राकेश रोशन: एक ऐसा पिता जिसने अपने बेटे को सुपरस्टार बना दिया

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कहा जाता है कि निर्माण के दौरान राकेश रोशन बेहतर फिल्म बनाने के लिए परफेक्ट शॉट के लिए टेक पर टेक लेते हैं। अपने बेटे को सुपरस्टार बनाने में मुख्य भूमिका भी उन्हीं की मानी जाती है।

फोटो साभार: सोशल मीडिया
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ऐसा भी नहीं कि रोशन फैमिली का हर दिन रोशन रहा हो। अक्सर झटके भी खाने पड़े हैं। 'कहो ना प्यार है' फिल्म की कमाई में हिस्सेदारी के लिए उनको सन 2000 में उनके ऑफिस के बाहर दो शूटर्स ने गोली मार दी थी। डॉक्टरों ने उनकी जान बचा ली। 

अस्सी के दशक में एक दिन राकेश रोशन ने कहा था, ‘हीरो बन कर तो हम डायरेक्टर के हाथों की कठपुतली होते हैं, एक दिन मैं अपनी कहानियां खुद बनाऊंगा और तब पूरी फिल्म का कैनवास मेरा होगा।’ और उन्होंने वह सच कर दिखाया। और उन्होंने अपने अभिनय के खराब दिनो में ही गुस्साकर सर मुंडवा लिया था। फिर चल पड़े अपनी राह।

करियर की असफलताओं को कामयाबी में बदल देने का हुनर तो कोई अभिनेता, निर्माता-निर्देशक राकेश रोशन से सीखे। उन्हे 'क' अक्षर से फ़िल्में बनाने के लिए भी जाना जाता हैं। उनका जन्म 6 सितंबर 1949 को मुंबई में हुआ था। उनके पिता भी बॉलीवुड निर्देशक थे। उनके छोटे भाई का नाम राजेश रोशन है। वह संगीत निर्देशक हैं। राकेश रोशन की प्रारंभिक शिक्षा सैनिक स्कूल, महाराष्ट्र में हुई, शादी जे ओमप्रकाश की बेटी पिंकी से, दो संतानें हैं उनकी, बेटा ऋतिक रोशन और बेटी सुनयना।

फोटो साभार: सोशल मीडिया
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राकेश रोशन ने अपने करियर की शुरुआत बतौर अभिनेता (सपोर्टिंग किरदार) 1970 में फिल्म 'घर-घर की कहानी' से की थी। कम ही फिल्मों में वह अभिनेता रहे। वर्ष 1980 में उन्होंने अपनी फिल्म निर्माता कंपनी खोल दी। इस प्रोडक्शन हाउस की पहली, और फ्लॉप फिल्म बनी, 'आप के दीवाने', लेकिन अगली फिल्म 'कामचोर' कामयाब रही। निर्माता-निर्देशक के रूप में 1995 में बनी फिल्म ‘करण-अर्जुन’ की बेशुमार लोकप्रियता के असली हीरो तो राकेश रोशन रहे। उनकी ऐसी ही यादगार फिल्में रहीं, ‘कोई मिल गया’, ‘क्रिश’, ‘किशन कन्हैया’, ‘कहो ना प्यार है’ (लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज) आदि, जिनसे बॉक्स-ऑफिस पर रिकॉर्ड कमाई हुई। 

यद्यपि ‘खून भरी माँग’ से उन्हें अपेक्षित लाभ नहीं हो पाया था। अस्सी के दशक में एक दिन राकेश रोशन ने कहा था, ‘हीरो बन कर तो हम डायरेक्टर के हाथों की कठपुतली होते हैं, एक दिन मैं अपनी कहानियां खुद बनाऊंगा और तब पूरी फिल्म का कैनवास मेरा होगा।’ और उन्होंने वह सच कर दिखाया। और उन्होंने अपने अभिनय के खराब दिनो में ही गुस्साकर सर मुंडवा लिया था। फिर चल पड़े अपनी राह

बीच के दिनो में राकेश रोशन तीन साल लापता से रहे। वह और बेटा ऋतिक रोशन दोनों फिल्मफेयर अवार्ड से नवाज़ा जा चुका है। कहा जाता है कि निर्माण के दौरान राकेश रोशन बेहतर फिल्म बनाने के लिए परफेक्ट शॉट के लिए टेक पर टेक लेते हैं। अपने बेटे को सुपरस्टार बनाने में मुख्य भूमिका भी उन्हीं की मानी जाती है। वह 'मन मंदिर', 'खेल-खेल में', 'बुलट', 'हत्यारा' आदि में जलवा दिखा चुके हैं। वह आंख मिचौली, खूबसूरत, पराया धन, कामचोर में मुख्य अभिनेता रहे। राकेश रोशन प्रोड्यूसर, डाइरेक्टर ही नहीं, सफल पटकथाकार भी साबित हो चुके हैं।

ऐसा भी नहीं कि रोशन फैमिली का हर दिन रोशन रहा हो। अक्सर झटके भी खाने पड़े हैं। 'कहो ना प्यार है' फिल्म की कमाई में हिस्सेदारी के लिए उनको सन 2000 में उनके ऑफिस के बाहर दो शूटर्स ने गोली मार दी थी। डॉक्टरों ने उनकी जान बचा ली। उनके बेटे ऋतिक रोशन की अभिनेत्री कंगना रनौत से कानूनी जंग आज भी जारी है। रनौत चाहती हैं, ऋतिक उनसे माफी मांगें। अगर वह ऐसा नहीं करते हैं तो वह दुनिया को सच बताएंगी। अभी वह मामला समाप्त नहीं हुआ है। बहरहाल, कल उनके 68वें जन्मदिन पर फिल्मी सितारों ने दिल खोलकर बधाइयां शेयर की

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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