‘आई सेवा’, एप्प एक सुविधाएं अनेक, एक बार इस्तेमाल करके देखिए

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अगर आप अपने आसपास अच्छा कपड़ा प्रेस करने वाले, ड्रॉइवर, प्लंबर या जूता पॉलिश करने वाले ढूंढ रहे हैं...तो एक एप्प आपकी इस काम में मदद कर सकता है और आप सिर्फ एक बटन दबाकर अपने आसपास मौजूद ऐसी सेवाएं देने वाले को तलाश कर सकते हैं...’आई सेवा’ नाम के इस ऐप की शुरूआत की है पटियाला में रहने वाले रवि अहलूवालिया ने...जो अपनी संस्था ‘पटियाला फाउंडेशन’ के जरिये ना सिर्फ गरीब लोगों की मदद कर रहे हैं बल्कि अपने इस संगठन के जरिये वो सैकड़ों रिक्शा चालकों की आमदनी बढ़ाने का जरिया भी हैं।

रवि के मुताबिक 

“मैंने अपने आसपास देखा तो पता चला कि कई सामाजिक संगठन समाज के नीचले तबके लिए काम कर रहे हैं, लेकिन ऐसा कोई संगठन नहीं है जो उनकी आमदनी बढ़ाकर उनको आत्मनिर्भर बनाने के लिए काम करे। इसलिए मैंने साल 2009 में अपने कुछ साथियों के साथ पटियाल फाउंडेशन की नींव रखी।” 

रवि ने अपने काम की शुरूआत रिक्शा चालकों के साथ की और उनको समाज की मुख्य धारा से जोड़ने का काम किया। रवि ने देखा कि 90 प्रतिशत रिक्शा चालक किराये का रिक्शा चलाते हैं, इसके लिए वो रोज 35 से 40 रुपये किराया देते हैं और ये सिलसिला सालों तक चलता है। इस तरह रिक्शा चालक कभी भी उस रिक्शे का मालिक नहीं बन पाता जिसे वो दिन रात चलाता है। रवि ने देखा की इसकी वजह है कि रिक्शा चालकों का अनपढ़ होना और उन तक सरकार की योजनाओं की जानकारी का ना पहुंच पाना है ,जो गरीबों के लिये चलाई जा रही हैं।

रवि ने जब इस क्षेत्र में काम करने का सोचा तो उनको बैंकों की डीआरआई योजना के बारे में पता चला। इस योजना के तहत गरीब लोगों को अपने रोजगार के लिए 4 प्रतिशत की दर से बैंक लोन देते हैं। तब रवि ने शुरूआत में करीब 10 रिक्शा चालकों को इकट्ठा कर उन्हें इन योजनाओं के बारे में बताया। उन्होने बताया कि वे लोग रोज 35 से 40 रुपये रिक्शा मालिक को किराया देते हैं अगर वे लोग बैंक से लोन लेकर खुद का रिक्शा खरीदेगें तो उन्हें यह रकम केवल 4 प्रतिशत ब्याज पर मिलेगी। इस तरह ना सिर्फ वो साहूकारों के चंगुल से बच पाएंगे बल्कि कम ब्याज में पैसा हासिल कर अपने रिक्शे के जल्द मालिक भी बन जाएंगे।

रवि ने जब अपने इस काम की शुरूआत की थी तो उनके सामने सबसे बड़ी दिक्कत थी रिक्शा चालकों की अपनी पहचान। उन्होंने देखा कि रिक्शा चालकों के पास ऐसा कोई दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, वोटर कार्ड या कोई दूसरी तरह का पहचान पत्र नहीं था, जिसके जरिये वो अपना बैंक में अकाउंट खोल पाते। वहीं दूसरी ओर उन्होने देखा की बैंक कर्मचारी भी इन लोगों को लोन देने से कतराते थे, क्योंकि लाखों रुपये के लोन देने में बैंक कर्मचारियों को जितनी मेहनत करनी पड़ती थी उतना ही पेपर वर्क हजारों रुपये के लोन देने में भी करना पड़ता था। तब रवि ने बैंक कर्मचारियों के सामने पेशकश की, वो खुद ही इस काम को वालंटियर के तौर पर देखेंगे। इस तरह लोन से जुड़ा सारा पेपर वर्क से लेकर केवाईसी तक का सारा काम रवि और उनके सहयोगी ही करते हैं और जीरो बैलेन्स पर रिक्शा चालकों के अकाउंट खुलवाते हैं उनको एटीएम कार्ड जारी करवाते हैं। जिसके बाद अब रिक्शा चालको को आसानी से लोन मिलने लगा है।

रवि आगे बताते हे कि “हमने कई रिक्शा चालकों को इकट्ठा किया और उन्हें नगर निगम से रिक्शा चलाने के लिए नगर निगम के परमिट दिलवाये”, ताकि पुलिस वाले उनको वेवजह परेशान ना करें। इसके अलावा रवि ने योर स्टोरी को बताया कि “हमने शहर में एक हैरिटेज रूट की पहचान की और रिक्शे वालों को टूरिस्ट गाइड की भी ट्रेनिंग दी ताकि वे रिक्शा चलाने के साथ गाइड का भी काम कर सकें। उनके लिए ढाई घंटे का एक ट्रिप प्लान तैयार किया। इसमें रिक्शा चालक गाइड की भूमिका निभाते हुए उन्हें शहर की सैर कराता था। इससे उनकी आमदनी में भी इजाफा हुआ।”

रवि यहीं नहीं रूके उन्होने रिक्शा चालकों के स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना शुरू किया। इसके लिए उन्होने डॉक्टरों के विभिन्न संगठनों से बात की और अपने साथ कुछ ऐसे डॉक्टर जोड़े जो इन रिक्शा चालकों की स्वास्थ्य जांच का काम मुफ्त में करने को तैयार हो गये।

डॉयलर रिक्शा सेवा के बारे में बात करते हुए रवि कहते हैं कि इसमें उन्होने शहर को 12 जोन में और जोन को 10 फीडर जोन में बांटा हुआ है। इसमें हर रिक्शे वाले की लोकेशन और फोन नंबर दर्ज रहता है, लेकिन इसमें सबसे बड़ी समस्या तालमेल की आई। जिस किसी व्यक्ति को जब रिक्शा चाहिए होता था तो रिक्शा चालक से सम्पर्क करने में काफी समय बर्बाद होता था। तब उन्होने एक ऐसे ऐप के बारे में सोचा जिससे कि इस समस्या का समाधान हो सके।

रवि ने पिछले साल नवम्बर ‘आई सेवा’ नाम से एक ऐप बनाया। इस ऐप को कोई भी व्यक्ति डाउनलोड कर अपने आसपास मौजूद रिक्शा चालक से सीधे सम्पर्क कर सकता है। धीरे धीरे उन्होने अपने इस ऐप में शहर में मौजूद प्लंबर, इलैक्ट्रिशियन, कारपेंटर, धोबी, ड्राइवर को इस ऐप के साथ जोड़ा और आज उनके इस ऐप में फूल वाला, गैस चूल्हा ठीक करने वाला, पंक्चर लगाने वाले, पुताई करने वाला सहित करीब 51 तरह की सेवाएं देने वाले मौजूद हैं। रवि का कहना है कि इन सेवाओं की मैपिंग के लिए उनको बहुत सारे वालंटियर की जरूरत थी जो कि अपने एरिया की मैपिंग कर इन सेवाओं को ऐप में डाल सकते थे। इसलिये उन्होने अपने इस प्लेटफार्म को ओपन कम्यूनिटी बेस्ड बनाया ताकि खुद ही लोग ऐसी सेवाओं को ढूंढे उसे ऐप में डालें जिससे दूसरे लोग भी इन सेवाओं का फायदा उठा सकें। इससे लोगों में एक दूसरे की मदद की भावना पैदा होगी।

‘आई सेवा’ फिलहाल पटियाला के अलावा करनाल, होशियारपुर के साथ चंडीगढ और मोहाली के कुछ इलाकों में काम कर रहा है। करनाल में इस काम को वहां का नगर निगम खुद देख रहा है। रवि के मुताबिक करनाल को स्मॉर्ट सिटी बनाने के लिए केंद्र के पास जो प्रस्ताव नगर निगम ने केंद्र के पास भेजा उसमें इस ऐप को भी शामिल किया गया है। ताकि स्मॉर्ट सिटी को और बेहतर बनाया जा सके। खास बात ये है कि ‘आई सेवा’ के तहत अपने सेवाएं देने के लिए जुड़ने वाले लोगों के लिए ये एक खास तरह की वर्कशॉप का भी आयोजन करते हैं। 2 दिन की इस वर्कशाप में उनके व्यक्तिगत विकास, उनके कौशल और ग्राहकों के प्रति उनके व्यवहार को लेकर जानकारी दी जाती है। इतना ही नहीं ‘आई सेवा’ एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जो बिल्कुल मुफ्त है। इसमें सेवा देने वाला ये लेने वाले को कोई शुल्क नहीं देना होता। रवि के मुताबिक एनरोइड में ये ऐप अच्छी तरह से काम कर रहा है जबकि आईओएस वर्जन इस साल जनवरी में शुरू किया है। जिसके काफी अच्छे परिणाम हासिल हुए हैं।

वेबसाइट : www.patialafoundation.org

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