स्टार्टअप इंडिया- कैसा रहा राज्यों का प्रदर्शन

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चीन और इजरायल को पछाड़ते हुए भारत तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन गया है. भारत से पहले ब्रिटेन और अमेरिका आता है. तकनीक प्रेमी पीढ़ी के नौजवानों ने कॉरपोरेट दुनिया में नौकरी करने के बजाय उद्यमीता में जोखिम लेना पसंद किया है, जिस वजह से भारत आगे बढ़ पाया है. और दुनिया निश्चित रूप से यह देख रही है. 1990 के आर्थिक उदारीकरण के बाद यह अगली बड़ी नीति परिवर्तन साबित हो सकती है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्टार्टअप इंडिया कैंपेन की शुरुआत कर दी है. हालांकि लाल फीताशाही और नीतियों में स्पष्टता नहीं होने के कारण स्टार्टअप को लेकर कई अड़चनें पैदा हो रही है. भारतीय राज्य भी उभरते हुए उद्यमियों के लिए कुछ खास अलग साबित हो पाए हैं. योरस्टोरी ये देखने की कोशिश कर रहा है कि राज्यों के प्रदर्शन कैसे रहे और वे अपने आपको कहां सुधार सकते हैं.

अब तक की कहानी

दक्षिण के राज्यों ने असाधारण रूप से अच्छा प्रदर्शन किया है. कर्नाटक, केरल, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना बाकी के देश के मुकाबले बेहतर कर रहे हैं. ये राज्य स्टार्टअप्स की मदद के लिए नीतियों में बदलाव कर रहे हैं और उसे नया रूप दे रहे हैं. खासतौर पर इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने के लिए खास ध्यान दिया जा रहा है. विशेष तौर पर टीयर 2 शहर अब भी जगह और कनेक्टिविटी की समस्या से दो चार हो रहे हैं. नवंबर 2015 में कर्नाटक देश का पहला ऐसा राज्य बना जिसके पास अपनी स्टार्टअप नीति थी, इसके मुताबिक चुनिंदा कालेजों में इन्कयूबेटर्स स्थापित किए जाएंगे और शोध एवं विकास की स्थापना की जाएगी. राजधानी बैंगलोर को भारत का सिलिकन वैली करार दिया जाएगा. कर्नाटक सरकार ने इसके लिए कोई मौका नहीं छोड़ना चाहती. साल 2013 में सरकार ने पहली बार राज्य स्तरीय स्टार्टअप वेयरहाउस स्थापित किया और पिछले साल दूसरा.


केरल सरकार की स्टार्टअप पॉलिसी-केरल की आईटी मिशन की घोषणा साल 2014 में हुई. जिसका लक्ष्य 5000 करोड़ रुपये राज्य के स्टार्ट इकोसिस्टम के लिए आकर्षित करना है. 2012 में देश का पहला टेलीकॉम इन्कयूबेरेटर स्टार्टअप गांव की स्थापना के साथ ही सरकार ने 10 एक्सेलेटर्स का वादा किया है साथ ही साथ 10 लाख स्कॉयर फीट जमीन इन्क्यूबेटर के लिए भी आवंटित की. राज्य की नीति के मुताबिक, राज्य के बजट का एक फीसदी हिस्सा यूथ आंत्रेप्रेन्योरशिप के लिए 2019 तक दिया जाएगा.

तेलंगाना भी आगे आया है. उद्यमीता की प्रशिक्षण के लिए तेलंगाना अकेडमी फॉर स्किल एंड नॉलेज बनाया गया है. देश का सबसे युवा राज्य होने के नाते तेलंगाना उस वक्त सुर्खियों में आया जब उसने देश का सबसे बड़ा इन्क्यूबेरेशन केंद्र टी हब की स्थापना की.

आंध्र प्रदेश ने 17,000 स्कॉयर फीट जमीन लैब-टेक्नोलॉजिकल रिसर्च एंड इनोवेशन पार्क के लिए दी. साथ ही साथ शुरुआती फंड 100 करोड़ रुपये भी कर दिए. सेबी द्वारा स्वीकृत पूंजी में वह वीसी फंड्स में भी शामिल होगा, 15 फीसदी तक वह सीमित साझेदार होगा. एक सिंगल विंडो क्लिरेंस यूनिट को विकसित किया जाएगा जिससे मंजूरी और अन्य टैक्स और पंजीकरण का काम हो सकेगा.

पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश ने भारतीय लघु औद्योगिक विकास बैंक के साथ करार कर 200 करोड़ रुपये बतौर वीसी फंड स्थापित करने के लिए रखा है. 75 करोड़ रुपये सरकार ने दिया है.

पश्चिम बंगाल भी अपनी स्टार्टअप पॉलिसी पेश कर चुकी है, जिसमें उसने उद्यमिता विकास केंद्र नेटवर्क बनाने का वादा किया है. उच्च शिक्षा संस्थानों के साथ यह केंद्र खोले जाएंगे. विश्वविद्यालयों को इसके लिए 10 लाख रुपये तक का फंड मुहैया कराएगी. साथ ही सरकार इन्क्यूबेटर की स्थापना को सुगम बनाना चाहती है.

राजस्थान ने अक्टूबर 2015 में विस्तृत स्टार्टअप नीति पेश किया. स्टार्ट-अप ओसिस की शुरुआत के बाद, इनक्यूबेशन सेंटर RIICO जयपुर में, राजस्थान अब स्टार्टअप इकोसिस्टम को गंभीरता के साथ लेने लगा है.

राज्य नीति ने आइडिया के स्तर पर स्टार्टअप्स को हर महीने 10,000 रुपये भत्ता देने का वादा किया है. यह नोडल इंस्टीट्यूशन से स्वीकृति होने के बाद मिलने लगता है.

गुजरात भले ही उद्यमशीलता की भावना के लिए मशहूर है लेकिन वह स्टार्टअप नीति को बल देने में विफल रहा है.

राज्य की नीति ज्यादातर उत्पादन पर ध्यान केंद्रित है. हालांकि बिहार सरकार ने 500 करोड़ रुपये वीसी फंड के तौर आवंटित किए हैं.


लेखक- अथीरा नायर

अनुवादक- एस इब्राहिम