दोस्तों के गम में शुरू किया 360 Health Vectors

...ताकि फिर किसी की यूं मौत न हो जाए

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कल्पना कीजिए कि कोई आपसे ये बताए कि कमर को कुछ सेंटीमीटर घटाने से हॉर्ट अटैक का खतरा भी कम हो जाएगा। हम सभी डॉक्टर के पास तभी जाते हैं जब हमें महसूस होता है कि इलाज की जरूरत है। मगर डॉक्टर किसी हाई रिस्क वाले व्यक्ति को अगर हमें बचाव के तरीके बताए तो। 360 Health Vectors एक एनेलिटिकल कंपनी हैं जो यही काम करती है।

डॉक्टर सुभाशीष सरकार एक इंजीनियर हैं और लॉकहीड और नासा जैसे संस्थानों में 20 साल तक काम कर चुके हैं। उन्होंने 360 Health Vectors की स्थापना की। सुभाशीष प्रिवेंटिव हेल्थकेयर के क्षेत्र में काम करने के लिए तब इंडिया आए। उन्होंने ये फैसला तब किया जब उनके पूरी तरह से स्वस्थ दो दोस्तों की रेगुलर मेडिकल चेकअप के कुछ ही महीनों बाद मौत हो गई।

सुभाशीष बताते हैं, “हालांकि, मैं एक अमेरिकी नागरिक हूं और वहां करीब 30 साल तक बिताया, मगर हमेशा से मेरी चाहत थी कि मैं इंडिया में कुछ करूं। मैंने भारत में अपने दो दोस्तों को कार्डियक अटैक से खोया जिनकी उम्र 32 और 37 साल थी। उन्होंने इस त्रासदी के पांच महीने पहले ही फुल हेल्थ चेक अप कराया था। वो मेरी जिंदगी में एक खाली जगह छोड़ गए। सिस्टम में कुछ न कुछ तो गड़बड़ है। मैं उसे बदलना चाहता था।”

ये कैसे काम करता है?

हेल्थ वेक्टर्स मुख्य तौर पर B2B मॉडल पर काम करता है। हमारी टीम कंपनियों के साथ पार्टनरशिप करती है फिर हेल्थ चेक अप के लिए उनके लोकेशन पर जाती है। चेक अप से पहले लोगों को एक ऑनलाइन क्वेश्चनेयर भरना होता है। बाद में बीपी और ईसीजी को चेक किया जाता है। जब डेटा एकत्रित हो जाता है तो उसका विश्लेषण किया जाता है। इसके जरिये किस बीमारी की कितनी आशंका है इसका पता चल जाता है। बाद में रिस्क के हिसाब से हम व्यक्ति को प्रतिरोधी उपाय बताते हैं।

ये पूरी प्रक्रिया वैज्ञानिक और गणितीय साक्ष्यों पर आधारित होती है।

हेल्थ वेक्टर्स कॉर्पोरेशन की भी हेल्थ चेकअप कैंप्स और वेलनेस प्रोग्राम्स में मदद करता है जो उन्हें अधिकतम रिटर्न देता है। हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम को घटाता है और कर्मचारियों की प्रोडक्टिविटी को बढ़ाता है।

ये औरों से अलग क्यों है?

एक चीज जो हेल्थ वेक्टर्स को भीड़ से अलग करता है वो ये है कि ये एक पूरी तरह से पेपरलेस कंपनी है। इसका नतीजा ये है कि चीजें काफी तेजी से होती हैं। कल्पना कीजिए कि आप किसी रेगुलर हॉस्पिटल में चेक अप के लिए जा रहे हैं। आपको अपने काम से आधे दिन की छुट्टी लेनी पड़ती है, आप डॉक्टर के साथ अपॉइंटमेंट लेते हैं फिर हॉस्पिटल के अलग-अलग लैब में टेस्ट के लिए चक्कर काटते हैं। इस दौरान लंबी लाइन का जो सामना करना पड़ता है वो तो है ही फिर आप रिपोर्ट इकट्ठा करने के लिए एक दिन और छुट्टी लेते हैं।

हेल्थ वेक्टर्स में सारी प्रक्रिया में एक घंटे से भी कम समय लगता है क्योंकि सभी तरह के टेस्ट इक्विपमेंट पहले से ही सेट हैं और इस तरह से कंपनी टाइम की बचत होती है। सभी तरह की रिपोर्ट्स और फॉलो अप मेल के जरिये हो जाता है।

एक और चीज जो हेल्थ वेक्टर्स को औरों से अलग करती है वो ये है कि ये एक विशुद्ध प्रिवेंटिव हेल्थकेयर कंपनी है जो लोगों को उनके रिस्क फैक्टर के बारे में बताती है। प्रिवेंटिव केयर के बारे में डॉक्टर सुभाशीष बताते हैं, “प्रिवेंटिव केयर शब्द का मतलब अलग-अलग लोगों के लिए अलग-अलग होता है। भारत में आमतौर पर प्रिवेंशन से मतलब है बीमारी को बढ़ने से रोकना। मगर हमारे लिए प्रिवेंशन का मतलब है किसी के लिए बीमारियों का कितना रिस्क है। बहुत सारे मामलों में बीमारी का जल्द पता चल जाना ही काफी नहीं होता। इसलिए रिस्क फैक्टर की जानकारी काफी अहम है। मगर इसका मतलब ये भी नहीं है कि हम बीमारी को बढ़ने से रोकने के क्षेत्र में काम नहीं करते। हम मुख्य तौर पर व्यक्तियों के सशक्तिकरण पर फोकस करते हैं और संस्थान को रिएक्टिव के बजाय ज्यादा प्रोएक्टिव बनाते हैं।”

डॉक्टर सुभाशीष अपने इस सफर के तीन अहम सबक के बारे में बताते हैं।

Don’t be a ‘me too’ ‘मैं भी’ ना बनें- आपको ऐसा करके कभी भी फायदा नहीं मिलेगा। आपको लगातार इनोवेट करना है।

अपने बिजनेस मॉडल के बारे में गहराई से सोचें, अपने सबसे बड़े आलोचक बनें। जितना कर सकते हैं पूरी तरह से मॉडल का टेस्ट कीजिए। खुद के प्रति ईमानदार बनिए।

पहले दिन से ही अपने खर्चों पर नियंत्रण रखिए, इससे खर्च में आसानी होगी। खुद को जितना ज्यादा मुमिकन हो उतने देर तक तैरने के लिए तैयार रखिए ताकि अनुकूल हवा में आप अपनी मंजिल तक पहुंच सकें।

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