‘प्रोजेक्ट स्टारफिश’, लाखों दृष्टिहीनों के लिए नई ज़िंदगी का नाम...

बोस्टन में रहने वाले शुभाशीष आयार्च दृष्टिहीनों के एक समारोह के दौरान हुए इस काम के लिये प्रेरितदृष्टिदोष और अन्य विकलांगताओं से जूझ रहे लोगों को विभिन्न कार्यों के लिये करते हैं प्रशिक्षित 9 देशों में दृष्टिदोष और अन्य विकलांगताओं से जूझ रहे करीब 1000 पेशेवरों को कर चुके हैं प्रशिक्षित शुभाशीष के अलावा इस काम में लगी इनकी टीम के सभी सदस्य हैं दृष्टिहीन

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‘प्रोजेक्ट स्टारफिश’ के संस्थापक, संरक्षक और प्रशिक्षक शुभाशीष आयार्च पुरानी यादों को सहेजते हुए कहते हैं, ‘दो वर्ष पहले बोस्टन की ठंडी सुबह कों मुझे और मेरी पत्नी को दृष्टिहीन लोगों को नौकरी दिलवाने के प्रयास के रूप में आयोजित किये गए एक समारोह को रिकाॅर्ड करने के लिये बुलाया गया।’’

सौमिता और शुभाशीष
सौमिता और शुभाशीष

शुभाशीष आगे कहते हैं, ‘‘एक भारतीय होने के नाते मैं इस आयोजन को अन्य दृष्टिहीन व्यक्तियों के लिये फिल्माना चाहता था ताकि वे इन उपस्थित लोगों द्वारा की जा रही प्रगति से रूबरू होने का एक मौका पाते हुए एक नया अनुभव ले सकें। इन उत्सुक पेशेवरों को अपने हाथों में बायोडाटा लिये नियोक्ताओं के सामने कतार में खड़े होना और मौका मिलते ही अपने कौशल का प्रदर्शन करना मरे लिये एक बेहद रोमांचक पल था। आखिर में मैं यह जानकर बहुत हैरान हुआ कि दिन की समाप्ति पर इन 150 सक्षम और शिक्षित व्यक्तियों में से किसी को भी नौकरी नहीं मिली। और बस यही मेरे जीवन में परिवर्तन लाने वाला क्षण था क्योंकि यही पर मैं विकलांगता का दंश झेल रहे इन लोगों के सामने आने वाली दिक्कतों को जानने और समझने में कामयाब हुआ था।’’

आप एक ऐसे मंच की कल्पना करें जो दृष्टिहीन व्यक्तियों को व्यवहारिक अनुभव प्रदान करवाए और फिर उन्हें ऐसे नियोक्ताओं से मिलवाए जो उनके इन अनुभवों के परिणामस्वरूप प्राप्त कौशल का सही इस्तेमाल कर सकने में सक्षम हो। एक बिल्कुल नए, अद्वितीय माॅडल जो बिल्कुल वैश्विक और आत्मनिर्भर होने के साथ-साथ नियोक्ताओं और कर्मचारियों दोनों को बराबर महत्व देता हो, की कल्पना करिये। दान और सहानुभूति पर आश्रित परोपकारी आधार पर संचालित होने वाले माॅडलों के विपरीत यह माॅडल उपयोगकर्ताओं के कौशल ओर प्रतिभा के दम पर संचालित होने में सक्षम है। और यही ‘प्रोजेक्ट स्टारफिश’ की परिकल्पना है।


अप्रयुक्त कार्यबल

वर्तमान में काम की तलाश में लगे किसी भी व्यक्ति के सामने सबसे बड़ी चुनौती होती है ‘कार्य का अनुभव’। और विशेषकर दृष्टिहीनों के लिये तो यह बहुत विकट समस्या होती है इसलिये अधिकतर बार वे नौकरी खोजने में असमर्थ रहते हैं। इसके अलावा गतिशीलता एक और बड़ी सुस्या बनकर सामने आती है और नियोक्ता उनके शिक्षित होने के बावजूद उन्हें नौकरी पर नहीं रखना चाहते हैं। दृष्टिदोष से पीडि़तों कर संख्या लगभग 250 बिलियन है और इस संख्या में लगातार इजाफा ही होता जा रहा है।

अमरीका में लगभग 80 प्रतिशत दृष्टिहीन पेशेवर सामाजिक सुरक्षा प्रशासन से प्राप्त अनुदानों पर निर्भर रहते हैं जो कि न के बराबर होते हैं। और अगर हम वैश्विक प्ररिदृश्य पर नजर डालें तो अधिकतर लोग इनके जितने भाग्यशाली नहीं होते हैं और वेएक ऐसे कारण के चलते जिसपर उनका कोई नियंत्रण नहीं है, मिलने वाले दान और सहानुभूति पर निर्भर होकर बिना किसी आशा के अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं। इसके अलावा वैश्विक स्तर पर ऐसे विकलांग व्यक्तियों के दर्जनों समूह हैं जो अवसरों की कमी के चलते आर्थिक स्वतंत्रता से दूर हैं। हम उनके प्रति दया, या सहानुभूति या प्रेरणा के भाव तो दर्शा सकते हैं लेकिन जब तक हम उनके लिये ऐसे मंचों की स्थापना नहीं करेंगे जो उन्हें आर्थिक स्वतंत्रता की दिशा में अग्रसर करते हुए समान अवसर प्रदान करवाएं और एक पेशेवर के रूप में जीवन को प्रारंभ करने का अवसर प्रदान करें तबतक कुछ नहीं बदलने वाला है। बीती कई सदियों के दौरान इस काम के लिये अरबों डाॅलर खर्च किये जा चुके हैं लेकिन कुछ नहीं बदला है।

अधिकतर दृष्टिहीन पेशेवर शिक्षित होने के अलावा स्मार्ट और बुद्धिमान भी हैं और वे सूचना-तकनीकी के क्षेत्र के अच्छे जानकार भी हैं। वे कंप्यूटर स्क्रीन पर दशाई जा रही चीजों को जानने के लिये स्क्रीन रीडर का प्रयोग करते हैं। वर्तमान समय में स्मार्टफोन सुलभता से उपलब्ध हैं और सहायक तीनीक का प्रयोग करते हुए वे भी वहीं सबकुछ कर सकते हैं जो आम इंसान करता है। इस सब सुविधाओं का प्रयोग करते हुए दृष्टिहीन या अक्षम व्यक्ति भी वह सब कुछ कर सकते हैं जो एक सामान्य पेशेवर करता है। बस उनका काम को करने का तरीका औरों से कुछ अलग होता है और कई बार तो वे इसे सामान्य पेशेवरों की तुलना में कम समय में कर देते हैं।


आवश्यकता

उभरते हुए व्यापारों के लिये सफलता की दर काफी नीची है और कई तो पहले पांच वर्षों के भीतर ही दम तोड़ देते हैं। किसी भी देश की अर्थव्यवस्था का 60 से 70 फीसदी हिस्सा इनपर निर्भर होता है और वैश्विक स्तर पर तो इनकी संख्या करोड़ों में चली जाती है। तो फिर ये असफल क्यों होते हैं? जवाब बहुत सरल है। ये धन को निष्पादिक और उत्पन्न करने में असफल होते हैं। शून्य से प्रारंभ करके एक व्यवसाय को जमाने के लिये बहुत प्रयास करने पड़ते हैं। यह बिल्कुल एक हवाईजहाज की तरह होता है जिसे जमीन से ऊपर उठने के लिये अधिकतम ऊर्जा की आवश्यकता होती है। दुर्भाग्य से ऐसा छोटे व्यवसायों के साथ नहीं हो पाता क्योंकि उनके पास जमीन से जल्दी से जल्दी उठने के लिये समुचित संसाधन उपलब्ध नहीं होते।

वर्तमान समय में तकनीक और सूचना की उपलब्धता के चलते बाजारू वस्तुओं या सेवाओं के क्षेत्र में आने वाली बाधाएं बिल्कुल नहीं हैं। कोई भी कहीं भी बैठकर दुनियाभर मेे कारोबार कर सकता है। फिर ऐसे में जब सारी दुनिया ही मंच है तो फिर व्यवसाय असफल क्यों हो जाते हैं? इसका जवाब छिपा है उपभोक्ता के अधिग्रहण और अपनाने की गति में।

आज के समय में इतनी अधिक जानकारी मौजूद है कि नेतृत्व लेना और अपनाना एक बड़ी परेशानी है और ऐसे में जुड़ने का समय ही नहीं मिल पाता है। और इसी में डिजिटल अर्थव्यव्स्था की सबसे बड़ी चुनौती छिपी है। डाटा या जानकारी बिल्कुल एक नयी चीज है लेकिन इसमें काफी समय जाया होता है। आज का युग ज्ञान की अर्थव्यवस्था का है जहां आपकी तेजी ही आपका सबसे बड़ा हथियार है। अब वह समय नहीं है जब बड़ी मछली छोटी मछली को खा जाती थी बल्कि अब तेज मछली धीमी मछली को निगल लेती है।


एक नये माॅडल का निर्माण करना

शुभाशीष हमें बताते हैं, ‘‘स्टारफिश का मंच बिल्कुल निःशुल्क है और यह हमारे निश्चित मानदंडों पर खरा उतरने वालों के लिये हमेशा ऐसा ही रहेगा भी। हमने एक विशेष संरचित प्रशिक्षण कार्यक्रम का निर्माण किया है जो हमारे सदस्य के कौशल को मात्र कुछ सप्ताहों में बहुत बढ़ा देता है। हम किसी भी प्रकार का दान या अनुदान नहीं स्वीकार करते हैं। हम बजाय ‘मछली को खिलाना’ सिखाने के ‘मछली को कैसे पकड़ते हैं’ की अवधारणा पर काम करते हैं ओर यह आज के समय की जरूरत है। बिना किसी आर्थिक सहायता के हम एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन खड़ा करने में कामयाब रहे हैं। यह विश्व के इतिहास में ऐसा करने वाला शायद इकलौता स्टार्टअप होगा।’’

हम यह जानकर बेहद हैरान हुए कि शुभाशीष के अलावा उनकी टीम के बाकी सभी सदस्य दृष्टिहीन हैं। वे आगे कहते हैं,

‘‘हमारी टीम में हर प्रकार के सदस्य जुड़े हुए हैं। कुछ बिल्कुल अशिक्षित हैं तो कुछ विभिन्न क्षेत्रों और पृष्ठभूमियों में परस्नातक की डिग्री हासिल कर चुके हैं और कुछ तो पीएचडी और एमबीए भी हैं। यह सब एक व्यापारिक संस्कृति वाले माहौल में मिलकर काम करते हैं ओर अपने बेहतरीन अवसरों को बाहर लाते हैं। मैं अब यह समझने में कामयाब हुआ हूँ कि सफलता आपके रवैये और मनोदृष्टि में होती है। कौशल को तो सीखा जा सकता है। हम जुनूनी लोगों को अपने साथ जोड़कर उनका कौशल विकसित करते हैं। कर्म ही हमारी पूजा है। ‘प्रोजेक्ट स्टारफिश’ अब एक मिशन बन गया है। एक नयी संभावनाए एक नया मोर्चा बदलाव अनिवार्य और स्थिर है और हम उस बदलाव को लाने में कामयाब हो रहे हैं।’’


एक व्यवसाय का रूप देनाः वृहद दृष्टिकोण

‘प्रोजेक्ट स्टारफिश’ का इरादा पांच वर्षो में एक हजार लोगों तक पहुंचना है। उन्हें अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिये बाजार की आवश्यकताओं को बहुत बारीकी से जानना और समझना होगा। यह सिर्फ गति बनाए रखने और उपभोक्ता को अपने साथ जोड़ने से ही संभव हो सकेगा।

एक मानव डाटा मशीन का निर्माण करनाः ज्ञान के क्षेत्र में विस्तृत अनुसंधान समय की आवश्यकता है। बिक्री के काम में लगा हर व्यक्ति पहले डाटा इकट्ठा करे फिर उपभोक्ताओं को पढ़े और उन्हें जाने और फिर उनके साथ जुड़े। ‘प्रोजेक्ट स्टारफिश’ बड़े काॅर्पोरेट की बिक्री टीमों के के साथ जुड़कर मांग पर शोधकर्ता तैयार करना चाहता है। बड़े बाजारों से संबंधित अनुसंधान परियोजनाओं को छोटे-छोटे हिस्सों में विभाजित किया जाता है और फिर निष्पादक के लिये ‘प्रोजेक्ट स्टारफिश’ के दुनियाभर में फैले दृष्टिहीन सदस्यों तक भेज दिया जाता है जिन्हें आखिर में एक प्रोजेक्अ मैनेजर एकीकृत करता है। एक वितरित प्रक्रिया को धारावाहिक प्रक्रिया में परिवर्तित कर दिया जाता है जो 24 घंटे सातों दिन निष्पादित होती है और जोड़ने के लिये जानकारी एकत्रित करती है। वह भी कम समय में और कम खर्च में। इसका व्यापार मूल्य बिल्कुल वास्तविक है।

लेखन और प्रूफ रीडिंग को सेवा के रूप में प्रचलित करनाः पेशेवर रूप से लिये गए किसी भी लेख इत्यादि को प्रूफ रीडिंग ओर लेखन में सूक्ष्म बदलावों की आवश्यकता होती है और यह एक समय लेने वाला काम होता है। स्क्रीन रीडर के प्रयोग में पारंगत दृष्टिहीन पेशेवर इस दस्तावेजों की प्रूूफ रीडिंग के समय लेने कार्य को बहुत बेहतरीन तरीके से कर सकते हैं।

विश्व के 90 प्रतिशत बोरहोल डाटा को पढ़नाः जी हाँ बिल्कुल सच। बोरहोल धरती के भीतर की विभिन्न चट्टानों की परतों को समझने में मदद करते हुए खनन के काम को आसान बनाने में मदद करता है। उसमें एक साॅफ्टवेयर ‘सोनिफिकेशन’ की मदद से चट्टानों की व्याख्या के काम को संभव बना देता है। सितारों की डाटा धाराओं को जानने के लिये भी लगभग इसी विधि का प्रयोग किया जाता है। दृष्टिहीन पेशेवर इस काम को अंजाम दे सकते हैं और उन्हें इस काम को करने के लिये अच्छा खासा भुगतान भी किया जाता है।

भर्ती और सोर्सिंग को एक सेवा के रूप में लेनाः वर्तमान समय में कई भर्ती एजेंसियां, नियोक्ता और विभिन्न स्त्रोत हैं जो अपना लगभग 80 प्रतिशत समय सिर्फ जानकारी इकट्ठा करने में ही व्यतीत करते हैं। कल्पना कीजिये कि एक दृष्टिहीन व्यक्ति सोर्सिंग, शोध और नियुक्ति का काम खुद कर सकता है जिसकी बदौलत नियोक्ता वास्तव में अपना काम को दोगुनी रफ्तार से अंजाम देते हुए सौदों को तेजी से पूरा कर सकता है और अधिक पैसा कमाने में सफल हो सकता है। ‘प्रोजेक्ट स्टारफिश’ ने इस दिशा में एक प्रारंभिक योजना के क्रियान्वयन के काम को शुरू कर दिया है।

वे अपनी दो महत्वपूर्ण सीखों को साझा करते हुए कहते हैं, ‘‘हम विफल हुए, परीक्षण किये, दोबारा उठे और यह खोजा कि क्या काम करता है और क्या नहीं। हम बहुत जल्दी विफल हुए लेकिन हमने अपने सबक सीखे और तुरंत ही अपना रास्ता बदल दिया। ऐसा करना किसी भी स्टार्टअप के लिये बेहद महत्वपूर्ण होता है। आप बस अपने सबक सीखते रहें और विफलता को कुछ न मानें। बस सबक जल्द सीखें। अपने भीतर धैर्य रखते हुए स्वीकृति की मानसिकता का विकास करें।’’


पड़ने वाला प्रभाव

इनके लिये शुरुआत इतनी आसान नहीं थी। कोई भी इनकी इस नई अवधारणा को एक मौका देने के लिये तैयार नहीं था। हालांकि यह एक बेहतरीन परियोजना थी लेकिन लोग इसे खुले दिल से अपनाने के लिये आगे नहीं आ पा रहा था। शुभाशीष सुबह को अपनी नौकरी पर जाते और उसके आद रोजाना शाम को 6 से 7 घंटे का समय निकालकर लोगों को प्रशिक्षित करते। आखिरकार उन्होंने अमरीका में रफ्तार पकड़ी। अपने अबतक के सफर में शुभाशीष ने दो बातें सीखीं है जिन्हें वे हमारे साथ साझा करते हैं,

‘‘इनमे से पहली है कि सिर्फ लोग ओर विश्वास ही दुनिया की दो भरोसेमंद मुद्राएं हैं। उन्हें विकसित करिये। और दूसरी यह है कि ट्रेन की रफ्तार वही होती है जो इंजन की होती है। यह सब आगे बढ़कर नेतृत्व करने के बारे में है। जब आप आगे बढ़कर ओर नेतृत्व करते हें और अपने काम में विश्वास रखते हैं तभी लोग आपपर भरोसा करते हैं।’’

अब हम आपको 18 महीने आगे लिये चलते हैं। ‘प्रोजेक्ट स्टारफिश’ ने 9 देशों में दृष्टिदोष और अन्य विकलांगताओं से जूझ रहे करीब 1000 पेशेवरों को प्रशिक्षित करने का काम किया है। इसके अलावा इन्होंने 45 से भी अधिक स्टार्टअप्स के साथ काम किया है जो 8 देशों में उभरते हुए व्यवसाई हैं। साथ ही इन्होंने ऐसे लोगों को अपने साथ जोड़ते हुए जो सदियों से बेरोजगारी का जीवन जी रहे थे बिना किसी प्रकार का दान लिये 1 लाख डाॅलर से अधिक की धनराशि अर्जित की है। 70 प्रतिशत से भी अधिक सदस्य काम करके पैसा कमाते हैं और उन्होंने नई उम्मीदों के दरवाजे खोलते हुए नई आशा और नए जीवन को पाया है। कई लोग अभी भी पूर्णकालिक या अंशकालिक नौकरियां कर रहे हैं।

शुभाशीष अपनी नौकरी के घंटो को मिलाकर कुल 18 घंटे काम करते हैं, इस उद्यम से अपने लिये एक पैसा भी नहीं कमाते हैं (क्योंकि इसका उद्यम सदस्यों को सीधे भुगतान करता है), प्रशिक्षण और संरक्षण देते हुए इसे वैश्विक स्तर पर पहुंचने का सपना देखते हैं। हम उनसे उनकी प्रेरणा के बारे में पूछते हैं। वे बताते हैं,

‘‘इसका जवाब बहुत सीधा लेकिन समझने में काफी मुश्किल है। हमारे साथ जुड़े पेशेवर जो दृष्टिहीन या किसी अन्य विकलांगता के शिकार हैं मुझे प्रतिदिन प्रेरित करते हैं। वे हर जगह विभिन्न चुनौतियों का सामना करते हैं। जैसे वे अपने प्रियजनों को देख नहीं सकते हैं, या फिर उन फिल्मों को नहीं देख सकते हें जिन्हें उनके मित्रों ने देखा है या फिर कार नहीं चला सकते हैं। वे प्रकृति की सुंदरता से भी महरूम रहते हैं। वे तूफान के बाद आसमान पर आने वाले इंद्रधनुष के रंगों को नहीं देख सकते हैं। वे लोग छुट्टियां भी नहीं ले सकते हैं और भी कई ऐसे काम हैं जो हमारे लिये सामान्य हैं लेकिन उनके लिये दुष्वार हैं।’’

‘प्रोजेक्ट स्टारफिश’ की टीम रोजाना अपने काम को करने के लिये मैदान में आ डटती है, एक साथ काम करते हुए, अपने संगठन को आगे बढ़ाते हुए और अपनी विकलांगता के बारे में कोई शिकायत करे बिना एक बेहतर कल के निर्माण में प्रयासरत रहती है। शुभाशीष कहते हैं, ‘‘अगर मेरे द्वारा किये जा रहे कार्य को देखेंगे तो आप भी प्रभावित और प्रेरित हुए बिना नहीं रह पाएंगे। उनके लिये व्यक्गित और व्यवसायिक रूप से खुद को स्थापित करना मेरा सबसे बड़ा इनाम है। मैं समाज के एक साधारण कार्यकर्ता से एक मूल्य-वर्धित नेता बन गया हूँ।’’

संक्षेप में बात करें तो ‘प्रोजेक्ट स्टारफिश’ एक ऐसी परियोजना है जो दूरदर्शी होने के अलावा एक ऐसा रचनात्मक व्यापार माॅडल है जो व्यापार उत्पन्न के साथ-साथ सामाजिक प्रभाव भी पैदा करता है। अंत में शुभाशीष कहते हैं, 


‘‘लोग कहते हैं कि वास्तविक खोज सिर्फ नए उत्पाद, जमीन या अविष्कार में नहीं है बल्कि एक ही चीज को अलग दृष्टिकोण से देखना होती है। में हर दिन नई संभावनाओं को देखता हूँ और लाखों के लिये एक सुनहरे कल की कल्पना करता हूँ।’’


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Worked with Media barons like TEHELKA, TIMES NOW & NDTV. Presently working as freelance writer, translator, voice over artist. Writing is my passion.

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