“Geekybuddha” के बोर्ड लाएं, बोरियत से निजात पाएं

बोर्ड खेलों का कल्चर वापस लाने की कोशिशबचपन के खेल नये कलेवर मेंबोर्ड खेलों की डिमांड बढ़ी

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आप अपने बचपन के उन दिनों को याद करें जब घर के बाहर बारिश हो रही हो और आपको घर में ही कुछ खेलने के लिए मजबूर होना पड़े या फिर गर्मियों के मौसम में आपकी मां आपको बाहर खेलने से रोकती थी, उस स्थिति में आप घर में क्या खेलते थे? तो सबसे पहले लूडो या सांप-सीढ़ी जैसे बोर्ड खेल ध्यान आते हैं। खेल भले ही कोई हो लेकिन आपको घर में परिवार और दोस्तों के बीच ये खेल खेलने में बड़ा मजा आता था।

धीरे-धीरे आईपेड और दूसरे टेबलेट ने बोर्ड खेलों को हमसे दूर कर दिया तो कई खेलों ने डिजिटल रूप ले लिया। बावजूद श्रीकांत बोहरा में बोर्ड खेलों को लेकर जुनून है और वो चाहते हैं कि बोर्ड खेलों का कल्चर फिर लौटे लेकिन नये मिजाज के साथ। ताकि इससे आज की पीढ़ी भी अपने से जोड़ सकें। अपने इसी नये दृष्टिकोण के साथ वो Geekybuddha खेल लेकर आएं हैं।

जोधपुर के रहने वाले बोहरा इन दिनों बेंगलौर में रहते हैं और सप्ताहांत में बोर्ड खेलों का मजा लेते हैं उनको विश्वास है कि वो इस खेल को एक उद्यम में बदल सकते हैं और एक बार फिर बोर्ड खेल प्रसिद्ध हो सकते हैं। बोर्ड खेलों के प्रति उनका लगाव और दोस्तों से मिलने वाला फीडबैक उनमें विश्वास पैदा करता है कि वो एक दिन बोर्ड खेलों को प्रसिद्ध कर देंगे।

Geekybuddha खेल के इस कारोबार में ऋतु चौधरी सह-संस्थापक हैं। जो बोहरा के साथ मिलकर ऐसे बोर्ड खेल तैयार करने में जुटी हैं जो नई पीढ़ी को भी अपील करते हैं। इनका पहला उत्पाद ताश के पत्तों का है। साल्ट मरचेंट नाम का ये उत्पाद पहले से ही बाजार में है। इस खेल की थीम नमक के कारोबर से जुड़ी है। इस खेल में आप एक नमक के कारोबारी होते हैं और आपकी कोशिश होती है 50 साल पुराने अपने नमक के कारोबार को बचाने की, जिसे आपके दादा ने शुरू किया था।

बोर्ड खेल को नए रूप और कलेवर में लाने के लिए ये लोग पिछले 6 महीने से काम कर रहे हैं। इसके काफी सारे संस्करण तैयार किये गए हैं जिनको अलग अलग तरह के सैकड़ों लोगों ने परखा है ताकि बोर्ड खेल बनाने में कोई कमी ना रह जाए। ‘श्रीशेयर्स’ इनमें से एक बढ़िया बोर्ड खेल हैं जिसको खेलने की आपको लत लग सकती है और आप घंटों इसको खेल कर अपना वक्त बिता सकते हैं। इसके अलावा ये लोग दूसरे बोर्ड खेल जैसे “पॉलिटिक्स ऑफ इंडिया’’ पर भी काम कर रहे हैं।

हाल के कुछ सालों में वैश्विक स्तर पर बोर्ड खेलों की मांग बढ़ी है। यही वजह है कि पिछले दिनों चार दिवसीय टेबलटॉप गेम कॉफ्रेंस में 50 हजार से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया जबकि पिछले साल ये संख्या 20 हजार के आसपास थी। ये ऐसे उद्यम हैं जो लोगों को फुर्सत के पलों में भी तरोताजा रखते हैं।