को देखते हुए तीन युवा उद्यमियों ने पुरुषों को बेहतर अंडरवियर की खरीद में मदद करने के लिए तकनीक का इस्तेमाल किया है। चेन्नई के रहने वाले बृजेश देवारेड्डी, सुरेज सलीम और मनीष किशोर ने ई-कॉमर्स प्लेटफार्म बटटॉक्स का शुभारंभ किया है, जो अपने ग्राहकों को उनके लिए मुफीद अंडरवियर खरीदने की सुविधा प्रदान करता है। बेशक बटटॉक्स, अंडरगारमेंट ऑनलाइन बेचने वाला देश का पहला स्टार्टअप नहीं हैं। हाल के वर्षों में, जिवामे और प्रिटी सीक्रेट्स जैसे कई ऑनलाइन उद्यमों ने भारत में इनरवियर मार्केट को बढ़ाने में मदद की है, इस मार्केट का 2024 तक 68,270 करोड़ (10.2 अरब डॉलर) तक पहुंच जाने का अनुमान है। लेकिन बटकॉक्स निश्चित रूप से पहला उद्यम है जो पुरुषों के इनरवियर पर ध्यान केंद्रित करता है।

कितना जरूरी है ये प्लैटफॉर्म-

रूढ़िवादी भारत में, आम तौर अच्छी फिटिंग वाले इनरवियर मौजूद नहीं होते है। जबकि महिलाएं आमतौर पर बिना अपने शरीर के आकार का ध्यान दिए ऐसे ही लॉन्जरी खरीद लेती हैं वहीं पुरुष शायद ही कभी अपने अंडरग्राम के लिए काफी ध्यान देते हैं। यहां तक कि भारत में ऑनलाइन शॉपिंग एप्स में पुरुषों के अंतर्वस्त्रों की वर्गीकृत श्रेणियां नहीं होती हैं। यही कारण है कि देवारेड्डी, सलीम और किशोर ने बटटॉक्स की शुरुआत की और फिर बिक्री शुरू करने से पहले एक साल में बाजार अनुसंधान पर खर्च किया। किशोर के मुताबिक, भारतीय पुरुष अक्सर नहीं जानते हैं कि जब उनके अंडरवियर को बदलने का समय आ गया है। बेचैनी पैदा करने के अलावा, खराब फिटिंग के अंडरवियर से स्वास्थ्य को खतरे भी हो सकते हैं।

सेक्शुअल मेडिसिन कंसल्टेंट और एक प्रोफेसर राजन भोंसले के अनुसार, सही आकार के अंडरवियर पहनने से व्यक्ति के यौन स्वास्थ्य पर सीधा प्रभाव पड़ता है और उचित फिट के कपड़े पहनने से बांझपन से जुड़े मुद्दों को कम करने में मदद मिल सकती है। देवारेड्डी के मुताबिक, यह ऐसा विषय है कि कोई कभी भी इसके बारे में बात नहीं करता है। महिलाओं के स्वास्थ्य के मुद्दों पर बात होनी शुरू हो गयी हैं लेकिन पुरुष इस मुकाबले पिछड़े होते हैं। इन सभी को हाइलाइट करना होगा और तभी हमें लगा कि इस तरह एक प्लेटफार्म बनाया जाना चाहिए।

बटटॉक्स का सब्सक्रिप्शन मॉडल

बटटॉक के पास एक सदस्यता मॉडल है, जहां ग्राहकों को सेवा के लिए पंजीकरण के बाद समय-समय पर उनके दरवाजे पर उत्पादों का लाभ मिलता है। कंपनी की तीन अलग-अलग सदस्यता योजनाएं हैं, जो कि 999 से लेकर 4999 रुपए तक हैं और वार्षिक प्लान 2700 से 14000 तक के हैं। कीमतें ब्रांड के आधार पर भिन्न-भिन्न हैं। यूसीबी, एफसीयूके, पार्क एवेन्यू और एम्पोरियो अरमानी जैसे ब्रांड इस प्लैटफॉर्म पर खरीदे जा सकते हैं। प्रत्येक बॉक्स में जाने वाले उत्पाद एक संपूर्ण प्रश्नावली पर आधारित होते हैं जो कि साइन अप करते समय ग्राहकों को भरना होता है।

हाल में आई एक रिपोर्ट भारतीय इनरवियर मार्केट: ट्रेन्ड्स एंड ऑपर्च्यूनिटीज़ के मुताबिक, भारत में इनरवियर उद्योग में भारी वृद्धि की क्षमता है, जो पिछले कुछ सालों में भारतीय बाजार में बड़े अंतर्राष्ट्रीय ब्रांडों के प्रवेश से स्पष्ट है। संगठित बाजार के बढ़ते आकार और असंगठित बाजार में गिरावट का हिस्सा, मूल्य संवेदनशीलता से लेकर ब्रांड संवेदनशीलता तक एक विशिष्ट बदलाव दिखाता है। बटटॉक्स के फाउंडर बृजेश और उनकी टीम अब तक अपनी प्रगति से खुश हैं और उनकी कंपनी में लक्ष्य को अपने ऑर्डर वॉल्यूम को बढ़ाया जा रहा है। खोजी क्षमता वाले ग्राहकों की मदद करने के लिए नए मिक्स और मिश्रणों पर भी ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

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