आंध्र प्रदेश में पहली सरकारी नौकरी हासिल करने वाली ट्रांसजेंडर जानकी

जो जानकी अपना जीवन जीने के लिए मांगती थी भीख, आज आंध्र प्रदेश सरकार की मदद से कर रही है सरकारी नौकरी...

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पिछले पांच सालों से जानकी धर्मशाला में रहती थीं और गुजारे के लिए भीख मांगा करती थीं। लेकिन आज आंध्र प्रदेश सरकार की ओर से सरकारी नौकरी मिल जाने के बाद वे बेहद खुशी हैं। वे अभी कडप्पा जिले के चेन्नुरू मंदिर में रह रही हैं।

जानकी (फोटो साभार- मुंबई मिरर)
जानकी (फोटो साभार- मुंबई मिरर)
जिले में आधार बनवाने के लिए जब रजिस्ट्रेशन हो रहा था तो डीएम ने उनसे उनकी योग्यता के बारे में जानकारी मांगी थी। जब उन्होंने अपनी पढ़ाई लिखाई के बारे में बताया तो डीएम ने उन्हें सरकारी नौकरी के लिए आवेदन करने को कहा।

26 वर्षीय जानकी को बचपन से ही पता था कि उनकी जेंडर आइडेंटिटी क्या है, लेकिन फिर भी उन्हें एक लड़के की तरह रहने और व्यवहार करने के लिए दबाव डाला जाता था। एक मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने की वजह से उनके पास घर के लोगों का कहा मानने के सिवा और कोई दूसरा चारा भी नहीं था। प्रताड़ना की वजह से घर छोड़कर भाग जाने वाली जानकी को अब सरकारी नौकरी मिल गई है और वह आंध्र प्रदेश की पहली ट्रांसजेंडर सरकारी कर्मचारी भी हैं।

मुंबई मिरर से बातचीत में जानकी कहती हैं, 'मैं जानती थी कि मैं क्या हूं। मेरी पहचान एक लड़के की नहीं थी, लेकिन मेरे घरवालों ने मुझे कभी खुद को व्यक्त करने का मौका ही नहीं दिया।' जानकी ने 2012 में कंप्यूटर साइंस में ग्रैजुएशन किया था। उसके बाद उन्होंने बी.एड. करने का फैसला लिया। हमेशा सामाजिक दबाव के चलते उन्हें हमेशा हीन भावना से ग्रस्त रहना पड़ा। ये सारी चीजें उनके दिमाग में बुरा असर डाल रही थीं। वे और ज्यादा सहन भी नहीं कर सकती थीं, इसलिए उन्होंने घर छोड़कर भाग जाने का फैसला कर लिया। वे बाकी ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों के साथ जाकर रहने लगीं। वे लोग भी अपने-अपने घरों और समाज से प्रताड़ित लोग थे।

हालांकि बाद में जानकी ने अपने घर वालों से संपर्क करने की कोशिश भी की, लेकिन उनकी मां को छोड़कर किसी ने भी उनमें दिलचस्पी नहीं दिखाई और उन्हें नजरअंदाज कर दिया। उनकी मां उनसे कभी-कभी अलग जगह पर मिलती रहती थीं। वह बताती हैं, 'कोई इंसान अपने परिवार और वहां से मिलने वाले प्रेम को नहीं भुला सकता है। लेकिन जब परिवार के लोग ही हमें कलंक के तौर पर देखने लग जाएं तो वहां रहना मुश्किल हो जाता है।'

पिछले पांच सालों से जानकी धर्मशाला में रहती थीं और गुजारे के लिए भीख मांगा करती थीं। लेकिन आज आंध्र प्रदेश सरकार की ओर से सरकारी नौकरी मिल जाने के बाद वे बेहद खुशी हैं। वे अभी कडप्पा जिले के चेन्नुरू मंदिर में रह रही हैं। जिले में आधार बनवाने के लिए जब रजिस्ट्रेशन हो रहा था तो डीएम ने उनसे उनकी योग्यता के बारे में जानकारी मांगी थी। जब उन्होंने अपनी पढ़ाई लिखाई के बारे में बताया तो डीएम ने उन्हें सरकारी नौकरी के लिए आवेदन करने को कहा। सौभाग्य की बात ये रही कि जानकी ने यह परीक्षा पास कर ली और उन्हें सरकारी नौकरी मिल गई।

विडंबना देखिये कि जानकी के पास खुद रहने के लिए घर नहीं है, लेकिन वह सरकार के उस विभाग में काम कर रही हैं जो हजारों परिवारों को अपना खुद का घर मुहैया कराता है। वे अभी आंध्र प्रदेश सरकार के राज्य आवासीय निगम में डेटा एंट्री ऑपरेटर के तौर पर काम कर रही हैं। असिस्टेंट इंजीनियर ऑफिस में तैनात जानकी तमाम गांवों से घर के लिए आने वाले आवेदनों को देखती हैं। इंजीनियर से हरी झंडी मिलने के बाद वे योग्य आवेदकों के डेटा को सिस्टम में फीड करने का काम करती हैं। सरकारी विभाग के अफसर भी जानकी के काम की खूब तारीफ करते हैं।

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