सहकारिता गन्ना कारखानों की वजह से सुभाषचंद्र वर्मा जैसे हजारों किसान हुए समृद्ध

गन्ने की खेती से आर्थिक उन्नति के राह पर बढ़े आगे किसान, रहन-सहन भी बदला

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यह लेख छत्तीसगढ़ स्टोरी सीरीज़ का हिस्सा है...

गन्ने की सही कीमत मिलने पर सुभाषचंद्र वर्मा की आमदनी में कई गुना वृद्धि हुई। उनके घर-परिवार में समृद्धि आ गयी। जहाँ साइकिल थी, वहां मोटर साइकिल आ गयी। जहाँ बैल और हल से खेत जोता करते थे वहीं आज उनके पास उनका खुद का ट्रैक्टर है।

किसानों के आर्थिक तरक्की की यह राह जिले में साल 2003 में शुरु हुए शक्कर कारखाना से खुली। अब जिले में शक्कर के दो कारखाने हो चुके हैं।

किसान सुभाषचंद्र वर्मा कबीरधाम जिले के कुशालपुर में रहते हैं। एक समय धान की खेती करते थे। धान की खेती से इन्हें ज्यादा फायदा नहीं हुआ। गन्ने की खेती भी थोड़ी बहुत कर लेते थे और सारा गन्ना गुड बनाने वाले लोगों को बेच देते थे। किसी तरह घर-परिवार की गुजर-बसर हो रही थी। लेकिन दो सहकारी गन्ना कारखानों ने इनकी ज़िंदगी बदल दी। जैसे ही जिले में भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना खुला एक मायने में सुभाषचंद्र वर्मा की किस्मत के बंद दरवाजे भी खुल गए। उन्होंने अपनी जमीन पर गन्ना बोना शुरू किया। फसल अच्छी होने लगी और भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना में उनकी सारी फसल सही कीमत पर खरीदी जाने लगी। गन्ने की सही कीमत मिलने पर सुभाषचंद्र वर्मा की आमदनी में कई गुना वृद्धि हुई। उनके घर-परिवार में समृद्धि आ गयी। जहाँ साइकिल थी, वहां मोटर साइकिल आ गयी। जहाँ बैल और हल से खेत जोता करते थे वहीं आज उनके पास उनका खुद का ट्रेक्टर है। मकान भी बड़ा और शानदार हो गया है। तरक्की हर तरफ नज़र आती है। बच्चे भी अच्छे स्कूल में पढ़ने जाते हैं।

बड़ी बात यह है कि सुभाषचंद्र ऐसे एकमात्र किसान नहीं है, बल्कि जिले के 32 हजार से भी ज्यादा किसानों की आर्थिक तरक्की की राह गन्ने की फसल ने आसान कर दी। प्रति एकड़ 40 से 50 हजार रुपए मुनाफा कमाने वाले किसान अब एक लाख रुपए प्रति एकड़ से भी ज्यादा मुनाफा हर साल हासिल कर रहे हैं। धान और गन्ने की फसल के कारण पहले कम आमदनी कमाने वाले किसान इन दिनों फोर व्हीलर गाड़ियों में घूम रहे हैं। कभी साइकिल और मोटरसाइकिल से चलने वाले किसान के पास आज दो-दो ट्रैक्टर-ट्रालियां हैं। यह सब इनकी मेहनत और नकदी फसल लेने के परिणाम हैं।

सुभाषचंद्र बताते हैं कि, “मैं और मेरे जैसे दूसरे किसान पहले धान की फसल लिया करते थे। इससे सब मिलाकर लगभग 50 हजार तक इनकम हो जाया करता था। लेकिन जब हमने फसल बदलकर गन्ना लगाना शुरु किया, तो हमें प्रति एकड़ एक लाख रुपए तक इनकम होने लगा। मेरे पास लगभग 20 एकड़ जमीन है, आज नकदी फसल से इनकम दोगुना हो चुका है। इसका असर हमारी रहन-सहन पर भी पड़ा है। दूसरे किसानों की जिंदगी भी गन्ने ने बदल दी है। अब खेती के तरीके में भी अंतर आया है, आधुनिक खेती ने मुनाफा और बढ़ा दिया है।” गन्ना किसान जिले के दो शुगर फैक्ट्री और 350 गुड़ फैक्ट्रियों को बेचते हैं और इसका उन्हें फायदा होता है।

किसानों के आर्थिक तरक्की की यह राह जिले में साल 2003 में शुरु हुए शक्कर कारखाना से खुली। अब जिले में शक्कर के दो कारखाने हो चुके हैं। इसने किसानों की राह कैसे बदली इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पहले जब यह कारखाना साल 2003 में लगा, तब जिले के लगभग 21 हजार एकड़ में गन्ने की खेती होती थी और अब यह बढ़कर 67 हजार एकड़ तक जा पहुंची है। जो आर्थिक उन्नति जिले में हुई, वह इस शुगर फैक्ट्री के कारण ही संभव हो सका। यही कारण था कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने एक शक्कर कारखाना के बेहतर क्रियान्वयन व किसानों को मिल रहे फायदे के बाद दूसरे कारखाना की घोषणा की और यह भी अब किसानों को लाभ दे रहा है।

सही मायने में कबीरधाम जिले में गन्ना कारखानों और गन्ने की फसल ने किसानों को आर्थिक तरक्की की राह दिखाई। कबीरधाम के 511 गांव में 32 हजार से ज्यादा किसान गन्ने की फसल लेते हैं। दो शक्कर कारखाना राम्हेपुर में भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना व पंडरिया के बिशेषरा में सरदार वल्लभ भाई पटेल सहकारी शक्कर कारखाने में किसानों का गन्ना समर्थन मूल्य में खरीदा जा रहा है और इसका बोनस भी किसानों को मिल रहा है। दोनों शुगर फैक्ट्रियों ने इस साल किसानों से लगभग 200 करोड़ रुपए का गन्ना खरीदा है। भोरमदेव शक्कर कारखाना ने 429779 मेट्रिक टन गन्ने की पेराई की, जिसमें शक्कर का उत्पादन 359410 क्विंटल हुआ। वहीं सरदार वल्लभ भाई पटेल शक्कर कारखाना में 364415 मेट्रिक टन गन्ने की पेराई हुई और 316515 क्विंटल शक्कर का उत्पादन भी हुआ।

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