ट्रक इंडस्ट्री को नई सुविधाओं से जोड़ने में जुटे Return Trucks

Return Trucks का काम ट्रक और लोड मालिकों को मिलानाएक साल में अबतक 5700 से ज्यादा ट्रक ऑपरेटर और 4600 से ज्यादा लोड मालिक जुड़ेट्रक को वर्तमान स्थिति जानने की भी पूरी सुविधा'find trucks’ टैब के माध्यम से कोई भी ये जान सकता है कि ट्रक कहां है

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खेल सारा भूख का है, भूख ना हो, तो मलाई भी मन को नहीं भाती लेकिन भूख हो तो घास को भी रोटी की शक्ल दी जा सकती है. कुछ ऐसा ही कारनामा कर रहे हैं सुधाकर विंथा ...सुधाकर विंथा एक मुश्किल सफर पर हैं. बिल्कुल वैसे ही जैसे भारतीय राजमार्गों पर लगी ट्रकों की कतार. ये माल ढोने वाले ट्रक हमेशा इस देश के मोहक परिदृश्य का हिस्सा रहे हैं. अक्सर किसी का ध्यान इस ओर नहीं जाता कि ये ट्रक देश के कामकाज को सुचारू रखने में बड़ी भूमिका निभाते हैं, लेकिन सुधाकर अपनी ReturnTrucks टीम के साथ इन्हीं ट्रकों को और ज्यादा प्रभावी बनाना चाहते हैं.

लेकिन कैसे?

ReturnTrucks “ट्रक और लोड मिलान” मंच के जरिए ट्रक और लोड मालिकों को मिलाता है. यहां ग्राहक ट्रक उपलब्धता और लोड उपलब्धता मुफ्त में पोस्ट कर सकते हैं और लोड मालिक अपने ट्रक बुक कर सकते हैं. ट्रकों पर नज़र रखने, सूचना का आदान-प्रदान जैसे विकल्प भी मौजूद हैं.

सुधाकर विंथा ReturnTrucks
सुधाकर विंथा ReturnTrucks

ऐसे हुई शुरुआत

सुधाकर 15 साल से लंबे वक्त तक सिस्को, याहू और टोयोटा जैसी कंपनियों के साथ काम कर चुके हैं. इसके बाद उन्होंने प्राथमिक शिक्षा पर अमेरिका में एक कंपनी शुरू करने का फैसला किया, जो मुख्य रूप से इंटरैक्टिव मोबाइल एप्लिकेशन (स्मार्ट किड्स) पर काम करती है. भारत की अपनी यात्राओं के दौरान, उन्हें ReturnTrucks जैसे एक मंच की जरुरत महसूस हुई. सुधाकर के शब्दों में "मैं एक दिन एक ट्रक की तलाश में था. यह जरूरी था और बाद में मुझे पता चला कि इसी दौरान मेरे घर के बहुत करीब एक ट्रक लोड के लिए इंतजार कर रहा था. तब मुझे इस उद्योग के लोगों को जोड़ने की जरुरत महसूस हुई और उन्हें जोड़ने के लिए एक प्रौद्योगिकी मंच का निर्माण करने का मौका भी मिला.“ सुधाकर ने इस उद्योग से जुड़े कुछ लोगों को साथ लेकर ReturnTrucks की टीम तैयार की.

जर्जर सड़क

इस उद्योग के बारे में सुधाकर बताते हैं “करीब 120 बिलियन डॉलर की ये इंडस्ट्री 5 या इससे भी कम ट्रक रखने वाले 80 फीसदी से ज्यादा ट्रक ऑपरेटरों के साथ इस उद्योग के कई महारथियों के स्वागत के लिए तैयार है. इस इंडस्ट्री को बेहतर तरीके से काम करने और प्रौद्योगिकी के प्रति जागरुकता लाने के लिए जमीनी स्तर पर काम करने की जरुरत है. वर्तमान ट्रक बुकिंग प्रणाली बुकिंग एजेंटों और दलालों के रूप में काम करने वाले बिचौलियों पर निर्भर है.“ इससे ये साफ होता है कि ट्रकों के उपयोग को कम करने के लिए जो तंत्र काम कर रहे हैं वो रास्ते का सबसे बड़ा रोड़ा हैं, खासतौर से तब जब कोई ट्रक अपनी मंजिल की तरफ लौट रहा हो.

बस इसी मौके पर ReturnTrucks की एंट्री होती है.

छोटे और मध्यम व्यापारी किफायती उपाय चाहते हैं, जिससे उन्हें आसानी से काम मिल सके और तकनीकी रूप से सशक्त होकर वो अपनी प्रतिष्ठा बढ़ा सकें. सुधाकर के मुताबिक छोटे ट्रक ऑपरेटरों को माल-ढुलाई से जोड़ना और शिपमेंट की स्थिति में सुधार लाना इस उद्योग के लिए सबसे बड़ा मौका है. लोड मालिक आमतौर पर कॉरपोरेट होते हैं. Return trucks का पूरा ध्यान लौटने वाले ट्रकों पर होता है ताकि ट्रक मालिकों को यात्रा में लगने वाला समय कम करने के लिए आश्वस्त किया जा सके जबकि लोड मालिक समय पर वितरण सुनिश्चित कर सकें वो भी अपेक्षाकृत कम कीमत पर.

संकर्षण

विशाखापट्टनम में स्थित, ReturnTrucks की शुरुआत दिसंबर 2013 में हुई वो भी 6 महीने तक उस बाजार का विश्लेषण करने के बाद जिस पर बिना एक दूसरे को जोड़े ही काम करने वाले एजेंटों/परिवहन संचालकों का दबदबा है. पहला बीटा उत्पाद मार्च 2014 में शुरू किया गया था और Returntrucks.in को अभी तक दर्ज लोड-मालिकों और ट्रांसपोर्टरों दोनों की तरफ से बाजार में अच्छी प्रतिक्रिया मिली है. उनके साथ 12 महीने में ही 5700 से ज्यादा ट्रक ऑपरेटर और 4600 से ज्यादा लोड मालिक जुड़ चुके हैं. साथ ही एक बड़ा वितरण चैनल और राज्य सरकार की कई परियोजनाएं भी इनके पास हैं. मौजूदा वक्त में, रिटर्न ट्रक्स हर महीने 750 लीड पाता है जो हर महीने उचित कीमत और निर्धारित 150 मीट्रिक टन* कार्बन फुटप्रिंट में कमी के साथ 200 लोड सफलतापूर्वक जोड़ता है.

मेरे जैसे एक इंसान के लिए जिसने अभी तक इस तरह की किसी सेवा का लाभ नहीं लिया है, ये कहना मुश्किल है कि ये सेवा कैसे काम करती है. लेकिन ‘find trucks’ टैब के माध्यम से कोई भी ये जान सकता है कि ट्रक कहां है. ReturnTrucks के पास नागार्जुन समूह और भारतीय डाक जैसे ग्राहक हैं.

आगे का सफर

14 सदस्यीय ReturnTrucks की मजबूत टीम ने पूरी तरह कमर कस लिया है. ReturnTrucks की योजना है कि अगले 6 महीने में चेन्नई और बेंगलुरु में अपनी सेवा का विस्तार किया जाए. साथ ही साथ, धीरे धीरे खास तौर से भारत के मुतल्लिक सुविधाओं को जोड़ते जाना है, जैसे एक क्लिक में बीमा, आसानी से मैनेज किया जा सकने वाला जीपीएस ट्रैकिंग सॉल्यूशन – Trac247. विज़न की बात करें, तो सुधाकर बताते हैं, “ReturnTrucks भारत के विशाल सड़क-परिवहन तंत्र में काम करने लिए प्रतिबद्ध है, साथ ही परिवहन व्यवसाय को ज्यादा सक्षम बनाने के लिए तकनीकी रूप से सशक्त होने की दिशा में काम कर रहा है.”

ReturnTrucks टीम का ये प्रयास बेशक दुस्साहसी और जोखिम भरा है, लेकिन मौजूदा वक्त में ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री जिस हालत में है, ऐसे नए प्रयास करने में कोई गुरेज नहीं.

Shippr और Blowhorn जैसी कंपनियां इंट्रासिटी छोटे ट्रक संगठित कर रही हैं, जबकि ReturnTrucks इंटरसिटी की परिधि से आगे बढ़ते हुए पूरे देश की ट्रक इंडस्ट्री में जाना चाहता है. बेशक अभी शुरुआत भर है, लेकिन ReturnTrucks निश्चित तौर पर एक ऐसी नजीर साबित होने जा रहा है, जो ये साबित करेगा कि तकनीक की मदद से हर कल्पनाओं में पर लग सकते हैं और बेहद ‘असंगठित मार्केट’ को भी संगठित किया जा सकता है.