धूल खा रही हैं एम एफ हुसैन की पेंटिंग्स

आधुनिक चित्रकला के कुशल चितेरे हुसैन को हिन्दू देवी देवताओं के चित्र बनाने के कारण देश में काफी विरोध भेलना पड़ा था। इस विरोध और मुस्लिम संगठनों के फतवों के कारण उन्हें देश से बाहर दुबई में निर्वासित जीवन गुजारना पड़ा। हुसैन की मृत्यु भी दुबई में ही हुयी।

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हिन्दू देवी देवताओं की पेटिंग्स बनाकर विवादों में आए चित्रकार मकबूल फिदा हुसैन की रामायण पर आधारित करीब 250 पेंटिंग्स हैदराबाद स्थित लोहिया समता न्यास में धूल फांक रही हैं। आधुनिक चित्रकला के कुशल चितेरे हुसैन को हिन्दू देवी देवताओं के चित्र बनाने के कारण देश में काफी विरोध भेलना पड़ा था। इस विरोध और मुस्लिम संगठनों के फतवों के कारण उन्हें देश से बाहर दुबई में निर्वासित जीवन गुजारना पड़ा। हुसैन की मृत्यु भी दुबई में ही हुयी। हुसैन ने राम मनोहर लोहिया और बद्री विशाल पित्ती के आग्रह पर कई साल तक मेहनत कर रामायण पर आधारित करीब 250 पेंटिंग बनायी थीं। योजना थी कि जनता दल के सत्ता में आने के बाद एक संग्रहालय बनाकर इन पेटिंग्स को प्रदर्शन के लिए रखा जाएगा, लेकिन जनता दल सरकार के सत्ता में आने के बाद भी यह संग्रहालय नहीं बन सका और सभी पेटिंग हैदराबाद स्थित लोहिया समता न्यास में रखवा दी गईं, जो तब से अब तक वहीं पड़ी धूल खा रही हैं।

जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के राज्यसभा सदस्य और प्रवक्ता शिवानंद तिवारी ने बताया, हुसैन की पेटिंग्स के बारे में मैंने संस्कृति मंत्रालय को एक पत्र भी लिखा था। लेकिन अभी तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुयी है और बद्री विशाल पित्ती के प्रयासों का कोई नतीजा नहीं निकल सका। हुसैन ने भी इस बारे में काफी आपत्ति दर्ज करायी थी। उन्होंने कहा, मैं सदन के आगामी सत्र में इस बात को फिर से उठाऊंगा।डा. राम मनोहर लोहिया के साथ काम करने वाले एवं लोहिया समता न्यास के न्यासी भोला प्रसाद सिंह ने कहा, बद्री विशाल पित्ती के पुत्र सरल पित्ती और अन्य न्यासी इस बारे में कार्य कर रहे हैं। हम एक संग्रहालय बनवाकर हुसैन की सभी पेटिंग्स और लोहिया के संपूर्ण साहित्य को संरक्षित करने के लिए प्रयासरत हैं। उन्होंने कहा कि हुसैन ने कई साल तक मेहनत करके रामायण पर आधारित पूरी श्रृंखला तैयार की थी, लेकिन सरकारी उदासीनता के कारण करोड़ों मूल्य की पेटिंग्स नष्ट हो रही हैं।

प्रसिद्ध कला समीक्षक प्रयाग शुक्ल ने कहा, हुसैन विशेष रूप से देवी देवताओं के चित्रों के कारण विवादास्पद रहे। आज भी हमारे समाज में उन्हें लेकर अभी तक सार्वजनिक स्वीकार्यता नहीं बन पायी है। ऐसे में इन चित्रों को आम जन के लिए प्रदर्शित करने का कोई पायदा नहीं है।उन्होंने कहा, हुसैन ने रात दिन मेहनत करके रामायण पर आधारित श्रृंखला तैयार की थी, लेकिन उसे कभी भी बाहर नहीं निकाला गया। इसके पीछे उन्मादी ताकतों का विरोध, पेटिंग्स के क्षतिग्रस्त होने की आशंका और सबसे बड़ी बात समाज में स्वीकार्यता का अभाव रहा।शुक्ल ने कहा, अभी भी इन चित्रों को प्रदर्शित करने के लिए किसी ठोस योजना पर कार्य नहीं हो रहा है। यह कला के प्रति समाज की उदासीनता है, जिसकी वजह से महान चित्रकार की कलाकृतियां नष्ट हो रही हैं।

आम जन के प्रदर्शन के लिए सुलभ नहीं होने से नाराज एम एफ हुसैन ने लिखा था, मुझे बहुत कोफ्त हुई है कि बद्री विशाल पित्ती की आरंभिक कोशिशों का कोई नतीजा नहीं निकला और मेहनत से बनायी गयी पेटिंग्स नष्ट हो रही हैं। हुसैन ने पित्ती को एक पत्र लिखकर अपनी नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने लिखा था, अगर इन चित्रों को लोग देख नहीं सकते हैं, तो उन्हें आग के हवाले कर दो। प्रभात प्रकाशन से प्रकाशित पुस्तक डा. लोहिया और उनका जीवन दर्शर्नं में इस प्रसंग का विस्तृत उल्लेख किया गया है। पुस्तक के लेखक कुमार मुकुल ने बताया, लोहिया ने हुसैन से कहा था कि तुम टाटा बिड़ला जैसे अमीर लोगों के लिए नहीं, बल्कि साधारण आदमी के लिए चित्र बनाओ। उस समय हुसैन के दिमाग में रामायण पर आधारित चित्र बनाने की योजना चल रही थी। उनकी प्रेरणा से हुसैन ने लगभग बारह साल तक मेहनत करके करीब 250 पेटिंग्स बनायीं। ये पेंटिंग्स हैदराबाद में पित्ती के आवास के पीछे की खाली जगह में रहकर बनायी गयी थीं। उन्होंने बताया कि हुसैन ने लिखा था, कि बाद में पित्ती ने उस संदर्भ में पहले जैसी तत्तपरता नहीं दिखायी और पेटिंग्स को लोहिया समता न्यास में रखवा दिया गया। बाद में पित्ती ने हुसैन की नाराजगी को वाजिब ठहराते हुये लिखा था, ये चित्र मेरी संपत्ति बिल्कुल नहीं हैं। यह राम मनोहर लोहिया समता न्यास की संपत्ति हैं।

संपादकीय सहयोग- अतनु दास

साभार : पीटीआई