106 वर्षीय मस्तानम्मा हैं भारत की सबसे बुजुर्ग यूट्यूबर

आंध्र प्रदेश की 106 वर्षीय मस्तानम्मा का खाना बनाने का हुनर आपको रूबरू कराएगा पारम्परिक ज़ायकों से...

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आज के दौर में इंटरनेट एक महत्वपूर्ण एवं प्रचलित प्लेटफॉर्म है और यह अनेकों प्रतिभाशाली व्यक्तियों को यूट्यूब वीडियो के माध्यम से गैजेट समीक्षाएँ, खाना पकाने के कार्यक्रम, कॉमेडी और कई अन्य बहुत से विषयों पर अपने काम को प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करता है। यूट्यूब का उपयोग करने वाली सम्भवतः भारत की सबसे अधिक आयु की आंध्र प्रदेश की 106 वर्षीय मस्तानम्मा खाना पकाने की प्रवीणता की वजह से अब इंटरनेट पर एक मशहूर शख्शियत है।

फोटो साभार: यूट्यूब
फोटो साभार: यूट्यूब
मस्तानम्मा का यूट्यूब पर एक चैनल है, जिसे उनके पोते द्वारा चलाया जाता है। इस यूट्यूब चैनल पर उन्हें खाना पकाते देखा जा सकता है। वे आंध्र प्रदेश के कई लोकप्रिय स्थानीय जायके वाले व्यंजन बनाती है। उनके 'कंट्री फूड्स' नामके इस यूट्यूब चैनल को 250,000 से अधिक लोगों ने सब्सक्राइब किया है।

आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले में गुड़ीवाड़ा की मस्तानाम्मा खाना पकाने से सम्बंधित काम परिवार की युवा पीढ़ी के किसी की भी सदस्य की सहायता के बिना खुद से ही करना पसंद करती हैं। उन्हें भी किसी अन्य भारतीय दादी अम्मा की तरह ही उनके पास आने वाले हर व्यक्ति के साथ सत्कार और खिलाने-पिलाने के लिए आसपास के इलाके में अच्छी तरह से जाना जाता है.

मस्तानाम्मा के पहले प्रशंसक उनके अपने पोते के. लक्ष्मण ही थे, जिन्होंने अपने दोस्तों के साथ एक रात स्वयं भोजन बनाने के बाद यूट्यूब पर एक चैनल शुरू करने का निश्चय किया। बारक्रॉफ्ट के साथ बातचीत में के. लक्ष्मण कहते हैं,

'एक रात को भूख लगाने पर, मेरे दोस्त और मैंने खुद के लिए कुछ खाना तैयार किया और उसी दौरान हमारे मन में एक यूट्यूब चैनल शुरू करने का विचार आया, ताकि लोग इन पकाने वाले ट्यूटोरियल को देख कर खाना बनाना सीख सकें। आश्चर्यजनक रूप से हमारा पहला वीडियो ही वायरल हो गया और तब मैंने इस चैनल को अपनी दादी की मदद से आगे चलाने का फैसला किया। जिससे लोगों को ताजी सामग्री के साथ खाना पकाने का पारंपरिक तरीका जानने और समझने का अवसर मिल सके। जब हम उनका वीडियो बना रहे थे, तब वे नहीं समझ पा रही थीं, कि ये सब क्या हो रहा है, लेकिन जब उन्हें पूरी बात समझ में आयी तो उन्हें बहुत खुश हुयी।'

मस्तानाम्मा सीफ़ूड और अंडा डोसा बनाने में माहिर है और वे गर्व से कहती हैं, कि गांव में हर कोई उनके बनाये भोजन को पसंद करता है। हालांकि हमारे लिए ये एकदम नया और अजीब हो सकता है, लेकिन अपनी ज़िन्दगी के सौ साल से भी ज्यादा पूरा कर चुकी इस महिला का ये काम यह साबित करता है, कि जीवन के किसी भी चरण में कोई भी प्रयास शुरू किया जा सकता है।

-प्रकाश भूषण सिंह

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